होटल की दीवार गिराकर तोड़फोड़ और लूटपाट का मामला
सीसीटीवी व मोबाइल फोन से बनाए गए वीडियो का लिया संज्ञान
इस मामले की आगे की सुनवाई 26 नवंबर को
Kanpur Hotel Negi: कानपुर के होटल नेगी ग्रैंड में कथित तोड़फोड़, लूटपाट और कब्जे के मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने पुलिस की भूमिका पर गंभीर सवाल उठाए हैं। अदालत ने मामले की विवेचना को दोषपूर्ण बताते हुए कानपुर नगर के पुलिस कमिश्नर रघुबीर लाल को व्यक्तिगत रूप से तलब किया है।
उन्हें 26 नवंबर को व्यक्तिगत हलफनामे के साथ अदालत में उपस्थित होने का निर्देश दिया गया है। कोर्ट ने अपर पुलिस उपायुक्त (एडीसीपी) कपिल देव सिंह को भी नोटिस जारी किया है। मामले में पुलिस अधिकारियों की कथित मिलीभगत के प्रथमदृष्टया संकेत मिलने पर अदालत ने जांच की निष्पक्षता को लेकर चिंता जताई है।
यह आदेश न्यायमूर्ति अजय भनोट और न्यायमूर्ति दिवेश चंद्र सामंत की खंडपीठ ने होटल की मालकिन प्रीति बाजपेयी की ओर से दाखिल याचिका पर सुनवाई करते हुए दिया। याचिका में होटल में हुई घटना की निष्पक्ष जांच कराने और पुलिस की कथित लापरवाही पर सवाल उठाए गए हैं।
मामला नवंबर 2025 में कानपुर के रावतपुर क्षेत्र स्थित होटल नेगी ग्रैंड का है। याचिका के मुताबिक, कुछ लोग जेसीबी लेकर होटल पहुंचे और परिसर की दीवार गिरा दी। इसके बाद होटल में घुसकर तोड़फोड़ और लूटपाट की गई।
होटल के दरवाजे, खिड़कियां, अलमारियां, टेलीविजन, सीसीटीवी कैमरे और डीवीआर तक क्षतिग्रस्त किए जाने का आरोप है। होटल संचालिका का कहना है कि घटना के वीडियो सामने आने के बावजूद शुरुआत में पुलिस ने मुकदमा दर्ज नहीं किया। बाद में उच्चाधिकारियों के हस्तक्षेप पर रावतपुर थाने में एफआईआर दर्ज की गई।
सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने 16 अप्रैल 2026 की केस डायरी में दर्ज तथ्यों और सीसीटीवी व मोबाइल फोन से बनाए गए वीडियो का संज्ञान लिया। फुटेज में जेसीबी से होटल की दीवार गिराने, लोगों के परिसर में प्रवेश करने और सामान को नुकसान पहुंचाने की घटनाओं का उल्लेख है।
केस डायरी में घटनास्थल पर पुलिसकर्मियों की मौजूदगी और उनकी गतिविधियों का भी जिक्र किया गया है। अदालत ने विवेचक की ओर से दाखिल हलफनामे को असंतोषजनक माना। कोर्ट का कहना है कि वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों की प्रथमदृष्टया संलिप्तता के संकेतों को देखते हुए जांच जिले के सर्वोच्च पुलिस अधिकारी की प्रत्यक्ष निगरानी में होनी चाहिए।
होटल मालकिन ने अपनी याचिका में तत्कालीन अपर पुलिस उपायुक्त कपिल देव सिंह पर घटना में सीधे तौर पर शामिल होने का आरोप लगाया है। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने उन्हें मामले में पक्षकार बनाने की अनुमति देते हुए नोटिस जारी किया है।
हालांकि, ये आरोप हैं और इनकी न्यायिक प्रक्रिया में जांच होनी बाकी है। अदालत ने आदेश की प्रति उत्तर प्रदेश के पुलिस महानिदेशक को भी भेजने का निर्देश दिया है। अब 26 नवंबर को पुलिस कमिश्नर के व्यक्तिगत हलफनामे और अदालत में उनके जवाब पर इस मामले की आगे की सुनवाई केंद्रित रहेगी।