मेरठ में बस परिचालकों का हड़ताल सोर्स- नवभारत लाइव
मेरठ

मेरठ में थमी शहर की लाइफलाइन! परिचालकों की हड़ताल से बसों का संचालन बंद, प्राइवेट वाहनों से जाने को मजबूर लोग

Meerut Electric Bus Conductor's Strike: मेरठ में 3 महीने से बकाया वेतन और भुगतान कटौती के विरोध में परिचालकों ने दूसरे दिन भी हड़ताल जारी रखी। बसों के पहिए थमने से शहरवासी काफी परेशान हैं।

कपिल सोनी, अमन मौर्या

Electric Bus Conductors Salary Protest: वेतन नहीं मिलने के विरोध में इलेक्ट्रिक बसों के परिचालकों की हड़ताल दूसरे दिन भी जारी रही। शनिवार को भी शहर की सड़कों पर इलेक्ट्रिक बसें नहीं दौड़ीं। बसों का संचालन ठप रहने से रोजाना इन बसों से सफर करने वाले यात्रियों को परेशानी का सामना करना पड़ा। यात्रियों को दूसरे सार्वजनिक वाहनों का सहारा लेना पड़ा। परिचालक लोहिया नगर स्थित बस डिपो में धरना देकर बैठे रहे। उन्होंने वेतन भुगतान की मांग को लेकर जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ नाराजगी जताई।

परिचालकों का कहना है कि, वे लगातार काम कर रहे हैं, लेकिन समय से वेतन नहीं मिलने के कारण उनके सामने आर्थिक संकट खड़ा हो गया है। कई बार समस्या से अवगत कराने के बावजूद समाधान नहीं हुआ, जिसके बाद परिचालकों ने हड़ताल शुरू कर दी। परिचालकों ने साफ कर दिया है कि, जब तक उनका वेतन नहीं मिलेगा, तब तक वह बसों का संचालन नहीं करेंगे। उनका कहना है कि सिर्फ आश्वासन से काम नहीं चलेगा। वेतन का भुगतान होने के बाद ही वह काम पर लौटेंगे।

शहर की लाइफ लाइन का संचालन ठप

शहर की 'लाइफलाइन' मानी जाने वाली 50 इलेक्ट्रिक सिटी बसों का संचालन शुक्रवार सुबह 6 बजे पूरी तरह से ठप हो गया। वेतन भुगतान में धांधली और 3 महीने से बकाया सैलरी न मिलने से नाराज 200 बस परिचालकों ने हड़ताल का ऐलान करते हुए बसों को डिपो में ही खड़ा कर दिया। वेतन भुगतान में धांधली और पिछले 3 महीने से बकाया सैलरी न मिलने से नाराज लगभग 200 बस परिचालकों ने हड़ताल का ऐलान करते हुए बसों को डिपो में ही खड़ा कर दिया।

चक्का जाम से सुबह-सुबह दफ्तर, स्कूल, कॉलेज और अस्पतालों के लिए निकले हजारों यात्रियों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ा। मेरठ सिटी ट्रांसपोर्ट सर्विसेज लिमिटेड द्वारा शहर में ई-बसों के संचालन के लिए परिचालकों की व्यवस्था का ठेका रायबरेली की एजेंसी एसएस एंटरप्राइजेज को दिया गया है। कंपनी और ठेकेदार के बीच परिचालकों को ₹4.26 पैसे प्रति किलोमीटर की दर से भुगतान करने की बात तय हुई थी।

नाराज कर्मचारियों ने काम रोका

ठेकेदार एसएस एंटरप्राइजेज ने 3 महीने तक वेतन लटकाने के बाद जब भुगतान किया, तो महज ₹3.16 पैसे प्रति किलोमीटर की दर से पैसे खाते में ट्रांसफर किए. कर्मचारियों के मुताबिक, प्रति किलोमीटर ₹1.10 पैसे की सीधी कटौती की गई है। 3 महीने से सैलरी न मिलने और अब उसमें भी कटौती किए जाने से नाराज होकर कर्मचारियों ने सुबह 6:00 बजे से बसों के पहिए रोक दिए।

हड़ताल की खबर मिलते ही विभाग के अधिकारी एआरएम दुष्यंत और बस संचालन प्रभारी सचिन सक्सेना तुरंत मौके पर पहुंचे और उग्र कर्मचारियों को समझाने-बुझाने का प्रयास किया। लेकिन, परिचालकों का गुस्सा शांत नहीं हुआ और उन्होंने स्पष्ट कर दिया कि, जब तक पूरी रकम का भुगतान नहीं होता, एक भी बस डिपो से बाहर नहीं जाएगी।

परिचालकों ने लगाया वादाखिलाफी का आरोप

परिचालक शाखा के मंत्री कविंद्र का कहना है कि हमसे कंपनी ने ₹4.26 पैसे प्रति किलोमीटर की दर से भुगतान का वादा किया था। पहले तो 3 महीने तक हमें एक भी पैसा नहीं दिया गया, जिससे हमारे परिवारों के सामने भुखमरी की नौबत आ गई। जब 3 महीने बाद पैसे दिए भी गए, तो ₹3.16 पैसे प्रति किमी के हिसाब से काटकर भेजे गए। यह सीधे तौर पर कर्मचारियों का शोषण है। जब तक हमें पूरा ₹4.26 प्रति किमी का हिसाब और बकाया 2 महीने की सैलरी नहीं मिल जाती, तब तक सिटी बसों का चक्का जाम रहेगा।

वहीं, बस संचालन प्रभारी सचिन सक्सेना का कहना है कि, आउटसोर्सिंग एजेंसी एसएस एंटरप्राइजेज और परिचालकों के बीच दर और बकाया वेतन भुगतान को लेकर कुछ विवाद हुआ है, जिसके कारण संचालन बाधित चल रहा है। उन्होंने कहा कि, हमने परिचालकों की मांगों को सुना है और ठेका एजेंसी के प्रतिनिधियों से तुरंत संपर्क कर समाधान निकालने के निर्देश दिए हैं।

दूसरे दिन भी बंद से यात्रियों की बढ़ी मुश्किलें

इलेक्ट्रिक बसों का संचालन लगातार दूसरे दिन बंद रहने का सीधा असर यात्रियों पर पड़ा। शहर के विभिन्न रूटों पर सफर करने वाले यात्रियों को बसों के इंतजार में परेशान होना पड़ा। कई यात्रियों ने ऑटो, ई-रिक्शा और अन्य सार्वजनिक वाहनों का सहारा लिया। इससे यात्रियों की जेब पर अतिरिक्त भार पड़ा।

डिपो में धरना, संचालन बहाल कराने की चुनौती

लोहिया नगर डिपो में परिचालकों के धरने के चलते इलेक्ट्रिक बसों का संचालन बहाल नहीं हो सका। अब सबसे बड़ी चुनौती परिचालकों और संबंधित जिम्मेदारों के बीच गतिरोध खत्म कर बसों को दोबारा सड़कों पर उतारने की है। परिचालकों ने भी अपनी मांग पूरी होने तक आंदोलन जारी रखने का संकेत दिया है।

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