इलाहाबाद हाई कोर्ट सोर्स- सोशल मीडिया
प्रयागराज

UP पुलिस को HC की फटकार: गुंडा एक्ट के दुरुपयोग पर की सख्त टिप्पणी, लापरवाह अफसरों से वसूला जाएगा मुआवजा

Allahabad High Cour Observations On Goonda Act: गाजियाबाद पुलिस पर इलाहाबाद HC ने सख्त टिप्पणी की है। 2 मुकदमों पर गुंडा एक्ट लगाने की कार्रवाई को कोर्ट ने रद्द किया।

ओमप्रकाश सिंह परिहार, अमन मौर्या

Ghaziabad Police Goonda Act Quashed: इलाहाबाद हाई कोर्ट ने गाजियाबाद पुलिस की ओर से गुंडा एक्ट के तहत की गई कार्रवाई पर सख्त टिप्पणी की है। न्यायमूर्ति संदीप जैन की एकलपीठ ने अभिषेक त्यागी के खिलाफ उत्तर प्रदेश गुंडा नियंत्रण अधिनियम, 1970 की धारा 2/3 के तहत की गई कार्रवाई को रद्द कर दिया।

कोर्ट ने राज्य सरकार को याची को 50 हजार रुपये मुआवजा देने का भी आदेश दिया है। यह राशि एक महीने के भीतर अदा करनी होगी। कोर्ट ने कहा है कि राज्य सरकार चाहे तो मुआवजे की राशि संबंधित अधिकारियों के वेतन से वसूल सकती है।

2022 और 2025 में दर्ज हुआ था मुकदमा

मामला गाजियाबाद के टीला मोड़ थाना क्षेत्र से जुड़ा है। याची के खिलाफ वर्ष 2022 और 2025 में दो मुकदमे दर्ज हुए थे। इन्हीं मुकदमों के आधार पर पुलिस ने उसके खिलाफ गुंडा एक्ट की 3 कार्रवाई शुरू की थी। अपर पुलिस आयुक्त ने 18 सितंबर, 2025 को आदेश जारी कर याची को छह महीने तक प्रत्येक महीने के दूसरे और चौथे शनिवार को थाने में हाजिरी लगाने का निर्देश दिया था।

इस आदेश के खिलाफ याची ने मंडलायुक्त मेरठ मंडल के समक्ष अपील दाखिल की, लेकिन 10 दिसंबर 2025 को अपील खारिज कर दी गई। इसके बाद दोनों आदेशों को हाई कोर्ट में चुनौती दी गई।

कोर्ट ने दिया मुआवजा देने का आदेश

याची के अधिवक्ता ने कोर्ट में दलील दी कि केवल दो मुकदमों के आधार पर किसी व्यक्ति को अभ्यस्त अपराधी मानकर गुंडा एक्ट के दायरे में नहीं लाया जा सकता। हाई कोर्ट ने इस दलील को स्वीकार करते हुए कहा कि दोनों मुकदमों के बीच करीब तीन वर्ष का अंतर है। इससे यह निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता कि याची आदतन अपराधी है।

इलाहाबाद हाई कोर्ट ने कहा कि किसी व्यक्ति के खिलाफ केवल एक या दो मुकदमे दर्ज होने के आधार पर गुंडा एक्ट का इस्तेमाल करना कानून के प्रावधानों का दुरुपयोग हो सकता है। अदालत ने कार्रवाई को निरस्त करते हुए मुआवजा देने का आदेश पारित किया।

दो मुकदमों के आधार पर कार्रवाई पर सवाल

हाई कोर्ट ने माना कि किसी व्यक्ति को अभ्यस्त अपराधी साबित करने के लिए केवल मुकदमों की संख्या पर्याप्त नहीं है। पुलिस की कार्रवाई के पीछे ऐसे तथ्य और परिस्थितियां होनी चाहिए, जिनसे कानून के तहत आवश्यक आधार स्थापित हो।

अधिकारियों के वेतन से वसूली की छूट

कोर्ट ने राज्य सरकार को 50 हजार रुपये मुआवजा एक महीने में देने का निर्देश दिया है। साथ ही कहा कि सरकार चाहे तो यह राशि उन अधिकारियों के वेतन से वसूल सकती है, जिनकी कार्रवाई को अदालत ने अनुचित माना है।

भारत पर 100% टैरिफ का खतरा, खरगे ने PM मोदी को घेरा, बोले- सरकार की विदेश और व्यापार नीति बुरी तरह फेल

पीएम मोदी करेंगे सेमीकॉन इंडिया के पांचवें संस्करण का उद्घाटन, 52 देशों के प्रतिनिधि लेंगे हिस्सा

वीर सैनिकों के सम्मान में रक्षा मंत्रालय की विशेष पहल, आजीवन रेल यात्रा की सुविधा; परिवार भी उठाएंगे लाभ

बर्बाद हो जाएंगे छोटे कारोबारी, UPI चार्ज पर भड़के संजय सिंह, बोले- सरकार ने संसद में झूठ बोला

पाकिस्तान में ताक पर कोर्ट का आदेश! इमरान खान की बहनों को फिर झटका, अदियाला जेल प्रशासन ने मिलने से रोका