Punganur Cows In Mathura: श्रीकृष्ण की जन्मभूमि मथुरा में श्रीकृष्ण जन्माष्टमी के पावन अवसर पर एक ऐसी दुर्लभ और भावुक कर देने वाली घटना सामने आई है, जिसे गोसेवा और भगवान श्रीकृष्ण के प्रति आस्था से जोड़कर देखा जा रहा है।
जन्माष्टमी के अवसर पर मुख्यमंत्री एवं गोरक्षपीठाधीश्वर पूज्य योगी आदित्यनाथ महाराज द्वारा दान की गई गौमाताओं में शामिल दो पुंगनूर गायों ने अपने बछड़े के साथ एक-दूसरे की संतान को भी प्रेमपूर्वक दुग्धपान कराना शुरू कर दिया। इस दृश्य ने वहां मौजूद लोगों को भावविभोर कर दिया।
बताया गया कि पूज्य योगी आदित्यनाथ महाराज ने 4 सितंबर 2026 को श्रीकृष्ण जन्माष्टमी के विशिष्ट अवसर पर 11 गौवंश दान किए थे। इनमें दो पुंगनूर नस्ल की गौमाता भी शामिल थीं। जन्माष्टमी के अवसर पर पूज्य योगी आदित्यनाथ महाराज ने इन गौमाताओं का विधिवत पूजन किया था।
पूजन के दौरान उन्होंने भगवान श्रीकृष्ण की जन्मभूमि पर राष्ट्र, सनातन संस्कृति और समाज के मंगल की कामना का संकल्प भी लिया।
इसी क्रम में अब इन गौमाताओं से जुड़ी एक असामान्य घटना सामने आई है। बताया गया कि दोनों पुंगनूर गौमाताओं ने एक-दूसरे के बछड़ों को भी अपनी संतान मानते हुए स्नेहपूर्वक दुग्धपान कराना शुरू कर दिया। गौमाताओं के इस व्यवहार को देखने वाले लोग इसे अत्यंत दुर्लभ और भावपूर्ण दृश्य बता रहे हैं।
संस्थान के सचिव कपिल शर्मा ने इस संबंध में जानकारी देते हुए बताया कि सामान्य परिस्थितियों में इस प्रकार का दृश्य देखने को नहीं मिलता। उनके अनुसार, जन्माष्टमी के अवसर पर पूज्य योगी आदित्यनाथ महाराज द्वारा शास्त्रोक्त विधि-विधान से गौमाताओं का पूजन किया गया था। इसके बाद सामने आई यह घटना उनके ठाकुर श्री केशवदेव जी और गौमाता के प्रति भाव एवं श्रद्धा का प्रकटीकरण मात्र प्रतीत होती है।
कपिल शर्मा ने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण का जीवन गौसेवा और गोपालन से गहराई से जुड़ा हुआ है। ऐसे में श्रीकृष्ण जन्मभूमि पर जन्माष्टमी के तुरंत बाद गौमाताओं के बीच इस प्रकार का वात्सल्य भाव देखने को मिलना श्रद्धालुओं के लिए विशेष आध्यात्मिक अनुभूति का विषय है।
घटना की जानकारी सामने आने के बाद गौसेवकों और श्रद्धालुओं में भी इसे लेकर उत्सुकता है। लोग इसे गौमाता के वात्सल्य, आपसी प्रेम और श्रीकृष्ण की गोसेवा की परंपरा से जोड़कर देख रहे हैं। संस्थान से जुड़े लोगों का कहना है कि ऐसे दृश्य सामान्यतः अत्यंत दुर्लभ होते हैं और गोपाल की जन्मभूमि पर इनका दिखाई देना अपने आप में विशेष भावनात्मक और आध्यात्मिक अनुभव है।
श्रीकृष्ण जन्माष्टमी के पावन पर्व पर हुई इस घटना ने एक बार फिर भगवान श्रीकृष्ण और गौमाता के बीच सनातन परंपरा में स्थापित गहरे संबंध की स्मृति को जीवंत कर दिया है। जन्मभूमि पर गौमाताओं का यह वात्सल्य भाव श्रद्धालुओं के बीच चर्चा का विषय बना हुआ है।