हाईकोर्ट (सोर्स- फोटो नवभारत) 
प्रयागराज

High Court Verdict: हाईकोर्ट का बड़ा फैसला; अवैध रिमांड आदेश रद्द, बंदी को तत्काल रिहा करने के निर्देश

Allahabad High Court Verdict: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने झांसी मामले में गिरफ्तारी और रिमांड आदेश को अवैध करार देते हुए बंदी की तत्काल रिहाई का आदेश दिया। कोर्ट ने भविष्य में अधिक सावधानी बरतने की हिदायत दी

स्निग्धा श्रीवास्तव

Allahabad High Court Verdict In Jhansi: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने झांसी के नवाबाद थाना क्षेत्र से जुड़े एक मामले में गिरफ्तारी और रिमांड आदेश को अवैध करार देते हुए बंदी को तत्काल रिहा करने का निर्देश दिया है। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि किसी व्यक्ति को अवैध रूप से हिरासत में रखा जाता है तो उसकी बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका (हैबियस कॉर्पस) पर सुनवाई की जा सकती है। साथ ही रिमांड मजिस्ट्रेट को भविष्य में अधिक सावधानी बरतने की हिदायत दी गई है।

गिरफ्तारी के कारण लिखित रूप से नहीं बताए गए

न्यायमूर्ति सिद्धार्थ और न्यायमूर्ति विवेक सरन की खंडपीठ ने यह आदेश धर्मेश लखेड़ा की याचिका पर सुनवाई करते हुए पारित किया। याची की ओर से अधिवक्ता उदयभान सिंह ने दलील दी कि गिरफ्तारी मेमो और रिमांड आदेश में गंभीर कानूनी खामियां हैं। गिरफ्तारी के कारण लिखित रूप से नहीं बताए गए और मजिस्ट्रेट ने न्यायिक विवेक का प्रयोग किए बिना रिमांड आदेश पारित कर दिया।

सुनवाई के दौरान याची पक्ष ने सर्वोच्च न्यायालय के चर्चित मोहम्मद रोजर शाह बनाम महाराष्ट्र राज्य मामले का हवाला देते हुए कहा कि गिरफ्तारी के कारणों की लिखित सूचना देना कानूनन अनिवार्य है। अदालत ने रिकॉर्ड का अवलोकन करने के बाद पाया कि गिरफ्तारी और रिमांड की प्रक्रिया निर्धारित कानूनी प्रावधानों के अनुरूप नहीं थी।

तत्काल रिहाई का आदेश

खंडपीठ ने गिरफ्तारी मेमो और रिमांड आदेश दोनों को निरस्त करते हुए बंदी की तत्काल रिहाई का आदेश दिया। कोर्ट ने कहा कि रिमांड आदेश पारित करते समय मजिस्ट्रेट को तथ्यों और कानूनी प्रक्रियाओं का गंभीरता से परीक्षण करना चाहिए।

इसी बीच हाईकोर्ट ने सोनभद्र के राबर्ट्सगंज स्थित पंचशील मल्टी स्पेशियलिटी हॉस्पिटल के निदेशक पवित कुमार मॉर्य और एक अन्य को भी राहत देते हुए उनकी गिरफ्तारी पर अंतरिम रोक लगा दी है। दोनों के खिलाफ 27 अप्रैल 2026 को राबर्ट्सगंज थाने में विभिन्न आरोपों में एफआईआर दर्ज की गई थी।

एफआईआर निरस्त कराने और गिरफ्तारी पर रोक लगाने की मांग को लेकर दाखिल याचिका पर सुनवाई करते हुए अदालत ने राज्य सरकार से जवाब तलब किया है। याची पक्ष का कहना था कि प्राथमिकी दुर्भावनापूर्ण तरीके से दर्ज कराई गई है। मामले में अगली सुनवाई तक गिरफ्तारी पर रोक बरकरार रहेगी।

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