लखनऊ में अखिलेश यादव और समाजवादी पार्टी के बहिष्कार के बैनर लगे
स्वामी प्रसाद मौर्य ने अखिलेश को ‘PDA का दुश्मन नंबर-1’ बताया था
चंद्रशेखर आजाद भी सपा के PDA नारे और उसकी राजनीति पर सवाल उठा चुके
UP PDA Politics: उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव से पहले PDA (पिछड़ा, दलित और अल्पसंख्यक) की राजनीति को लेकर विवाद सामने आया है। लखनऊ में समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव के खिलाफ बहिष्कार के बैनर लगाए गए हैं।
इन पर ‘BOYCOTT AKHILESH YADAV’ और ‘BOYCOTT SAMAJWADI PARTY’ लिखा है। बैनरों के जरिए मौर्य, शाक्य, सैनी और कुशवाहा समाज की नाराजगी सामने रखने की कोशिश की गई है। हालांकि अभी ये पता नहीं चला है कि ये पोस्टर किसने और कब लगाए हैं।
इस पूरे विवाद के केंद्र में स्वामी प्रसाद मौर्य को लेकर अखिलेश यादव का हालिया बयान है। मौर्य ने अखिलेश के बयान पर पलटवार करते हुए उन्हें PDA का दुश्मन नंबर-1 बताया था। वहीं, नगीना से सांसद और आजाद समाज पार्टी के प्रमुख चंद्रशेखर आजाद भी सपा की PDA राजनीति पर सवाल उठा चुके हैं।
दरअसल, अखिलेश यादव और स्वामी प्रसाद मौर्य के बीच पिछले कुछ दिनों से जुबानी टकराव चल रहा है। 30 अक्टूबर को लखनऊ में मीडिया से बातचीत के दौरान अखिलेश से स्वामी प्रसाद मौर्य के INDIA गठबंधन में शामिल होने को लेकर सवाल पूछा गया था।
इस पर अखिलेश यादव ने साफ कहा कि स्वामी प्रसाद मौर्य उनके गठबंधन का हिस्सा नहीं हैं और सीटों के बंटवारे में उनके लिए कोई जगह नहीं है। इस दौरान उन्होंने कहा, ‘उन्हें अवॉइड कीजिए, इग्नोर कीजिए।’
अखिलेश के इस बयान के बाद मौर्य ने उन पर निशाना साधा। 1 नवंबर को उन्होंने अखिलेश यादव को PDA का दुश्मन नंबर-1 तक बता दिया।
स्वामी प्रसाद मौर्य ने अखिलेश यादव के बयान पर सवाल उठाते हुए कहा कि जो नेता पिछड़ों, दलितों और अल्पसंख्यकों के सम्मान की बात करता है, वह उन्हीं वर्गों के नेताओं के साथ कैसा व्यवहार कर रहा है?
उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि जब अखिलेश यादव आजम खान के नहीं हुए तो उनके क्या होंगे। मौर्य ने यह भी आरोप लगाया कि अखिलेश यादव को उनसे और चंद्रशेखर आजाद से परेशानी है।
मौर्य के इन बयानों के बाद PDA की राजनीति और पिछड़े वर्गों के नेताओं के साथ सपा नेतृत्व के रिश्तों को लेकर बहस तेज हो गई है।
यह विवाद केवल स्वामी प्रसाद मौर्य तक सीमित नहीं है। नगीना से सांसद और आजाद समाज पार्टी के प्रमुख चंद्रशेखर आजाद भी अखिलेश यादव की PDA राजनीति पर सवाल उठा चुके हैं।
28 सितंबर को चंद्रशेखर आजाद ने समाजवादी पार्टी के PDA नारे पर तंज कसते हुए कहा था कि उनका PDA बदलता रहता है, जबकि उनका PDA नहीं बदल रहा है। उन्होंने PDA के अलग-अलग अर्थ निकाले जाने पर भी कटाक्ष किया था। उनके इस बयान को अखिलेश यादव की सामाजिक समीकरण वाली राजनीति पर सीधे हमले के तौर पर देखा गया।
यूपी विधानसभा चुनाव से पहले PDA समाजवादी पार्टी की राजनीति का प्रमुख हिस्सा है। ऐसे में स्वामी प्रसाद मौर्य और चंद्रशेखर आजाद की ओर से उठाए जा रहे सवालों ने इस मुद्दे को फिर चर्चा में ला दिया है।
लखनऊ में अखिलेश यादव और समाजवादी पार्टी के बहिष्कार वाले बैनर सामने आने के बाद मौर्य, शाक्य, सैनी और कुशवाहा समाज की नाराजगी का मुद्दा भी राजनीतिक चर्चा में है। हालांकि, इन बैनरों के पीछे कौन लोग हैं और क्या ये पूरे समाज की भावना को दर्शाते हैं, यह स्पष्ट नहीं है।
रिपोर्ट- ईशांक दीक्षित