Mayawati statement BRICS Summit 2026: बसपा प्रमुख और उत्तर प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री मायावती का राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में चल रहे BRICS समिट 2026 को लेकर बयान सामने आया है। प्रेस कॉन्फ्रेंस में मायावती ने यूक्रेन, ईरान, टैरिफ, जैसे कई अहम मुद्दे पर अपनी बात रखी।
मायावती ने कहा कि देश की राजधानी दिल्ली में हो रहे BRICS समिट के बारे में मैं यह कहना चाहूंगी कि हम यूक्रेन और ईरान के साथ बेहद गंभीर तनाव, टकराव और युद्ध, टैरिफ लगाने और दूसरे गंभीर आर्थिक संकटों और चुनौतीपूर्ण हालात का सामना कर रहे हैं।
18वें BRICS समिट को लेकर मायावती ने कहा कि राजधानी दिल्ली में BRICS देशों द्वारा 140 पैराग्राफ वाले 'नई दिल्ली घोषणापत्र' को सर्वसम्मति से अपनाना आपसी समझ और सद्भावना पर आधारित एक बड़ी कूटनीतिक उपलब्धि है। पश्चिम एशिया में फिलिस्तीन के मुद्दे पर उन्होंने कहा कि 'टू-स्टेट सॉल्यूशन' (दो-देश समाधान) और 1967 की सीमाओं पर आधारित एक स्वतंत्र फिलिस्तीनी देश के लिए एकजुट समर्थन है।
मायावती ने प्रेस कॉन्फ्रेस के दौरान पिछले साल हुए पहलगाम हमले का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि आतंकवाद से हर संभव तरीके से निपटने की प्रतिबद्धता जताते हुए भारत के नजरिए को उचित समर्थन मिला है। यह भी तारीफ के काबिल है।
बसपा प्रमुख मायावती ने भतीजों और पार्टी से निष्कासित कार्यकर्ताओं पर भी बयान दिया। उन्होंने कहा कि हाल ही में पार्टी और आंदोलन के हित में मैंने जो कड़े फैसले लिए हैं, उनसे काफी फायदा हो रहा है, नुकसान नहीं। हालंकि, मैं अपनी पार्टी के सदस्यों और जनता को एक बात के बारे में सावधान करना चाहती हूं।
ऐसा लगता है कि पार्टी से निकाले गए लोग पिछले 12 दिनों से यह अफवाह फैला रहे हैं कि 'बहनजी' गंभीर रूप से बीमार हैं और दावा कर रहे हैं कि इसी वजह से वह बड़े मुद्दों पर भी सीधे ट्वीट के जरिए बात कर रही हैं।
मायावती ने कहा कि कल रात लगभग 10:04 बजे आकाश आनंद ने पार्टी प्रभारी आलोक कुमार को सीधे मेरे आवास पर फोन किया। उन्होंने पूछा कि क्या 'बहनजी' बीमार हैं और उनके स्वास्थ्य के बारे में जानकारी ली। आलोक कुमार ने जवाब दिया, 'नहीं, वह बिल्कुल ठीक हैं और अपने काम में व्यस्त हैं।' लेकिन उन्होंने (आकाश आनंद ने) उनसे कहा कि 'बहनजी' को इस बातचीत के बारे में न बताएं।
मायावती ने कहा कि यह मामला गंभीरता से सोचने लायक है। इस व्यवहार के पीछे की सोच सही भी हो सकती है और गलत भी। क्योंकि वह अभी भी अपनी मर्जी से काम नहीं कर रहे हैं; बल्कि, वह अशोक सिद्धार्थ के विचारों के आधार पर काम कर रहे हैं।