PCS अलंकार अग्निहोत्री 
उत्तर प्रदेश

शंकराचार्य और UGC पर इस्तीफा देने वाले PCS अलंकार अग्निहोत्री सस्पेंड, जांच के दिए गए आदेश

Alankar Agnihotri Resign: बरेली के सिटी मजिस्ट्रेट पद से इस्तीफा देने वाले PCS अफसर अलंकार अग्निहोत्री पर बड़ा एक्शन हो गया है। अलंकार को निलंबित करने के साथ ही उनके खिलाफ जांच का आदेश दिया गया है।

अर्पित शुक्ला

PCS Alankar Agnihotri Suspended: बरेली के सिटी मजिस्ट्रेट PCS अधिकारी अलंकार अग्निहोत्री को शंकराचार्य के अपमान और यूजीसी एक्ट के खिलाफ इस्तीफा देने के बाद निलंबित कर दिया गया है। उन पर अनुशासनहीनता और सरकारी सेवा शर्तों का उल्लंघन करने का आरोप है। सोमवार को अलंकार अग्निहोत्री ने शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद और यूजीसी के दिशा-निर्देशों के खिलाफ अपनी आपत्ति जताते हुए सोशल मीडिया पर सरकार विरोधी पोस्ट शेयर की थी और इसके बाद उन्होंने अपने पद से इस्तीफा दे दिया था। इसके बाद से ही उन पर बड़ी कार्रवाई के कयास लगाए जा रहे थे।

अलंकार अग्निहोत्री के निलंबन के दौरान उन्हें जिलाधिकारी कार्यालय, शामली से अटैच किया गया है। शासन ने इस पूरे मामले की गंभीरता को ध्यान में रखते हुए बरेली मंडलायुक्त को जांच अधिकारी नियुक्त किया है। मंडलायुक्त को उनके आचरण और सोशल मीडिया पर की गई विवादित टिप्पणियों की विस्तृत जांच करने का आदेश दिया गया है और रिपोर्ट पेश करने को कहा गया है।

क्यों दिया इस्तीफा?

अलंकार अग्निहोत्री ने अपने इस्तीफे के कारणों के रूप में दो मुख्य मुद्दों का उल्लेख किया। पहला, उन्होंने प्रयागराज में माघ मेले के दौरान शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के शिष्यों के साथ हुई कथित बदसलूकी और प्रशासनिक उदासीनता का विरोध किया। दूसरा, उन्होंने यूजीसी द्वारा जारी किए गए हालिया दिशा-निर्देशों को 'काला कानून' बताते हुए इसे ब्राह्मण समाज के हितों के खिलाफ करार दिया था।

बॉयकॉट भाजपा और काला कानून वापस लो

अलंकार अग्निहोत्री ने इस्तीफे के साथ ही सोशल मीडिया पर बॉयकॉट भाजपा और काला कानून वापस लो जैसे नारों के साथ एक पोस्टर शेयर किया था, जिसमें उनकी अपनी फोटो भी थी। प्रशासनिक विशेषज्ञों का मानना है कि एक कार्यरत अधिकारी द्वारा किसी राजनीतिक दल के खिलाफ इस तरह का प्रचार करना आचरण नियमावली का गंभीर उल्लंघन है, और इसलिए शासन ने बिना देरी किए निलंबन की कार्रवाई की है।

गणतंत्र दिवस के मौके पर एक जिम्मेदार पद पर बैठे अधिकारी द्वारा इस तरह की 'बगावत' से शासन असहज स्थिति में आ गया। अब निलंबन और विभागीय जांच के आदेश के बाद अलंकार अग्निहोत्री की मुश्किलें और बढ़ सकती हैं। जांच रिपोर्ट के आधार पर उनके खिलाफ भविष्य में सेवा समाप्ति या अन्य कठोर दंड की कार्रवाई की जा सकती है।

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