दिवाली के अवसर पर वनटांगिया गांव में सीएम योगी  सोर्स : सोशल मीडिया
गोरखपुर

वनटांगिया गांव में दीपावली मनाएंगे CM योगी; 82 करोड़ की 52 विकास परियोजनाओं की देंगे सौगात

CM Yogi Celebrate Diwali Vantangiya Village: सीएम योगी हर साल इस वनटांगिया गांव में दीपावली मनाने आते हैं। यहां हर घर में दीपों की रोशनी अपने 'योगी बाबा' के नाम समर्पित होती है।

राजेश कुमार मिश्र, शक्ति सौरभ

Highlights:

  • कुसम्ही जंगल के वनटांगिया गांव में हर साल दीपावली मनाते हैं सीएम

  • मुख्यमंत्री बनने के बाद भी जारी रखी है परंपरा

  • स्वागत के लिए तैयारियों में जुटा है प्रशासन

CM Yogi Celebrate Deepotsav Vantangiya families : गोरखपुर जिला मुख्यालय से 15 किलोमीटर दूर कुसम्ही जंगल के बीच बसे वनटांगिया गांव जंगल तिकोनिया नंबर तीन के लोग सीएम योगी के आगमन की उत्साह के साथ राह देख रहे हैं । गांव में उल्लास और उमंग का माहौल है। वजह भी खास है। सीएम योगी हर साल इस वनटांगिया गांव में दीपावली मनाने आते हैं। यहां हर घर में दीपों की रोशनी अपने 'योगी बाबा' के नाम समर्पित होती है।

मुख्यमंत्री के स्वागत के लिए प्रशासन तैयारियों में जुटा है तो गांव के लोग भी अपने दरवाजे को साफ-सुथरा बनाने, रंग-रोगन करने और सजाने-संवारने में लगे हैं। पूरा गांव मिल-जुलकर अपने अतिथि की अगवानी की तैयारी कर रहा है।

52 विकास परियोजनाओं का लोकार्पण और शिलान्यास

सीएम योगी रविवार को एक बार फिर जंगल तिकोनिया नंबर तीन पहुंचकर वनटांगिया परिवारों के साथ दीपोत्सव मनाएंगे और दशकों तक वंचित रहे इस समुदाय के लोगों के साथ दीपावली की खुशियां साझा करेंगे। इस अवसर पर वह 82.41 करोड़ रुपये की लागत वाली 52 विकास परियोजनाओं का लोकार्पण और शिलान्यास भी करेंगे।

इनमें वनटांगिया गांव की बाहरी कनेक्टिविटी के लिए इंटरलॉकिंग सड़क, कुसम्ही जंगल में ईको पार्क और पिपराइच में वैश्विक नगर बाजार का निर्माण शामिल है। जंगल तिकोनिया नंबर तीन में बतौर सांसद और गोरक्षपीठ के उत्तराधिकारी के रूप में योगी आदित्यनाथ ने वनटांगिया समुदाय के साथ दीपावली मनाने की जो परंपरा शुरू की थी, मुख्यमंत्री बनने के बाद भी जारी है।

कौन हैं वनटांगिया, जिन्होंने बसाया जंगल ?

ब्रिटिश काल के दौरान जब रेल पटरियां बिछाई जा रही थीं, तब रेलवे स्लीपर बनाने के लिए जंगलों से बड़े पैमाने पर साखू के पेड़ों की कटाई हुई। इसकी भरपाई के लिए अंग्रेज सरकार ने साखू के नए पौधे लगाने और उनकी देखरेख करने के लिए गरीब भूमिहीनों और मजदूरों को जंगल में बसाया। साखू के जंगल विकसित करने के लिए वर्मा देश की 'टांगिया विधि' का इस्तेमाल किया गया।

इसी विधि से जंगल में रहकर पौधों की देखरेख करने वाले लोग वनटांगिया कहलाए। कुसम्ही जंगल के पांच इलाकों जंगल तिकोनिया नंबर तीन, रजही खाले टोला, रजही नर्सरी, आमबाग नर्सरी और चिलबिलवा में वर्ष 1918 में इनकी पांच बस्तियां बसीं। इसी के आसपास महराजगंज के जंगलों में अलग-अलग स्थानों पर इनके 18 गांव भी बसे। वर्ष 1947 में देश आजाद हुआ, लेकिन वनटांगियों का जीवन गुलामी के दौर जैसा ही बना रहा। जंगल बसाने वाले इस समुदाय के पास देश की नागरिकता तक नहीं थी।

