UP Cabinet Decisions 2026: मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में मंगलवार को कैबिनेट बैठक में उत्तर प्रदेश खिलौना विनिर्माण प्रोत्साहन नीति-2025 को मंजूरी दे दी गई। बैठक में 23 प्रस्तावों को मंजूरी दी गयी। इस नीति का उद्देश्य उत्तर प्रदेश को खिलौना विनिर्माण का प्रमुख केंद्र बनाना, नए उद्योगों को प्रोत्साहित करना और ट्वॉय क्लस्टर्स में रोजगार के अवसर बढ़ाना है। नीति के माध्यम से प्रदेश में खिलौना निर्माण, विपणन और तकनीकी उन्नयन को बढ़ावा दिया जाएगा।
वित्त मंत्री सुरेश कुमार खन्ना ने बताया कि उत्तर प्रदेश विशेष रूप से खिलौना विनिर्माण के क्षेत्र में महत्वपूर्ण स्थान रखता है। राज्य भारतीय पर्व-त्योहारों से संबंधित वस्तुओं (HS 9505) के निर्यात में लगभग 50 प्रतिशत योगदान करता है। वाराणसी, झांसी और चित्रकूट अपने जीआई टैग प्राप्त लैकवेयर तथा हस्तनिर्मित लकड़ी के खिलौनों के लिए प्रसिद्ध हैं। यह क्षेत्र कारीगरों, महिलाओं और ग्रामीण समुदायों के लिए रोजगार का महत्वपूर्ण माध्यम है। खिलौना विनिर्माण एवं विपणन को विकास के प्रमुख क्षेत्र के रूप में बढ़ावा देकर कुशल, अर्धकुशल और अकुशल मानव संसाधन का बेहतर उपयोग किया जा सकेगा। इससे ट्वॉय क्लस्टरों में रोजगार और कौशल विकास के अवसर बढ़ेंगे।
उत्तर प्रदेश के मथुरा जिले की छाता तहसील में 200 करोड़ रूपये की लागत से एथेनॉल बनाने का संयंत्र लगाया जाएगा. प्रदेश में खिलौनों के निर्माण को प्रोत्साहन देने के लिए नीति लाई गयी है। मकान-दुकान किराये पर लेने को आसान बनाने के लिए स्टांप शुल्क को घटा दिया गया है।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में मंगलवार को हुयी मंत्रिपरिषद की बैठक में 23 प्रस्तावों को मंजूरी दी गयी। इनमें छाता में एथोनॉल प्लांट की स्थापना, अयोध्या के मिल्कीपुर में नेशनल सिक्योरिटी गार्ड्स (एनएसजी) का क्षेत्रीय केंद्र बनाया जाना, अलीगढ़ में नए विश्वविद्यालय की स्थापना सहित वाहनों के लिए ऑटोमेटिक टेस्टिंग सेंटर बनाने के लिए नियमों में संशोधन शामिल हैं।
मंत्रिपरिषद के फैसलों की जानकारी देते हुए गन्ना मंत्री चौधरी लक्ष्मी नारायण ने बताया कि मथुरा जिले की छाता तहसील में चीनी मिल 19 साल पहले बंद हो गयी थी जिसे फिर से शुरू करने के प्रस्ताव को मंजूरी दी गयी है। उन्होंने बताया कि इस मिल में गन्ने व धान से एथेनॉल बनाया जाएगा जो कि साल में 11 महीने चलेगा। साल भर में इस मिल से 3.96 करोड़ लीटर एथेनॉल का उत्पादन होगा।
गन्ने की उपलब्धता बढ़ने पर यहां चीनी का उत्पादन भी शुरू किया जाएगा। चीनी मिल को सुचारु रूप से चलाने के लिए सालाना 50 लाख टन गन्ना चाहिए जबकि उपलब्धता नहीं है जिसके चलते यहां एथेनॉल प्लांट लगेगा। इस प्लांट पर 200 करोड़ रूपये खर्च होंगे व चीनी मिल में मौजूद 96 एकड़ जमीन पर गोदाम व कॉम्प्लेक्स बनाया जाएगा।
