रामराज्य की भावना से काम कर रही डबल इंजन की सरकार
सीएम योगी ने विकास कार्यों से गोरखपुर में विगत छह सालों में आए बदलाव और इससे पूर्व की स्थिति की भी चर्चा की। उन्होंने कहा कि आजादी के बाद से गोरखपुर विकास की दृष्टि से लगातार उपेक्षित रहा। कुछ लोगों ने तो जानबूझकर इस उपेक्षित किया। पर, आज गोरखपुर में वह सब कुछ है जो गोरखपुर की आवश्यकता है। पहले खुद बीमार रहा मेडिकल कॉलेज स्वस्थ हो गया है तो यहां यहां एम्स भी सेवा दे रहा है। चमचमाती सड़कें, भव्य रामगढ़ताल सबको अपनी ओर आकर्षित कर रहे हैं। गोरखपुर का चिड़ियाघर अलग ही आकर्षण पैदा कर रहा है। रोजगार के नए सृजन की दृष्टि से गीडा का विकास हम सबके सामने है। बंद खाद कारखाना, पिपराइच की चीनी मिल का दोबारा चलना अकल्पनीय था लेकिन आज हकीकत है। भटहट में आयुष विश्वविद्यालय खुलेगा, कोई सोच भी नहीं सकता था। आज यह सब साकार हो रहा है क्योंकि डबल इंजन की सरकार रामराज्य की परिकल्पना को साकार करने के लिए सामूहिकता की भावना से कार्य कर रही है।
कुछ सालों में गोरखपुर में जलमार्ग कनेक्टिविटी भी
मुख्यमंत्री ने कहा कि आज गोरखपुर में रोड, रेल और एयर कनेक्टिविटी शानदार है। कुछ वर्षों के बाद यहां जल मार्ग (वाटर वे) की कनेक्टिविटी को भी आगे बढ़ाया जाएगा। इस तरह अनेक सुविधाएं एक साथ विकसित होकर इस क्षेत्र को अत्यंत समृद्ध और खुशहाल के क्षेत्र के रूप में बदलने के लिए कार्य करेंगी।
अब भय नहीं, अधिकार की बात करते हैं वनटांगिया
मुख्यमंत्री ने कहा कि वनटांगिया समाज के लोग पहले भयभीत रहते थे। उन्हें वन विभाग की तरफ से बेदखली, फर्जी एफआईआर, गिरफ्तारी का भय रहता था। पर, डबल इंजन की सरकार में उनका भय समाप्त हो गया। उन्हें अपना अधिकार मिल गया है। वनटांगिया अब भय नहीं अपने अधिकार की बात करते हैं। आज वनटांगिया लोगों के पास भी पक्का मकान, शौचालय, रसोई गैस कनेक्शन, बिजली कनेक्शन, आयुष्मान कार्ड, की सुविधा है। मुख्यमंत्री ने कहा कि इसके साथ साथ ही उपेक्षित जनजातियों मुसहर, थारू, चेरु, बुक्सा, कोल आदि को भी आवास, बिजली, रसोई, आयुष्मान जैसी सुविधाओं से आच्छादित किया जा रहा है। उपेक्षित लोगों को बुनियादी सुविधाओं का लाभ और उनका अधिकार मिलना ही असली दीपावली है।
वनवासियों को नकारात्मक ताकतों के खिलाफ खड़ा किया प्रभु श्रीराम ने
दीपावली मनाए जाने के महात्म्य क्या वर्णन करते हुए मुख्यमंत्री ने बताया की प्रभु श्रीराम ने अपने वनवास कालखंड के दौरान ऋषि-मुनियों को अभय प्रदान करते हुए वनवासियों और गिरिवासियों को नकारात्मक ताकतों के खिलाफ खड़ा किया। इन्हें एकजुट करते हुए आर्यावर्त और दुनिया को रावण के आतंक से मुक्त कराया।