महाराज जी नहीं आते तो बदहाली में ही मर-खप जाते

साल 1998 में योगी आदित्यनाथ पहली बार गोरखपुर के सांसद बने। उनको जानकारी दी गयी कि वनटांगिया बस्तियों में रहने वाले लोगों का जीवन बेहद कठिन परिस्थितियों में गुजर रहा है। उन्होंने सबसे पहले इन बस्तियों तक शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाने का निर्णय लिया।

इस काम में उनके नेतृत्व वाली महाराणा प्रताप शिक्षा परिषद की संस्थाओं एमपी कृषक इंटर कॉलेज और एमपीपीजी कॉलेज जंगल धूसड़ के साथ गोरखनाथ मंदिर की ओर से संचालित गुरु श्री गोरक्षनाथ अस्पताल की मोबाइल मेडिकल सेवा को लगाया गया।

जंगल तिकोनिया नंबर तीन वनटांगिया गांव में वर्ष 2003 से शुरू हुए ये प्रयास वर्ष 2007 तक आकार लेने लगे। गांव के रामगणेश बताते हैं कि वनटांगिया समुदाय पूरी तरह उपेक्षित था। वह कहते हैं, महाराज जी (सीएम योगी) नहीं आते तो बदहाली में ही मर-खप जाते।

सीएम योगी के संघर्षों का साक्षी है गोरक्षनाथ हिंदू विद्यापीठ

वनटांगिया समुदाय के बच्चों को शिक्षा के माध्यम से समाज की मुख्यधारा से जोड़ने के लिए योगी आदित्यनाथ को मुकदमे का सामना भी करना पड़ा। साल 2009 में जंगल तिकोनिया नंबर तीन में योगी की संस्था के लोग वनटांगिया बच्चों के लिए एस्बेस्टस शीट डालकर एक अस्थायी स्कूल का निर्माण कर रहे थे।

वन विभाग ने इस काम को अवैध बताते हुए मुकदमा दर्ज करा दिया। योगी के हस्तक्षेप के बाद अस्थायी स्कूल का निर्माण हो सका। गोरक्षनाथ हिंदू विद्यापीठ के नाम से यह विद्यालय संचालित है।

गोरक्ष सेवा संस्थान द्वारा संचालित स्कूल

'बाबा के गोड़ पड़ल त उदयार हो गइल'

जंगल तिकोनिया नंबर तीन के रामगणेश बताते हैं, 'गांव में जवन भी काम लउकत बा, सब बाबा के ही करावल है। नाइ त के पूछे वाला रहल। बाबा के गोड़ (पैर) पड़ल त समझा कि उदयार हो गइल।' गांव में सभी के लिए पक्के मकान, शौचालय, बिजली, रसोई गैस, खेती के लिए जमीन का पट्टा और बच्चों के लिए स्कूल जैसी मुख्यमंत्री से मिली सौगातों का जिक्र करते हुए रामगणेश दीपावली पर मुख्यमंत्री के आगमन की चर्चा करते हुए उत्साहित हो जाते हैं।

वह कहते हैं, 'अब त बाबा के बिना तिउहार (त्योहार) अधूरा लगेला।' वनटांगिया समुदाय के लोगों के मन में उनके उत्थान के लिए योगी आदित्यनाथ के संघर्षों की याद आज भी जीवंत है। रामगणेश कहते हैं, 'बाबा जी (योगी) के नजर नाही पड़त त जिनगी बदहाली के नरकवे में बीत जात।

कुसम्ही में ईको पार्क और पिपराइच में नगर बाजार का होगा शिलान्यास

सीएम दीपोत्सव के दिन जिन विकास परियोजनाओं का शिलान्यास करेंगे, उनमें कुसम्ही जंगल में ईको पार्क का विकास और पिपराइच नगर पंचायत में नगर बाजार का निर्माण भी शामिल है।

ईको टूरिज्म को बढ़ावा देने के लिए कुसम्ही जंगल में 4 करोड़ 84 लाख 81 हजार रुपये की लागत से ईको पार्क विकसित किया जाएगा। इनमें स्विस कॉटेज और कई आधुनिक सुविधाएं भी मिलेगी।

वहीं, पिपराइच नगर पंचायत में वैश्विक नगर बाजार के निर्माण पर 1 करोड़ 91 लाख 51 हजार रुपये खर्च होंगे। इसके तैयार होने से पिपराइच की बाजार व्यवस्था बेहतर होगी और स्थानीय स्तर पर व्यापारिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा।

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