मेरठ में अवैध निर्माण (सोर्स- फोटो नवभारत)
मेरठ

Meerut: अवैध निर्माणों पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, मेरठ में 44 सील भवनों को ध्वस्त करने के निर्देश

Meerut News: मेरठ में अवैध निर्माणों और आवासीय भूखंडों के व्यावसायिक उपयोग पर सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर कार्रवाई तेज हो गई है। एमडीए के सर्वे में जोन-ए में 16,726 अवैध निर्माण चिह्नित किए गए हैं।

कपिल सोनी, स्निग्धा श्रीवास्तव

Meerut Illegal Construction Action: सुप्रीम कोर्ट के सख्त आदेश के बाद मेरठ विकास प्राधिकरण और आवास विकास परिषद ने मेरठ में बड़े पैमाने पर अवैध निर्माणों और आवासीय जमीनों पर चल रहे व्यावसायिक उपयोग के खिलाफ कार्रवाई तेज कर दी है। एमडीए द्वारा कराए गए सर्वे के आधार पर जोन-ए (कोर सिटी क्षेत्र) में 16,726 अवैध निर्माणों और नियमों के विरुद्ध चल रहे उपयोगों को चिह्नित किया गया है, जिन्हें सील करने व ढहाने के निर्देश दिए गए हैं।

बता दें कि पूर्व के आदेशों के तहत सेंट्रल मार्केट और शास्त्री नगर क्षेत्र में आवासीय भूखंडों पर व्यावसायिक गतिविधियां चलाने वाले कई परिसरों व बैंक्वेट हॉलों पर बुलडोजर की कार्रवाई की गई। सुप्रीम कोर्ट ने उल्देपुर क्षेत्र में बनी अवैध कॉलोनियों और अनधिकृत निर्माणों को भी हर हाल में ढहाने के कड़े निर्देश दिए हैं।

अगली सुनवाई की समय-सीमा की बात करें तो अदालत ने इस मामले में आगामी 9 दिसंबर तक की कार्रवाई की स्टेटस रिपोर्ट सुप्रीम कोर्ट के समक्ष पेश करने को कहा है। शेष जोनों की रिपोर्ट भी निर्धारित चरणों में पेश की जानी है। वहीं बाकी तीन जोन बी, सी और डी की रिपोर्ट दाखिल नहीं किए जाने पर अदालत ने मेडा सचिव अर्पित गुप्ता पर नाराजगी जताई।

सभी 44 भवनों को करें सील

कोर्ट को बताया गया कि 44 आवासीय भवनों में व्यावसायिक निर्माण के मामले में छह भवन ऐसे थे, जो बिना नक्शे के बनाए गए थे। इन्हें पूरी तरह ध्वस्त किया जा चुका है। वहीं 38 संपत्तियों के पास आवासीय स्वीकृति है, लेकिन इनमें अतिरिक्त निर्माण कर व्यावसायिक उपयोग किया जा रहा है। इन 44 संपत्तियों में से 24 के अवैध निर्माण को आवंटियों की ओर से पूरी तरह ध्वस्त किया जा चुका है, जबकि बाकी 20 में ध्वस्तीकरण की प्रक्रिया चल रही है। कोर्ट ने सभी 44 सील भवनों को ध्वस्त कर नए सिरे रिपोर्ट पेश करने को कहा।

201 संपत्ति के सेटबैक में अवैध निर्माण

परिषद की ओर से दाखिल की गई रिपोर्ट में बताया गया कि 201 संपत्तियां ऐसी पाई गई थीं, जिनमें सेटबैक में अवैध निर्माण था। इनमें से 63 संपत्तियों के अवैध निर्माण पूरी तरह हटा दिए गए हैं जबकि शेष 138 पर कार्रवाई की जा रही है। खंडपीठ ने प्रमुख सचिव आवास एवं शहर नियोजन, चेयरमैन आवास एवं विकास परिषद तथा प्रमुख सचिव नगर विकास पी. गुरु प्रसाद को स्पष्ट निर्देश दिए और कहा कि वे कार्रवाई की निगरानी करें। मामले में 9 दिसंबर की तारीख तय करते हुए नए सिरे से अनुपालन आख्या दाखिल करने के आदेश दिए गए।

सुरक्षा का खतरा है तो शहर छोड़ दें

आरटीआई कार्यकर्ता लोकेश खुराना के अधिवक्ता तुषार जैन ने कोर्ट को बताया कि याचिकाकर्ता को लगातार धमकियां मिल रही हैं और उसे जान का खतरा है। इस पर कोर्ट ने उन्हें पुलिस स्टेशन जाने को कहा। कोर्ट ने यह भी कहा कि यदि सुरक्षा का खतरा है तो वे शहर छोड़ दें। इस पर छोटे व्यवसाय की दलील दी गई। इसके बाद कोर्ट ने प्रदेश सरकार को लोकेश खुराना की सुरक्षा सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।

14 जुलाई के आदेश का करें पालन

याचिकाकर्ता के अधिवक्ता की ओर से बताया गया कि सील किए गए अवैध निर्माणों पर पूरी तरह से कार्रवाई नहीं हुई है। इस पर खंडपीठ ने स्पष्ट कहा कि 44 सील भवनों को ध्वस्त किया जाए। साथ ही पूर्व में 14 जुलाई को दिए गए आदेश का अनुपालन कराने के निर्देश दिए। ईडब्ल्यूएस और एलआईजी मकानों के संबंध में भी सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि सरकार इनके लिए पुनर्वास की नीति बनाए। इसी बीच व्यापारियों के अधिवक्ता सूरत सिंह की ओर से भी पक्ष रखने की गुहार लगाई गई, जिसे कोर्ट ने सुनने से इनकार कर दिया। सुनवाई के दौरान रविंद्र गुर्जर, एडवोकेट अंजनेय सिंह, एडवोकेट राहुल मलिक, नितेश पंवार आदि भी मौजूद रहे। उप आवास आयुक्त अनिल कुमार सिंह का कहना है कि अदालत के आदेश का अनुपालन कराया जाएगा।

TRAI का बड़ा फैसला! अब सिर्फ कॉल और SMS वाले सस्ते पैक भी होंगे उपलब्ध; ग्राहकों को मिलेगा ज्यादा विकल्प

चार राज्यों में विधान परिषद का चुनाव, निर्वाचन आयोग ने तारीख का किया ऐलान; 23 अक्टूबर को मतदान

अवैध गिरफ्तारी पर एक बार फिर सुप्रीम कोर्ट सख्त, लिखित आधार न बताने वाले अधिकारी के खिलाफ हो विभागीय जांच

मौलिक अधिकारों का उल्लंघन करती है SC-ST एक्ट की धारा 18-A, सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल, CJI करेंगे सुनवाई

वीजा-फ्री एंट्री की सुविधा पर मलेशिया जा रहे यात्री रहे अलर्ट, भारतीय हाई कमीशन ने क्यों चेताया ?