200 मतदान केंद्रों पर सुबह 8 से शाम 4 बजे तक वोटिंग
वरीयता क्रम के आधार पर बैलेट पेपर से होगा मतदान
पिछले चुनाव के मुकाबले करीब 15 हजार शिक्षक मतदाता बढ़े
Teachers MLC Election: गोरखपुर-फैजाबाद खंड शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र के एमएलसी चुनाव के लिए चुनावी गतिविधियां अपने अंतिम चरण में पहुंच गई हैं। शुक्रवार, 23 अक्टूबर को होने वाले मतदान के लिए प्रशासन ने तैयारियां पूरी कर ली हैं। गुरुवार को पोलिंग पार्टियां रवाना होंगी। इस चुनाव में पूर्वांचल और अवध के 17 जिलों के 200 मतदान केंद्रों पर कुल 54,910 शिक्षक मतदाता अपने मताधिकार का प्रयोग करेंगे। सुबह आठ बजे से शाम चार बजे तक मतदान होगा। इसके बाद सभी 16 प्रत्याशियों की किस्मत मतपेटियों में बंद हो जाएगी।
इस चुनाव में भाजपा ने ध्रुव त्रिपाठी पर भरोसा जताया है, जबकि समाजवादी पार्टी की ओर से डॉ. संजयन त्रिपाठी मैदान में हैं। दोनों प्रमुख दलों ने अपने प्रत्याशियों के समर्थन में पूरी ताकत लगाई है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और सपा प्रमुख अखिलेश यादव भी चुनाव प्रचार के जरिए शिक्षकों तक अपनी बात पहुंचा चुके हैं। ऐसे में शिक्षक एमएलसी का यह चुनाव राजनीतिक दलों के लिए प्रतिष्ठा का विषय बन गया है।
गोरखपुर-फैजाबाद खंड शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र में मतदाताओं की संख्या पिछले चुनाव की तुलना में लगभग 15 हजार बढ़ी है। कुल 54,910 मतदाताओं में सबसे अधिक 8,592 मतदाता आजमगढ़ जिले में हैं। गोरखपुर 7,289 मतदाताओं के साथ दूसरे स्थान पर है, जबकि मऊ में 5,131 शिक्षक मतदाता हैं।
मतदाताओं की बढ़ी हुई संख्या और विभिन्न शिक्षक संगठनों की सक्रियता ने चुनाव को दिलचस्प बना दिया है। मतदान से पहले प्रत्याशी व्यक्तिगत जनसंपर्क के जरिए मतदाताओं को अपने पक्ष में करने की कोशिश कर रहे हैं। वित्तविहीन विद्यालयों, सहायता प्राप्त विद्यालयों और अन्य शिक्षण संस्थानों से जुड़े शिक्षकों का समर्थन इस चुनाव में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
इस चुनाव में भाजपा स्नातक MLC देवेंद्र प्रताप सिंह के रुख को लेकर भी राजनीतिक चर्चा तेज है। खास तौर पर सपा प्रत्याशी डॉ. संजयन त्रिपाठी के समर्थन से जुड़े घटनाक्रम पर शिक्षक राजनीति की नजर बनी हुई है। चुनाव के दौरान उनका रुख किस तरह सामने आता है और उसका शिक्षकों के बीच क्या असर पड़ता है, यह महत्वपूर्ण सवाल है।
यदि देवेंद्र प्रताप सिंह का रुख सपा प्रत्याशी के समर्थन में स्पष्ट होता है, तो चुनावी चर्चा में इसका असर स्वाभाविक रूप से दिखाई दे सकता है। हालांकि, इससे भाजपा प्रत्याशी ध्रुव त्रिपाठी के मतों पर कितना प्रभाव पड़ेगा, इसका आकलन केवल राजनीतिक चर्चाओं के आधार पर नहीं किया जा सकता।
शिक्षक एमएलसी चुनाव में व्यक्तिगत संपर्क, शिक्षक संगठनों की भूमिका और प्रत्याशियों के प्रति मतदाताओं का भरोसा महत्वपूर्ण कारक हैं। इसलिए किसी नेता के समर्थन या विरोध को सीधे मतों के हस्तांतरण के रूप में देखना जल्दबाजी होगी। मतदान के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा कि इन घटनाक्रमों का चुनाव पर कितना प्रभाव पड़ा।
पिछले चुनाव में दूसरे स्थान पर रहे अजय सिंह एक बार फिर मुकाबले में हैं। मूल रूप से आजमगढ़ के रहने वाले अजय सिंह की वित्तविहीन विद्यालयों के शिक्षकों के बीच पहचान बताई जाती है। इस बार भी उनका जोर इसी वर्ग के मतदाताओं पर है।
दूसरी ओर, सपा प्रत्याशी डॉ. संजयन त्रिपाठी निजी विद्यालय संचालन से जुड़े हैं। ऐसे में उन्हें निजी शिक्षण संस्थानों के शिक्षकों का समर्थन मिलने की उम्मीद है। हालांकि, इन विद्यालयों के मतदाता किस प्रत्याशी को प्राथमिकता देंगे, यह मतदान के दौरान ही स्पष्ट होगा।
अजय सिंह ने दलीय राजनीति से अलग शिक्षक हितों को प्रमुख मुद्दा बनाया है। उनकी मौजूदगी के कारण प्रमुख राजनीतिक दलों के प्रत्याशियों के सामने मतदाताओं को अपने पक्ष में बनाए रखने की चुनौती है।
इस चुनाव में निर्दलीय प्रत्याशी राजीव यादव भी अपनी दावेदारी पेश कर रहे हैं। पिछले चुनाव में उन्हें तीसरा स्थान मिला था। इस बार वह सहायता प्राप्त विद्यालयों के साथ वित्तविहीन शिक्षकों के बीच भी समर्थन जुटाने की कोशिश कर रहे हैं।
राजीव यादव को युवा शिक्षकों के बीच समर्थन मिलने की चर्चा है। ऐसे में उनका प्रदर्शन भी चुनावी समीकरण को समझने के लिहाज से महत्वपूर्ण होगा। हालांकि, उनके समर्थन का वास्तविक दायरा और विभिन्न वर्गों के मतदाताओं पर प्रभाव मतदान के बाद ही सामने आएगा।
इस चुनाव में मतदान की प्रक्रिया भी सामान्य विधानसभा चुनाव से अलग है। मतदाता को चुनाव आयोग की ओर से उपलब्ध कराए गए पेन से बैलेट पेपर पर अपनी पसंद के प्रत्याशी के नाम के सामने वरीयता अंकित करनी होगी। मतदाता अपनी पसंद के अनुसार एक से अधिक प्रत्याशियों को वरीयता दे सकता है। इसके लिए निर्धारित नियमों का पालन करना जरूरी होगा।
शुक्रवार को होने वाला मतदान इस चुनाव का सबसे महत्वपूर्ण चरण होगा। भाजपा और सपा के प्रत्याशियों के साथ निर्दलीय उम्मीदवारों की मौजूदगी ने मुकाबले को बहुकोणीय बनाया है। अब सभी की निगाहें मतदान प्रतिशत, शिक्षक मतदाताओं के रुझान और मतगणना के परिणाम पर टिकी हैं। यह चुनाव शिक्षक राजनीति में प्रत्याशियों की स्थिति सामने लाने के साथ ही दोनों प्रमुख दलों के संगठनात्मक प्रयासों की भी परीक्षा होगा।
रिपोर्ट: अनुराग मिश्रा