अहिरपाड़ा में सजी भव्य जनकपुरी बनी मिथिलाधाम
सखी भाव में ब्रज की महिलाओं ने किया बारातियों का स्वागत
दिव्य आतिशबाजी, मंगल गीतों और शंख-मृदंग की ध्वनि से भक्तिमय हुआ वातावरण
Mathura Ram-Sita Wedding Ceremony: धर्मनगरी वृंदावन इन दिनों भगवान श्रीराम की भक्ति के रंग में पूरी तरह सराबोर नजर आ रही है। मंगलवार देर रात वृंदावन के अहिरपाड़ा क्षेत्र में सजी भव्य जनकपुरी में जब प्रभु श्रीराम की बारात पहुंची, तो पूरा इलाका ‘जय श्रीराम’ के जयकारों से गुंजायमान हो उठा। रंग-बिरंगी रोशनी से जगमगाती जनकपुरी, आसमान में चमकती आतिशबाजी और शंख-मृदंग की मधुर ध्वनि के बीच माता सीता और भगवान श्रीराम के विवाह का दिव्य आयोजन संपन्न हुआ। इस अलौकिक दृश्य को देखकर श्रद्धालु भाव-विभोर हो उठे।
मंगलवार की देर रात्रि अहिरपाड़ा क्षेत्र का नजारा ऐसा था, मानो वृंदावन में मिथिलाधाम उतर आया हो। भव्य जनकपुरी महल को आकर्षक विद्युत सजावट और रंग-बिरंगी रोशनी से सजाया गया था। चारों ओर उत्सव जैसा माहौल था और भगवान श्रीराम की बारात के स्वागत के लिए श्रद्धालुओं में विशेष उत्साह दिखाई दिया।
जैसे ही प्रभु श्रीराम की बारात ने जनकपुरी में प्रवेश किया, ब्रजवासियों ने पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ बारातियों का भव्य स्वागत किया। ब्रज की महिलाओं ने सखी भाव धारण कर बारातियों के स्वागत की रस्में निभाईं। इस दौरान बारातियों को हल्दी लगाई गई और उनके चेहरों पर हल्दी की छाप अंकित की गई। महिलाओं ने पारंपरिक मंगल गीत गाकर विवाह उत्सव की खुशियों को और बढ़ा दिया।
जनकपुरी में आयोजित विवाह समारोह के दौरान ब्रज की अनूठी परंपरा और सखी भाव की झलक देखने को मिली। महिलाओं ने प्रभु श्रीराम के समक्ष पहुंचकर मंगल गीत गाए और हंसी-ठिठोली के बीच विवाह की रस्मों को आगे बढ़ाया। धार्मिक मान्यताओं और ब्रज की परंपराओं के अनुरूप प्रभु श्रीराम ने प्रसन्न होकर महिलाओं को बधाई स्वरूप मुद्राएं भेंट कीं। इस दौरान श्रद्धालुओं का उत्साह देखते ही बन रहा था।
इसके बाद सिर पर फूलों की सुंदर चादर धारण कर माता सीता, मांडवी और चारों बहनों ने मंडप की ओर प्रस्थान किया। मंडप स्थल पर उपस्थित श्रद्धालुओं ने करतल ध्वनि के साथ उनका स्वागत किया। धार्मिक अनुष्ठानों के बीच विवाह की रस्में संपन्न कराई गईं। आयोजन में शिव धनुष भंग की लीला का मंचन हुआ। इसके बाद प्रभु श्रीराम ने माता सीता के गले में वरमाला पहनाई। वरमाला होते ही पूरा जनकपुरी परिसर जय श्रीराम के जयकारों से गूंज उठा।
विवाह उत्सव के दौरान स्थानीय लोगों, साधु-संतों और पंडा-पुजारियों ने चारों भाइयों की भव्य आरती उतारी। शंख, ढोल और मृदंग की ध्वनि के बीच पूरा वातावरण भक्तिमय हो गया। रंग-बिरंगी आतिशबाजी ने जनकपुरी की छटा को और भव्य बना दिया। ऐसा प्रतीत हो रहा था, मानो देवता भी इस पावन विवाह के साक्षी बनकर पुष्पवर्षा कर रहे हों।
विवाह की रस्में पूरी होने के बाद बारातियों और श्रद्धालुओं के बीच प्रसाद वितरित किया गया। देर रात तक जनकपुरी में उत्सव का माहौल बना रहा। भगवान श्रीराम और माता सीता के विवाह के इस मनोहारी दृश्य ने श्रद्धालुओं को भावविभोर कर दिया। वृंदावन की धार्मिक परंपरा, ब्रज की संस्कृति और रामभक्ति के संगम ने जनकपुरी महोत्सव को यादगार बना दिया।