Highlights:
नागपुर से गिरफ्तारी के बाद लखनऊ लाई गई श्रद्धा दुबे
सात घंटे की पूछताछ के बाद कोर्ट में पेशी
कोर्ट के आदेश पर तीनों आरोपी जेल भेजे गए
जेल जाते समय श्रद्धा दुबे ने मीडिया की ओर जोड़ लिए हाथ
शिवा शर्मा मौत मामले में जांच जारी
Shiva Sharma Death Case: श्रद्धा दुबे, उसकी बहन रश्मि और ड्राइवर दानिश को लखनऊ की एक कोर्ट ने 10 दिन की न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया है। नागपुर के एक अपार्टमेंट से गिरफ्तारी के बाद लखनऊ लाए गए तीनों आरोपियों से गुरुवार हजरतगंज थाने में करीब सात घंटे तक पूछताछ हुई। इसके बाद सिविल अस्पताल में लगभग 30-35 मिनट तक मेडिकल जांच हुई ,जांच में सब कुछ सामान्य पाए जाने के बाद तीनों को अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट कोर्ट में पेश किया गया। इस पूरी कार्रवाई के दौरान हजरतगंज थाने से लेकर कोर्ट परिसर और जेल तक सुरक्षा के कड़े इंतजाम रहे। इस दौरान मीडिया की बड़ी भीड़ थी लेकिन पुलिस ने आरोपियों को पत्रकारों से बात नहीं करने दी।पत्रकारों ने तीनों से बात करने की बहुत कोशिश की, लेकिन कोई बातचीत नहीं हो सकी।
अदालत की कार्रवाई पूरी होने के बाद जब श्रद्धा को पुलिस वैन में बैठाया जा रहा था, तब उसने मीडिया की ओर देखकर हाथ जोड़ लिए। कोर्ट परिसर में मीडिया की भीड़ मौजूद थी। पत्रकारों ने आरोपियों से सवाल पूछने की कोशिश की, लेकिन तीनों ने कोई जवाब नहीं दिया। इसके बाद पुलिस उन्हें सुरक्षा के बीच जेल लेकर रवाना हो गई।
श्रद्धा दुबे, उसकी बहन रश्मि और ड्राइवर दानिश को मंगलवार को नागपुर के एक अपार्टमेंट से गिरफ्तार किया गया था। इसके बाद पुलिस तीनों को लखनऊ लेकर आई। शिवा शर्मा की मौत के मामले में श्रद्धा के खिलाफ हत्या की एफआईआर दर्ज कराई गई थी। इसके बाद से पुलिस उसकी तलाश कर रही थी।
पुलिस के मुताबिक, आरोपियों के पास से चार मोबाइल फोन और नकदी मिली है। जांच के दौरान श्रद्धा दुबे से यह पता लगाने की कोशिश की गई कि एटीएम से पैसे निकाले बिना और यूपीआई के जरिए लेनदेन किए बिना उसके पास नकदी कहां से आई। नेपाल से लौटने, फ्लैट में मौजूद लोगों और यात्रा से जुड़े पहलुओं पर भी पुलिस जवाब तलाश रही है।
लखनऊ में 9 अक्टूबर को कारोबारी शिवा शर्मा की श्रद्धा दुबे के फ्लैट से गिरने के बाद मौत हो गई थी। शिवा की मां ने इस मामले में श्रद्धा के खिलाफ हत्या की एफआईआर दर्ज कराई थी। घटना के बाद मौत की परिस्थितियों और आरोपों को लेकर सवाल उठे, जिसके बाद पुलिस ने जांच शुरू की।
तीनों आरोपियों को न्यायिक हिरासत में भेजे जाने के बाद जांच में उनके बयानों, उपलब्ध डिजिटल साक्ष्यों और घटनास्थल से जुड़े तथ्यों का मिलान अहम रहेगा। पुलिस यह भी जांच सकती है कि फरारी के दौरान आरोपियों के संपर्क में कौन-कौन था और उनकी आवाजाही में किसी अन्य व्यक्ति की भूमिका थी या नहीं। मामले में अंतिम निष्कर्ष जांच और न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही निकलेगा।