

Allahabad High Court Panchayat Election Case: उत्तर प्रदेश में पंचायत चुनाव समय से कराने और ग्राम प्रधानों का कार्यकाल समाप्त होने के बाद प्रशासक नियुक्त करने के मुद्दे पर इलाहाबाद हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। पिछड़ा वर्ग आयोग की ओर से दाखिल रिपोर्ट पर असंतोष जताते हुए अदालत ने उसकी तैयारी के तरीके पर सवाल उठाए।
सुनवाई के दौरान कोर्ट ने टिप्पणी की कि रिपोर्ट जमीनी स्तर पर जाकर तैयार करने के बजाय दफ्तर में बैठकर बनाई गई प्रतीत होती है। पंचायत चुनाव से जुड़ी 11 याचिकाओं पर सुनवाई के दौरान अदालत ने पिछड़ा वर्ग आयोग की रिपोर्ट को लेकर अपनी नाराजगी जाहिर की। मामले में अब सोमवार को सुबह 11 बजे फिर सुनवाई होगी।
इन याचिकाओं में ग्राम प्रधानों को प्रशासक नियुक्त करने और पंचायत चुनाव समय से कराने की मांग की गई है। सुनवाई के दौरान पिछड़ा वर्ग आयोग की ओर से दाखिल हलफनामा भी अदालत के समक्ष रखा गया।
कोर्ट ने उसे रिकॉर्ड पर लेते हुए रिपोर्ट की प्रक्रिया और उसके आधार पर सवाल उठाए। सुनवाई के दौरान अदालत की टिप्पणियों से पंचायत चुनाव की तैयारियों और पिछड़े वर्ग के आरक्षण निर्धारण की प्रक्रिया को लेकर मामला अहम हो गया है।
पंचायत चुनाव को लेकर इलाहाबाद हाईकोर्ट में 11 याचिकाएं दाखिल की गई हैं। इनमें प्रमुख रूप से ग्राम प्रधानों का कार्यकाल समाप्त होने के बाद प्रशासक नियुक्त करने और समय से चुनाव कराने की मांग की गई है। याचिकाकर्ताओं की ओर से चुनाव प्रक्रिया में देरी और उससे जुड़े प्रशासनिक फैसलों को लेकर अदालत का ध्यान आकृष्ट कराया गया है।
मामले में पिछड़ा वर्ग आयोग की रिपोर्ट महत्वपूर्ण है, क्योंकि पंचायत चुनाव में पिछड़े वर्ग के आरक्षण निर्धारण की प्रक्रिया का चुनाव कार्यक्रम पर असर पड़ सकता है। आयोग की ओर से हलफनामा दाखिल किए जाने के बाद अदालत ने उसे रिकॉर्ड पर लिया, लेकिन रिपोर्ट तैयार करने के तरीके पर असंतोष जताया। कोर्ट की टिप्पणी के बाद अब अगली सुनवाई में आयोग की रिपोर्ट और उससे जुड़े तथ्यों पर चर्चा होने की संभावना है।
पंचायत चुनाव से संबंधित याचिकाओं पर सुनवाई पूरी नहीं हो सकी। अदालत ने मामले को आगे की सुनवाई के लिए सोमवार सुबह 11 बजे सूचीबद्ध किया है। अगली सुनवाई में आयोग की रिपोर्ट, आरक्षण निर्धारण की प्रक्रिया और पंचायत चुनाव समय से कराने से जुड़े मुद्दे महत्वपूर्ण रहेंगे।
ग्राम प्रधानों का कार्यकाल समाप्त होने के बाद प्रशासनिक व्यवस्था कैसे संचालित होगी और चुनाव कब तक कराए जाएंगे, इसे लेकर भी इस मामले पर नजर बनी हुई है। हालांकि, फिलहाल इलाहाबाद हाईकोर्ट ने चुनाव की तारीख या प्रशासक नियुक्त करने के संबंध में कोई अंतिम फैसला नहीं सुनाया है। मामले में आगे की स्थिति सोमवार को होने वाली सुनवाई और अदालत के निर्देशों के बाद स्पष्ट होगी।