

Agra Sports Shoe Industry: दुनिया में जूते पहनने का ट्रेंड तेजी से बदल रहा है। कभी लेदर शू फुटवियर बाजार की सबसे बड़ी पहचान हुआ करते थे, लेकिन अब आराम, फिटनेस, खेल और बदलती लाइफस्टाइल के साथ स्पोर्ट्स शू की मांग तेजी से बढ़ रही है। इस बदलते बाजार का असर मोहब्बत के शहर आगरा के जूता उद्योग पर भी साफ दिखाई देने लगा है।
एफमेक के पूर्व अध्यक्ष कैप्टन केएस राना ने ‘मीट एट आगरा-2026’ के संदर्भ में बातचीत के दौरान बताया कि मौजूदा समय में वैश्विक फुटवियर बाजार में स्पोर्ट्स शू का चलन लगातार बढ़ रहा है। उनके अनुसार करीब 30 प्रतिशत उपभोक्ता लेदर शू का इस्तेमाल कर रहे हैं, जबकि स्पोर्ट्स शू की हिस्सेदारी करीब 70 प्रतिशत तक पहुंच गई है।
राना के मुताबिक बाजार की इसी बदलती मांग को देखते हुए आगरा के फुटवियर उद्योग ने भी खुद को बदलना शुरू कर दिया है। शहर में अब केवल पारंपरिक लेदर फुटवियर ही नहीं, बल्कि स्पोर्ट्स शू का उत्पादन भी शुरू हो चुका है। उनका दावा है कि आगरा में वर्तमान में प्रतिदिन करीब 15 से 20 हजार जोड़ी स्पोर्ट्स शू तैयार हो रहे हैं।
यह बदलाव आगरा के जूता उद्योग के लिए इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि शहर लंबे समय से लेदर फुटवियर के लिए जाना जाता रहा है। अब बाजार की मांग के अनुरूप उत्पादन में विविधता आने लगी है। नई सामग्री, आधुनिक मशीनरी, डिजाइन और तकनीक के इस्तेमाल से निर्माता स्पोर्ट्स फुटवियर के तेजी से बढ़ते बाजार में अपनी जगह बनाने की कोशिश कर रहे हैं।
कैप्टन केएस राना का कहना है कि आने वाले समय में आगरा में स्पोर्ट्स शू का उत्पादन और बढ़ने की संभावना है। यानी जिस आगरा की पहचान लंबे समय तक लेदर शू के उत्पादन और निर्यात से जुड़ी रही, वहां अब स्पोर्ट्स शू उद्योग भी एक नए कारोबारी अवसर के रूप में उभर रहा है।
फुटवियर उद्योग में यह बदलाव युवाओं के लिए भी नए अवसर पैदा कर सकता है। आधुनिक मशीनरी, ऑटोमेशन, डिजाइन, मटेरियल टेक्नोलॉजी और स्पोर्ट्स फुटवियर की नई जरूरतों के कारण उद्योग को तकनीकी रूप से दक्ष नई पीढ़ी की जरूरत होगी।
इसी बदलाव को ‘मीट एट आगरा-2026’ जैसे आयोजनों से जोड़कर देखा जा रहा है। 3 से 5 अक्टूबर तक सींगना स्थित आगरा ट्रेड सेंटर में होने वाले इस फेयर में दुनिया भर की आधुनिक मशीनरी, कंपोनेंट्स, सामग्री और तकनीक देखने को मिलेगी। ऐसे में आगरा के कारोबारियों के सामने एक तरफ वैश्विक बाजार की बदलती मांग होगी और दूसरी तरफ उस मांग के अनुरूप खुद को तैयार करने की नई तकनीक।
यानी इस बार ‘मीट एट आगरा’ में सवाल सिर्फ यह नहीं होगा कि जूता उद्योग कितना बड़ा है, बल्कि यह भी होगा कि बदलती दुनिया की पसंद के साथ आगरा का जूता उद्योग कितनी तेजी से खुद को बदल रहा है।