एंटी करप्शन टीम (सोर्स- नवभारत लाइव)
उत्तर प्रदेश

एंटी करप्शन का शिकंजा: हापुड़ में चिकित्सक से मांगी थी डेढ़ लाख की रिश्वत, 50 हजार लेते हुए कानूनगो गिरफ्तार

Hapur Bribery Case: जनपद हापुड़ के धौलाना तहसील में जमीन संबंधी काम के बदले डेढ़ लाख रुपये रिश्वत मांगने के आरोप में कानूनगो को एंटी करप्शन टीम ने 50 हजार रुपये की रिश्वत लेते हुए गिरफ्तार कर लिया।

कपिल सोनी, स्निग्धा श्रीवास्तव

Hapur Kanungo Bribery Case: हापुड़ में जमीन संबंधी काम के बदले डेढ़ लाख रुपये रिश्वत मांगने के आरोप में धौलाना तहसील के कानूनगो बिजेंद्र सिंह को एंटी करप्शन टीम ने गिरफ्तार किया है। चिकित्सक के क्लीनिक पर 50 हजार रुपये की पहली किस्त लेते समय कार्रवाई की गई। हापुड़ में जमीन से जुड़े मामले में रिश्वत मांगने के आरोप में धौलाना तहसील में तैनात कानूनगो बिजेंद्र सिंह को एंटी करप्शन टीम ने 50 हजार रुपये लेते हुए गिरफ्तार किया है। आरोप है कि कानूनगो ने शौलाना गांव निवासी चिकित्सक डॉ. केपी सिंह से जमीन संबंधी काम के एवज में डेढ़ लाख रुपये की मांग की थी। शिकायत के सत्यापन के बाद टीम ने कार्रवाई की और चिकित्सक के क्लीनिक से कथित तौर पर रिश्वत की पहली किस्त लेते समय कानूनगो को पकड़ लिया।

जमीन के मामले को लेकर तहसील के चक्कर लगा रहे थे डॉ. केपी सिंह

जानकारी के अनुसार, डॉ. केपी सिंह शौलाना गांव में जमीन से संबंधित मामले को लेकर तहसील के चक्कर लगा रहे थे। चिकित्सक का कहना है कि जमीन की रजिस्ट्री, फर्द और दाखिल-खारिज संबंधी दस्तावेज उनके पास हैं और मौके पर उनका कब्जा भी है। आरोप है कि इसके बावजूद कानूनगो जमीन के कुछ हिस्से को किसी अन्य व्यक्ति की भूमि से संबंधित बताते हुए उनसे लगातार रकम की मांग कर रहा था।

चिकित्सक के मुताबिक, उन्होंने कानूनगो को जमीन से जुड़े मूल दस्तावेज भी दिखाए, लेकिन आरोप है कि समस्या का समाधान करने के बजाय उनसे डेढ़ लाख रुपये की मांग की गई। इसके बाद चिकित्सक ने मामले की शिकायत मेरठ एंटी करप्शन ब्यूरो में की।शिकायत के सत्यापन के बाद एंटी करप्शन टीम ने कानूनगो को पकड़ने की योजना बनाई। बुधवार को कानूनगो कथित रूप से 50 हजार रुपये की पहली किस्त लेने के लिए चिकित्सक के क्लीनिक पहुंचा। जैसे ही रुपये लिए गए, टीम ने उसे पकड़ लिया।

राजस्व निरीक्षक रंगे हाथ गिरफ्तार

भ्रष्टाचार निवारण संगठन (एंटी करप्शन टीम) मेरठ इकाई ने हापुड़ जिले की धौलाना तहसील में बड़ी कार्रवाई करते हुए राजस्व निरीक्षक (कानूनगो) कुंवर पाल सिंह को 50,000 रुपये की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथ गिरफ्तार किया है। इस मामले में आरोपी कानूनगो ने शिकायतकर्ता किसान की जमीन के कागजात सही करने और रिपोर्ट लगाने के एवज में रिश्वत (अवैध धनराशि) की मांग की थी। आरोप है कि कानूनगो पीड़ित की जमीन में दूसरे की जमीन का हिस्सा होना बताकर काम टाल रहा था और रिकॉर्ड सुधारने के लिए पैसे मांग रहा था। किसान की शिकायत पर मेरठ एंटी करप्शन टीम ने जाल बिछाया।

जिसके बाद बुधवार को धौलाना के एक क्लीनिक के पास से आरोपी कानूनगो को पहली किस्त के रूप में 50 हजार रुपये लेते हुए रंगे हाथ दबोच लिया गया। गिरफ्तारी के बाद जब टीम आरोपी को लेकर धौलाना थाने पहुंची, तो वहां स्थानीय लेखपालों ने कार्रवाई का विरोध करते हुए हंगामा भी किया। हालांकि, पुलिस और एंटी करप्शन टीम भ्रष्टाचार अधिनियम के तहत आगे की कानूनी कार्रवाई पूरी कर रही है।

भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत मामला दर्ज

मेरठ एंटी करप्शन टीम द्वारा धौलाना के राजस्व निरीक्षक (कानूनगो) को 50,000 रुपये की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथ गिरफ्तार करने के बाद की पूरी कानूनी प्रक्रिया एफआईआर और कानूनी धाराएं गिरफ्तारी के बाद एंटी करप्शन टीम आरोपी को लेकर धौलाना थाने पहुंची। वहां आरोपी के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया गया है। आरोपी पर भ्रष्टाचार निवारण (संशोधन) अधिनियम, 2018 की धारा 7 के तहत मुकदमा दर्ज किया गया है। यह धारा किसी लोक सेवक (सरकारी कर्मचारी) द्वारा अपने आधिकारिक कर्तव्य के बदले अनुचित लाभ या रिश्वत मांगने और स्वीकार करने पर लगाई जाती है। बताया जा रहा है कि, शिकायतकर्ता की शिकायत, रासायनिक प्रक्रिया (केमिकल युक्त नोटों की रिकवरी) का पंचनामा, और क्लिनिक में लगे सीसीटीवी कैमरे की फुटेज को इस मामले में मुख्य साक्ष्य (एविडेंस) बनाया गया है।

कानूनगो को विशेष एंटी करप्शन कोर्ट (मेरठ) में पेश करेगा संगठन

नियमानुसार मेरठ की भ्रष्टाचार निवारण संगठन टीम आरोपी कानूनगो को विशेष एंटी करप्शन कोर्ट (मेरठ) में पेश करेगी। घूसखोरी के मामलों में आरोपी को आमतौर पर 14 दिनों की न्यायिक हिरासत में जिला कारागार (जेल) भेज दिया जाता है। गिरफ्तारी की आधिकारिक रिपोर्ट जैसे ही हापुड़ के जिला मजिस्ट्रेट और संबंधित राजस्व विभाग को प्राप्त होगी, आरोपी कानूनगो को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर विभागीय जांच शुरू कर दी जाएगी। दोष सिद्ध होने पर भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत आरोपी को न्यूनतम 3 वर्ष से लेकर अधिकतम 7 वर्ष तक की जेल और भारी जुर्माने की सजा हो सकती है।

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