केवल गैंग चार्ट में नाम होना गैंगस्टर अपराध का प्रमाण नहीं
कार्रवाई के लिए संगठित गिरोह की गतिविधियों के ठोस साक्ष्य जरूरी
न्यायमूर्ति संदीप जैन की पीठ ने सुनाया फैसला
Gangster Act: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने गैंगस्टर एक्ट के तहत दर्ज एक मामले में महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए स्पष्ट किया है कि केवल गैंग चार्ट में नाम दर्ज होने या किसी व्यक्ति के खिलाफ आपराधिक मुकदमे होने से उसे गैंगस्टर नहीं माना जा सकता। इसके लिए यह साबित करना जरूरी है कि संबंधित व्यक्ति संगठित गिरोह के माध्यम से हिंसा, धमकी या दबाव का इस्तेमाल कर सार्वजनिक व्यवस्था को प्रभावित करने अथवा अनुचित आर्थिक और भौतिक लाभ अर्जित करने में शामिल था। इस टिप्पणी के साथ अदालत ने वर्ष 2002 से चल रही करीब 24 साल पुरानी आपराधिक कार्रवाई को निरस्त कर दिया।
न्यायमूर्ति संदीप जैन की एकल पीठ ने दिनेश कुमार उर्फ टीटू एवं अन्य की याचिका पर सुनवाई करते हुए यह आदेश दिया। मामला मथुरा जिले के गोवर्धन थाने से जुड़ा है। पुलिस ने नवंबर 2001 में दिनेश कुमार उर्फ टीटू को कथित गिरोह का सरगना बताते हुए उसके अन्य सदस्यों के खिलाफ गैंगस्टर एक्ट की धारा 2/3 के तहत कार्रवाई की थी। गैंग चार्ट में चार पुराने आपराधिक मुकदमों को आधार बनाया गया था। जांच के बाद आरोपपत्र दाखिल हुआ और 29 जुलाई 2002 को विशेष अदालत ने उसका संज्ञान लिया था।
याचिकाकर्ताओं की ओर से दलील दी गई कि गैंगस्टर कार्रवाई के आधार बने चार मामलों में से तीन में सक्षम अदालतें उन्हें बरी कर चुकी हैं। चौथे मामले में भी गंभीर आरोपों से राहत मिल चुकी है और केवल आईपीसी की धारा 323/34 के तहत मामूली मारपीट के अपराध में सजा हुई थी। इस सजा के खिलाफ इलाहाबाद हाईकोर्ट में आपराधिक पुनरीक्षण लंबित है। बचाव पक्ष का कहना था कि इन परिस्थितियों में गैंगस्टर एक्ट की कार्रवाई जारी रखना न्यायसंगत नहीं है।
राज्य सरकार ने याचिका का विरोध करते हुए कहा कि कार्रवाई के समय गैंग चार्ट में दर्ज मुकदमे मौजूद थे और सक्षम अधिकारियों की मंजूरी के बाद ही अभियोजन शुरू किया गया था। हालांकि, हाईकोर्ट ने पाया कि गैंग चार्ट तैयार करने और उसे मंजूरी देने की प्रक्रिया में संबंधित अधिकारियों ने स्वतंत्र विवेक का समुचित इस्तेमाल नहीं किया। अदालत ने सुप्रीम कोर्ट के पूर्व निर्णयों का हवाला देते हुए कहा कि गैंगस्टर एक्ट अपने आप में कोई अलग मूल अपराध नहीं बनाता, बल्कि संगठित गिरोह की गतिविधियों के आधार पर कार्रवाई का प्रावधान करता है।
हाईकोर्ट ने माना कि आधारभूत मुकदमों के परिणाम और उपलब्ध तथ्यों को देखते हुए आरोपियों के खिलाफ गैंगस्टर एक्ट की कार्यवाही जारी रखने का पर्याप्त आधार नहीं बचता। अदालत ने याचिका स्वीकार करते हुए विशेष न्यायाधीश (गैंगस्टर एक्ट), आगरा की अदालत में राज्य बनाम दिनेश एवं अन्य के नाम से चल रहे विशेष ट्रायल संख्या 317/2002 की पूरी कार्यवाही, आरोपपत्र और 29 जुलाई 2002 के संज्ञान आदेश को निरस्त कर दिया।