Mathura Chhata Sugar Mill: मथुरा छाता क्षेत्र की लंबे समय से बंद पड़ी शुगर मिल को दोबारा शुरू कराने की कवायद अब तेज होती दिखाई दे रही है। शनिवार को मथुरा कलेक्ट्रेट सभागार में आयोजित प्रेस वार्ता में प्रदेश सरकार के कैबिनेट मंत्री चौधरी लक्ष्मीनारायण ने कहा कि छाता शुगर मिल को जल्द ही दोबारा चालू कराया जाएगा। उन्होंने मिल के संचालन की मांग को लेकर धरना दे रहे लोगों से आंदोलन समाप्त करने की अपील भी की।
कैबिनेट मंत्री ने कहा कि सरकार की मंशा केवल पुरानी शुगर मिल को दोबारा शुरू करने की नहीं है, बल्कि इसे आधुनिक स्वरूप में विकसित किया जाएगा। मिल के साथ एथेनॉल प्लांट भी स्थापित कर संचालित किया जाएगा। इससे चीनी उत्पादन के साथ एथेनॉल उत्पादन को बढ़ावा मिलेगा और परियोजना की आर्थिक व्यवहार्यता को मजबूत करने में मदद मिलेगी।
चौधरी लक्ष्मीनारायण ने बताया कि प्रस्तावित एथेनॉल प्लांट की खासियत यह होगी कि यह केवल गन्ने पर निर्भर नहीं रहेगा। गन्ने की उपलब्धता कम होने पर मक्का और चावल जैसे कृषि उत्पादों से भी एथेनॉल का उत्पादन किया जा सकेगा।
कैबिनेट मंत्री चौधरी लक्ष्मीनारायण के अनुसार, इससे प्लांट को सालभर संचालित रखने में मदद मिलेगी। साथ ही किसानों को अपनी अलग-अलग फसलों के लिए अतिरिक्त बाजार भी उपलब्ध होगा। गन्ने के अलावा मक्का और चावल की खपत होने से क्षेत्र के किसानों को अपनी उपज बेचने के लिए नए विकल्प मिलने की उम्मीद है।
कैबिनेट मंत्री ने दावा किया कि छाता में तैयार होने वाली परियोजना अपने स्वरूप में विशेष होगी। इसमें शुगर मिल और एथेनॉल प्लांट का एकीकृत संचालन होगा। उन्होंने इसे प्रदेश का पहला ऐसा संयंत्र बताया, जहां चीनी मिल के साथ एथेनॉल उत्पादन की व्यवस्था होगी और कच्चे माल के तौर पर गन्ने के अलावा मक्का और चावल का भी इस्तेमाल किया जा सकेगा।
उन्होंने कहा कि परियोजना के शुरू होने से छाता क्षेत्र में औद्योगिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा। इसके साथ ही प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से रोजगार के नए अवसर पैदा होने की संभावना है।
छाता शुगर मिल को चालू कराने की मांग को लेकर धरना दे रहे लोगों से मंत्री ने आंदोलन समाप्त करने की अपील की। उन्होंने कहा कि सरकार मिल को शुरू कराने के लिए गंभीरता से काम कर रही है और जल्द ही सकारात्मक परिणाम सामने आने की उम्मीद है।
मंत्री ने कहा कि सरकार की प्राथमिकता क्षेत्र के किसानों के हितों की रक्षा करना है। बंद पड़ी औद्योगिक इकाई को दोबारा सक्रिय करने के साथ ही एथेनॉल प्लांट की योजना को क्षेत्र के आर्थिक विकास की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया।
मिल के दोबारा शुरू होने से छाता और आसपास के क्षेत्र के गन्ना किसानों को सीधा लाभ मिलने की उम्मीद है। स्थानीय स्तर पर शुगर मिल उपलब्ध होने से किसानों को गन्ने की बिक्री के लिए लंबी दूरी तय नहीं करनी पड़ेगी। वहीं, एथेनॉल प्लांट के संचालन से गन्ने की खपत का अतिरिक्त विकल्प भी तैयार होगा।
मक्का और चावल से एथेनॉल उत्पादन की व्यवस्था होने से इन फसलों के किसानों को भी नया बाजार मिल सकता है। इससे क्षेत्र में कृषि आधारित उद्योगों को बढ़ावा मिलने की संभावना है।
कैबिनेट मंत्री के बयान के बाद छाता शुगर मिल के पुनः संचालन को लेकर क्षेत्रीय किसानों और लोगों में उम्मीद जगी है। अब लोगों की नजर इस बात पर है कि मिल को धरातल पर कब तक शुरू मंत्री, गन्ना एवं चीनी मिल उद्योग इस का जवाब कब देंगे l