मंत्रिपरिषद में परिवहन विभाग से संबंधित प्रस्तावों की मंजूरी के बारे में जानकारी देते हुए मंत्री दयाशंकर सिंह ने बताया कि प्रदेश के सिद्धार्थनगर जिले के शोहरतगढ़ व बढ़नी में और हरदोई के सवायजपुर में बस स्टैंड बनाए जाएंगे जिसके लिए राजस्व विभाग जमीन देगा. इसके अलावा ऑटोमेटिक टेस्टिंग सेंटर (एटीएस) बनाने के नियमों में संशोधन को मंत्रिपिरषद ने मंजूरी दे दी है. अभी एटीएस के लिए कम से कम 2.5 एकड़ जमीन की बाध्यता है जिसके चलते इकी स्थापना नहीं हो पा रही थी. प्रदेश में 82 एटीएस के लिए स्वीकृति पत्र जारी किए गए थे पर केवल 42 पर ही काम शुरू हो सका है. संशोधित नियमों के मुताबिक अब सिंगल लाइन एटीएस के लिए 1500 व दो लाइन के लिए 3000 वर्गमीटर जमीन की जरूरत होगी. साथ ही एटीएस खोलने के लिए आवेदन साल भर स्वीकार किए जाएंगे व एक जिले में तीन केंद्र तक खोले जा सकेंगे.
नीति के तहत खिलौना विनिर्माण इकाइयों को प्रोत्साहन आधारित व्यवस्था उपलब्ध कराई जाएगी। मौजूदा उद्योगों के विस्तार, विविधीकरण और तकनीकी उन्नयन के लिए भूमि एवं अवस्थापना सुविधाएं उपलब्ध कराने पर जोर रहेगा। नए उद्यमों की स्थापना में सहायता देने के साथ एमएसएमई और बड़े उद्योगों को भी समर्थन दिया जाएगा। पूर्वी उत्तर प्रदेश, बुंदेलखंड और मध्यांचल क्षेत्रों में खिलौना उद्योग स्थापित करने के लिए विशेष प्रोत्साहन दिए जाएंगे। इससे इन क्षेत्रों में औद्योगिक गतिविधियों को बढ़ावा देने और स्थानीय स्तर पर रोजगार सृजित करने में मदद मिलेगी।
उत्तर प्रदेश खिलौना विनिर्माण प्रोत्साहन नीति-2025 के अंतर्गत एमएसएमई वर्गीकरण के अनुसार सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम श्रेणी की इकाइयों के साथ वृहद और उससे उच्च श्रेणी की खिलौना विनिर्माण इकाइयों तथा खिलौना क्लस्टर उद्यमों को प्रोत्साहन दिया जाएगा। एमएसएमई श्रेणी की पात्र इकाइयों को उत्तर प्रदेश एमएसएमई प्रोत्साहन नीति-2022 और उसके निष्प्रभावी होने की स्थिति में लागू उत्तरवर्ती नीति के तहत निर्धारित प्रोत्साहन मिलेंगे। वहीं, बड़े और उससे उच्च श्रेणी के तहत स्थापित नई इकाइयों तथा विस्तार एवं विविधीकरण करने वाली इकाइयों को प्रस्तावित नीति के प्रावधानों के अनुसार प्रोत्साहन दिए जाएंगे। इनका क्रियान्वयन इन्वेस्ट यूपी के माध्यम से किया जाएगा।
नीति के तहत पात्र खिलौना विनिर्माण इकाइयों को निर्धारित प्रोत्साहन वाणिज्यिक उत्पादन शुरू होने के बाद प्रदान किए जाएंगे। प्रस्ताव में फ्रंट एंड सब्सिडी के प्रावधान भी शामिल हैं। इससे प्रदेश में खिलौना उद्योग की स्थापना और विस्तार को प्रोत्साहन मिलने की उम्मीद है। नीति का क्रियान्वयन उत्तर प्रदेश सरकार के सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम विभाग (एमएसएमई) द्वारा किया जाएगा। बड़े और उससे उच्च श्रेणी के उद्योगों से संबंधित प्रोत्साहनों का क्रियान्वयन इन्वेस्ट यूपी के माध्यम से होगा।
