UP News: उत्तर प्रदेश के फतेहपुर में हिंदू संगठनों द्वारा एक मकबरे पर धावा बोल दिया गया। वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ तो लोगों के जहन में बाबरी विध्वंस की याद एक बार फिर ताजा हो गई। क्योंकि घटना कुछ उसी प्रकार घटित हुई। कथित वोट चोरी पर चल रही सियासत ने सांप्रदायिक रंग ले लिया। मंगलवार को यूपी विधानसभा में समाजवादी पार्टी के विधायकों ने जमकर बवाल काटा और सरकार पर दंगाईयों का साथ देने का आरोप लगाया।
अब इस मामले में AIMIM प्रमुख व हैदराबाद सांसद असदुद्दीन ओवैसी की एंट्री हो गई है। उन्होंने यूपी की भाजपा सरकार पर तीखा प्रहार करते हुए कहा कि भाजपा ने देश में नफरत का माहौल बना दिया है। खास तौर पर उत्तर प्रदेश में दंगाइयों को खुली छूट दी गई है। उन्होंने कहा कि मुसमानों से जुड़े ऐतिहासिक स्थल पर कभी भी कोई भी उठ कर अपना दावा कर सकता है।
फतेहपुर में अब्दुल समद मकबरे पर हिंदू संगठनों द्वारा चढ़ाई कर भगवा झंडा फहराने की तुलना ओवैसी ने 1992 में हुए बाबरी मस्जिद विध्वंस से की। हैदराबाद सांसद ने कहा कि यह सब पुलिस की निगरानी में हो रहा है। पुलिस मूक दर्शक बनी सब कुछ देख रही है। उन्होंने कहा सरकार ने आंखे मूद ली है। पुलिस के सामने मकबरे पर कब्रों को तोड़ा जा रहा है। मकबरे के अंदर घुस रहे हैं। यही अगर मुस्लिम होते तो क्या होता? मजहब को राजनीतिक विचारधारा को देख कर कानून का इस्तेमाल किया जा रहा है।
औवेसी ने आगे कहा कि ये मुसलमानों के खिलाफ नफरत और उन पर अत्याचार की कोशिश का एक उदाहरण है। ऐसा लगा जैसे 1992 (बाबरी मस्जिद विंध्वस) लौट रहा हो। यह कानून का उल्लंघन है। आपकी आस्था किसमें है। आपकी आस्था न कानून में है और न ही प्रदेश में शांति बनाए रखने की है। आप को तो सिर्फ एक तरीका आता है। चाहे असम हो या यूपी हो हर जगह मुसमानों को टारगेट किया जाए। बुलडोजर चलाया जाए या फिर मस्जिदों, दरगाहों पर हमला किया जाए और कह दिया जाए की यह विवादित है।
गौरतलब है कि फतेहपुर के डाक बंगला चौराहे के पास स्थित अब्दुल समद मकबरे पर सोमवार को बजरंग दल और हिंदू महासभा सहित अन्य हिंदू संगठनों के करीब 2000 कार्यकर्ताओं ने चढ़ाई कर दी। पुलिस के सामने उग्र भीड़ ने वहां की कब्रें तोड़ी, उस पर भगवा झंडा लहराया। साथ ही मकबरे पर चढ़ कर एक युवक भगवा झंडा लगा दिया।
घटना के बाद से आस-पास के इलाके में तनाव पूर्ण माहौल है। बड़ी संख्या में पुलिस फोर्स तैनात है। वहीं हिंदू संगठनों का कहना है कि एक हजार साल पहले यहां मंदिर था। वहीं मुस्लिम पक्ष के लोगों को कहना है कि जब से हम लोग देख रहे हैं यहां मकबरा ही है। यह हमारी आस्था का प्रतीक है।