मूर्तिकार दिन-रात मेहनत कर मिट्टी को गणपति के दिव्य स्वरूप में ढालने में जुटे हैं। किसी प्रतिमा में विघ्नहर्ता आशीर्वाद की मुद्रा में विराजमान हैं, तो कहीं बाल गणेश का मोहक रूप मन को छू रहा है। कहीं गणपति कमल पर विराजमान हैं तो कहीं मूषक वाहन के साथ उनका मनोहारी स्वरूप दिखाई दे रहा है। मुकुट, आभूषण, वस्त्र और अलौकिक श्रृंगार से सजी प्रतिमाएं ऐसी प्रतीत होती हैं, मानो मिट्टी में स्वयं मंगलमूर्ति की छवि उतर आई हो।