उत्तर प्रदेश खिलौना विनिर्माण प्रोत्साहन नीति-2025 प्रख्यापन की तिथि से पांच वर्ष की अवधि तक अथवा सरकार द्वारा नई नीति के प्रख्यापन तक लागू रहेगी। इस नीति के अंतर्गत प्रोत्साहन प्राप्त करने वाली परियोजनाएं राज्य सरकार की किसी अन्य नीति के तहत प्रोत्साहनों की पात्र नहीं होंगी। हालांकि, भारत सरकार की योजनाओं एवं नीतियों के तहत उपलब्ध प्रोत्साहन इसके अतिरिक्त प्राप्त किए जा सकेंगे।
- प्रदेश को खिलौना विनिर्माण का प्रमुख केंद्र बनाने में मदद।
- पूर्वी उत्तर प्रदेश, बुंदेलखंड और मध्यांचल में उद्योग स्थापना को प्रोत्साहन।
- खिलौना क्लस्टरों में अतिरिक्त रोजगार के अवसर।
- कारीगरों, महिलाओं और ग्रामीण समुदायों को आर्थिक अवसर।
- एमएसएमई एवं बड़े उद्योगों के विस्तार और तकनीकी उन्नयन को समर्थन।
- खिलौना निर्माण एवं विपणन के क्षेत्र में कौशल विकास को बढ़ावा।
कैबिनेट बैठक में लखनऊ स्थित मेसर्स एपीआईएल की हाईटेक टाउनशिप परियोजना को पूरा किए जाने के प्रस्ताव को मंजूरी दी गई। इसके तहत हाईटेक टाउनशिप नीति के अंतर्गत दिए गए लाइसेंस के तहत स्वीकृत परियोजना को लखनऊ विकास प्राधिकरण (एलडीए) टेकओवर करेगा। इसके बाद परियोजना को पूर्ण करने का प्रस्ताव राष्ट्रीय कंपनी विधि अधिकरण (एनसीएलटी) के समक्ष प्रस्तुत किया जाएगा।
प्रारंभिक अनुमान के अनुसार परियोजना की अधिकतम संभावित देनदारी करीब 2,912 करोड़ रुपये है। हालांकि, वास्तविक देनदारी आईआरपी (इंसॉल्वेंसी रिजॉल्यूशन प्रोफेशनल) प्रक्रिया के माध्यम से निर्धारित होगी, जिसके भुगतान के लिए आवश्यक धनराशि एलडीए को सीड कैपिटल के रूप में उपलब्ध कराई जाएगी।
विशेष सचिव आवास राजेश कुमार राय ने बताया कि परियोजना को सरकारी अभिकरण के माध्यम से पूरा किए जाने से करीब 5,000 होमबायर्स की समस्या का समाधान संभव हो सकेगा। रुकी हुई परियोजना में दोबारा विकास कार्य शुरू कराए जा सकेंगे। हाईटेक टाउनशिप की शेष अवस्थापना सुविधाओं और उपयोगिताओं का विकास भी कराया जा सकेगा। इससे परियोजना को पूर्ण कर सुनियोजित विकास सुनिश्चित करने में मदद मिलेगी।
प्रस्ताव के तहत बंधक भूमि और ग्राम समाज की भूमि को किसी तीसरे पक्ष के पक्ष में विनियमित किए जाने के स्थान पर लखनऊ विकास प्राधिकरण के पक्ष में विनियमित किया जाएगा। इससे शासकीय भूमि की रक्षा होगी। साथ ही, भविष्य में शासकीय विभागों की देनदारियों की प्राप्ति की संभावना भी बेहतर हो सकेगी।
किसी शासकीय अभिकरण के माध्यम से परियोजना को विकसित किए जाने से होमबायर्स के बीच विश्वास पैदा होगा। परियोजना पूरी होने से रियल एस्टेट क्षेत्र और निर्माण गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा। इससे रोजगार सृजन में वृद्धि होने की भी उम्मीद है।