Chhata Sugar Mill Protest Mathura: छाता शुगर मिल को शुरू कराने और किसानों की मांगों को लेकर करीब 45 दिनों से चल रहे आंदोलन में सोमवार को युवाओं की मजबूत मौजूदगी ने आंदोलन में नया जोश भर दिया। पुलिस और पीएसी की बड़ी संख्या में तैनाती के बीच धरना स्थल पर पहुंचे युवाओं ने किसानों के समर्थन में जमकर आवाज बुलंद की। पुलिस द्वारा धरना स्थल से टेंट और तख्त हटाए जाने की कार्रवाई के बावजूद युवाओं का उत्साह कम नहीं हुआ।
युवाओं का कहना है कि छाता क्षेत्र के किसानों और उनके परिवारों का भविष्य चीनी मिल से जुड़ा हुआ है। ऐसे में मिल शुरू कराने की मांग को लेकर चल रहे आंदोलन से युवा वर्ग खुद को अलग नहीं रख सकता। युवाओं ने कहा कि जब तक चीनी मिल शुरू कराने को लेकर ठोस पहल नहीं होती, तब तक वे किसानों के साथ खड़े रहेंगे।
सोमवार को पुलिस और पीएसी के धरना स्थल पर पहुंचते ही आंदोलनकारी किसानों और युवाओं की भीड़ बढ़ने लगी। टेंट और तख्त हटाने की कार्रवाई शुरू हुई तो युवाओं ने इसका विरोध किया। धरना स्थल पर युवाओं की हुंकार और नारेबाजी से माहौल गरमा गया।
युवाओं का कहना था कि आंदोलन शांतिपूर्ण तरीके से चल रहा था और किसानों की मांगों को लेकर प्रशासन को बातचीत के जरिए समाधान निकालना चाहिए। पुलिस कार्रवाई के बीच भी बड़ी संख्या में युवा मौके पर डटे रहे।
धरना स्थल से कार्रवाई शुरू होने के बाद आंदोलनकारी किसान और युवा आगरा-दिल्ली हाईवे तक पहुंच गए। हाईवे पर जाम लगाए जाने से यातायात प्रभावित हुआ और वाहनों की लंबी कतारें लग गईं। पुलिस ने मौके पर पहुंचकर प्रदर्शनकारियों को समझाने का प्रयास किया।
इस दौरान कुछ प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिए जाने की जानकारी सामने आई। युवाओं ने हिरासत में लिए गए लोगों को छोड़े जाने की मांग को लेकर भी विरोध जताया। बाद में किसानों और प्रदर्शनकारियों के दबाव के बीच हिरासत में लिए गए लोगों को छोड़े जाने की बात सामने आई।
छाता शुगर मिल का मुद्दा युवाओं के लिए सिर्फ किसानों की मांग नहीं, बल्कि क्षेत्र के रोजगार और भविष्य से भी जुड़ा सवाल बन गया है। युवाओं का कहना है कि चीनी मिल के संचालन से किसानों के साथ-साथ ट्रांसपोर्ट, मजदूरी, व्यापार और अन्य स्थानीय गतिविधियों को भी फायदा मिल सकता है।
इसी वजह से युवा आंदोलन में लगातार सक्रिय दिखाई दे रहे हैं। उनका कहना है कि यदि क्षेत्र में रोजगार के अवसर बढ़ते हैं तो स्थानीय युवाओं को अपने गांव और क्षेत्र में ही काम के अवसर मिल सकते हैं।
छाता शुगर मिल को लेकर एथेनॉल प्लांट के प्रस्ताव के बाद आंदोलन का मुद्दा और व्यापक हुआ है। किसान और आंदोलन से जुड़े लोग चीनी मिल शुरू कराने की मांग के साथ एथेनॉल प्लांट के प्रस्ताव को लेकर भी अपनी आपत्तियां जता रहे हैं।और विरोध कर रहे है
युवा भी इस मुद्दे पर किसानों के साथ दिखाई दे रहे हैं। उनका कहना है कि पहले चीनी मिल को सुचारु रूप से शुरू किया जाना चाहिए और किसानों की समस्याओं का समाधान होना चाहिए।
पुलिस कार्रवाई के बाद धरना स्थल का स्वरूप बदल गया, लेकिन युवाओं का उत्साह कम नहीं हुआ। युवाओं का कहना है कि टेंट और तख्त हटाए जाने से उनकी आवाज नहीं हट सकती। वे किसानों की मांगों के समर्थन में आगे भी आंदोलन में अपनी भूमिका निभाते रहेंगे।
छाता शुगर मिल आंदोलन में महिलाओं के साथ युवाओं की सक्रिय भागीदारी ने इसे एक व्यापक सामाजिक आंदोलन का रूप दे दिया है। अब नजर इस बात पर है कि प्रशासन और किसानों के बीच बातचीत से इस आंदोलन का समाधान निकलता है या आने वाले दिनों में युवा और किसान फिर बड़ी संख्या में आंदोलन स्थल पर जुटते हैं।