High Court Remarks Police Investigation: इलाहाबाद हाईकोर्ट में मंगलवार को उत्तर प्रदेश के पुलिस महानिदेशक (DGP) राजीव कृष्ण की व्यक्तिगत पेशी के दौरान पुलिस की कार्यप्रणाली और जांच की गुणवत्ता को लेकर अदालत ने बेहद सख्त टिप्पणी की। न्यायमूर्ति समीर जैन की एकल पीठ ने कहा कि अदालत के सामने ऐसे कई मामले आते हैं, जिनमें जांच की गुणवत्ता पर गंभीर सवाल खड़े होते हैं। डीजीपी की ओर से पुलिस के बेहतर कनविक्शन रेट(दोषसिद्धि दर ) का हवाला दिए जाने पर कोर्ट ने कहा कि आंकड़े अपनी जगह हैं, लेकिन हाईकोर्ट के सामने आने वाले मामलों से जमीनी हकीकत भी सामने आती है।
मामला महोबा के चर्चित हत्याकांड से जुड़े पुष्पराज सिंह उर्फ बबलू की जमानत अर्जी का है। याचिकाकर्ता 23 जून 2025 से जेल में है। सुनवाई के दौरान पुलिस की ओर से हाईकोर्ट के निर्देशों का समय पर अनुपालन नहीं किए जाने और काउंटर एफिडेविट दाखिल करने में देरी पर अदालत ने नाराजगी जताई थी। इसी के बाद DGP को व्यक्तिगत रूप से पेश होकर स्थिति स्पष्ट करने का निर्देश दिया गया था।
अदालत ने इससे पहले यह भी कहा था कि पुलिस अधिकारियों की ओर से कोर्ट के आदेशों के अनुपालन में कथित सुस्ती के कारण हत्या जैसे गंभीर मामलों में जमानत अर्जियां लंबे समय तक लंबित रह जाती हैं। कोर्ट ने इसे गंभीरता से लेते हुए DGP से पूछा था कि आखिर ऐसी स्थिति क्यों उत्पन्न हो रही है।
सुनवाई के दौरान पुलिस रिकॉर्ड और CCTV फुटेज को लेकर भी हाईकोर्ट ने गंभीर चिंता जताई। कोर्ट ने कहा कि कई बार हलफनामे में रिकॉर्ड और फुटेज उपलब्ध होने की बात कही जाती है, लेकिन जब अदालत रिकॉर्ड तलब करती है तो CCTV फुटेज ही उपलब्ध नहीं होती।
व्यक्तिगत स्वतंत्रता से जुड़े मामलों में पुलिस से निर्देश मिलने में होने वाली देरी पर भी कोर्ट ने सवाल उठाया। अदालत ने कहा कि ऐसे मामलों में देरी स्वीकार्य नहीं हो सकती। DGP ने व्यवस्था में सुधार के लिए उठाए जा रहे कदमों और समितियों के गठन की जानकारी कोर्ट को दी।
इस पर न्यायमूर्ति समीर जैन ने कहा कि अधिकारी सक्षम हैं और अदालत समस्याएं बताएगी, जबकि उनका समाधान पुलिस प्रशासन को निकालना होगा।
अदालत की सख्ती का संदेश साफ है कि पुलिस की जांच, रिकॉर्ड के रखरखाव और न्यायालय के निर्देशों के अनुपालन में लापरवाही को अब हल्के में नहीं लिया जाएगा। मामले की सुनवाई के दौरान इलाहाबाद हाईकोर्ट ने पुलिस की जमीनी कार्यप्रणाली और अदालत में पेश किए जाने वाले रिकॉर्ड के बीच अंतर पर भी गंभीर चिंता जताई।