Sanjay Nishad Vrindavan Visit: वृंदावन में पार्किंग के सामने ई-रिक्शा खड़ा करने को लेकर शुरू हुआ विवाद अब राजनीतिक मोड़ ले चुका है। मंगलवार को हुए विवाद के दौरान मारपीट में निषाद समाज के सात लोगों के घायल होने की बात सामने आई है। आरोप है कि विवाद के दौरान सूआ, लाठी-डंडे और ईंट-पत्थरों का इस्तेमाल हुआ। घटना के बाद उत्तर प्रदेश सरकार के कैबिनेट मंत्री और निषाद पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. संजय निषाद बुधवार को मथुरा पहुंचे और अस्पताल में भर्ती घायलों से मुलाकात कर उनका हालचाल जाना।
मथुरा पहुंचने पर राया कट पर निषाद समाज के लोगों ने कैबिनेट मंत्री का जोरदार स्वागत किया। इसके बाद मंत्री घायलों से मिलने अस्पताल पहुंचे। उन्होंने पीड़ितों से घटना की जानकारी ली और अधिकारियों से मामले की जानकारी लेकर निष्पक्ष कार्रवाई सुनिश्चित करने की बात कही।
संजय निषाद ने कहा कि घायल लोगों के इलाज में किसी तरह की कमी नहीं रहनी चाहिए। उन्होंने अधिकारियों से घायलों को बेहतर उपचार उपलब्ध कराने के निर्देश दिए। मंत्री के मुताबिक गंभीर रूप से घायल मरीजों को आवश्यकता के अनुसार क्रिटिकल केयर की सुविधा मिलनी चाहिए। उन्होंने कहा कि अपराधी की कोई जाति नहीं होती और कानून तोड़ने वालों के खिलाफ कानून के अनुसार कार्रवाई होनी चाहिए।
मंत्री ने कहा कि वह पीड़ितों का दर्द बांटने के लिए मथुरा पहुंचे हैं और मामले में मौके पर अधिकारियों को तलब कर न्यायोचित कार्रवाई कराई जाएगी। उन्होंने पुलिस से मामले की निष्पक्ष जांच और दोषियों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की बात कही।
संजय निषाद ने निषाद समाज के सम्मान का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने कहा कि किसी भी समुदाय के साथ अन्याय या अत्याचार नहीं होना चाहिए। इसी दौरान उन्होंने कहा—“निषादराज का झंडा अब नहीं सहेगा डंडा।” उनके इस बयान के बाद मामले ने राजनीतिक रंग और गहरा कर लिया है।
कैबिनेट मंत्री ने विपक्षी दलों पर भी निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस, समाजवादी पार्टी और बहुजन समाज पार्टी के शासन में निषाद समाज के हितों की अनदेखी हुई। उन्होंने कहा कि समाज की समस्याओं के स्थायी समाधान और राजनीतिक प्रतिनिधित्व के उद्देश्य से निषाद पार्टी का गठन किया गया है।
मीडिया से बातचीत के दौरान यूजीसी से जुड़े सवाल पर संजय निषाद ने कहा कि यूजीसी लागू होना चाहिए, क्योंकि देश में प्रत्येक नागरिक के अधिकार समान हैं। वहीं, यूपीआई और अंतरराष्ट्रीय स्तर से जुड़े सवाल पर मंत्री स्पष्ट प्रतिक्रिया देते नजर नहीं आए और बातचीत दूसरे मुद्दों की ओर चली गई।
वृंदावन की घटना को लेकर अब पुलिस कार्रवाई और घायलों के उपचार पर नजर बनी हुई है। मंत्री के दौरे के बाद मामले में प्रशासन पर निष्पक्ष जांच और कानून के मुताबिक कार्रवाई सुनिश्चित करने का दबाव भी बढ़ा है। हालांकि घटना के सभी पहलुओं और विवाद की वास्तविक वजह को लेकर पुलिस की जांच महत्वपूर्ण होगी।