सिर्फ जेल आचरण नहीं...समय पूर्व रिहाई पर इलाहाबाद HC ने सुनाया अहम फैसला, UP सरकार के फैसले के किया रद्द

Prisoner Premature Release Criteria UP: कैदियों की समय पूर्व रिहाई को लेकर इलाहाबाद हाईकोर्ट ने राज्य सरकार के एक आदेश को रद्द कर दिया है। साथ ही एक महीने में आदेश देने का निर्देश भी दिया।
Allahabad High Court Premature Release Ruling
इलाहाबाद हाईकोर्टसोर्स- सोशल मीडिया
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Allahabad High Court Premature Release Ruling: इलाहाबाद हाई कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण निर्णय में कहा है कि किसी बंदी की समय पूर्व रिहाई पर फैसला केवल जेल में उसके आचरण के आधार पर नहीं किया जाना चाहिए। इसके लिए सामाजिक-आर्थिक स्थिति, मनोवैज्ञानिक मूल्यांकन, समाज में पुनर्स्थापित होने की संभावना और उसे आगे जेल में रखने की आवश्यकता जैसे व्यापक पहलुओं पर विचार जरूरी है।

न्यायमूर्ति जे जे मुनीर व न्यायमूर्ति तरुण सक्सेना की खंडपीठ ने हत्या के मामले में 19 साल से अधिक समय से जेल में बंद आजीवन कैदी आदिल उर्फ सीरन की समय पूर्व रिहाई की मांग खारिज करने वाले राज्य सरकार के आदेश को रद्द कर दिया। कोर्ट ने सरकार को मामले पर नए सिरे से विचार कर एक महीने में आदेश पारित करने का निर्देश दिया।

सरकार ने तय मानकों पर नहीं किया विचार

हाई कोर्ट ने कहा कि समय पूर्व रिहाई पर निर्णय लेते समय केवल जेल के अंदर बंदी के व्यवहार को आधार नहीं बनाया जा सकता। सामाजिक-आर्थिक परिस्थितियों, मनोवैज्ञानिक मूल्यांकन और समाज में पुनर्वास की संभावनाओं समेत अन्य प्रासंगिक पहलुओं पर भी विचार किया जाना चाहिए। कोर्ट ने राज्य सरकार को निर्देश दिया कि मामले में नए सिरे से आदेश पारित किया जाए।

मामला प्रयागराज के थाना कर्नलगंज में दर्ज हत्या के मुकदमे से जुड़ा है। सत्र अदालत ने मामले में आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी। आदिल के साथ सह-अभियुक्त सुफियान और रजिया को भी सजा हुई थी, जबकि बीरू सिंह बरी हो गया था।

सुप्रीम कोर्ट से भी मिली थी राहत

इलाहाबाद हाई कोर्ट ने तीन अगस्त 2018 को रजिया को बरी कर दिया था, जबकि आदिल और सुफियान की सजा बरकरार रही। इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने 16 सितंबर 2020 को एसएलपी खारिज कर दी। याचिका में कहा गया था कि आदिल बिना किसी छूट के 19 साल पांच महीने जेल में रह चुका है। सह-अभियुक्त सुफियान को 29 जनवरी 2021 को समय पूर्व रिहाई दी गई, लेकिन आदिल को यह लाभ नहीं मिला। वह आठ दिसंबर 2005 से जेल में बंद है।

Allahabad High Court Premature Release Ruling
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राज्य सरकार के अनुसार 16 वर्ष पूरे होने पर पहली जून 2022 को प्रस्ताव भेजा गया था, जिसे राज्यपाल ने 24 फरवरी 2023 को खारिज कर दिया था। अब हाई कोर्ट के आदेश के बाद सरकार को मामले पर निर्धारित मानकों के आधार पर फिर से विचार करना होगा।

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