

2017 में पांच वनटांगिया बस्तियों को मिला राजस्व गांव का दर्जा
हर साल मुख्यमंत्री के आगमन का वनटांगिया परिवारों को रहता है इंतजार
जंगलों में गुमनाम जिंदगी से पहचान और अधिकारों तक पहुंचा वनटांगिया समाज
Vantangiya Community Diwali Celebration: दीपावली खुशियों और रोशनी का पर्व है, लेकिन गोरखपुर के जंगल तिनकोनिया नंबर तीन में इस त्योहार का महत्व कुछ अलग है। यहां दीपावली केवल दीप जलाने और मिठाइयां बांटने का अवसर नहीं, बल्कि वर्षों तक उपेक्षा और अभाव में जीवन बिताने वाले वनटांगिया समाज के सम्मान, पहचान और बदलाव की कहानी है। कभी जिन परिवारों के पास चारपाई रखने तक की जगह नहीं थी, आज उन्हीं के घर-आंगन में दीपावली जगमगा रही है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ हर साल इनके बीच पहुंचकर त्योहार की खुशियां साझा करते हैं।
मुख्यमंत्री और वनटांगिया समाज का यह रिश्ता वर्ष 2009 में शुरू हुआ था। उस समय योगी आदित्यनाथ गोरखपुर के सांसद थे। उन्होंने दीपावली जैसे बड़े त्योहार को उन लोगों के बीच मनाने का फैसला किया, जो लंबे समय से सामाजिक और प्रशासनिक उपेक्षा का सामना कर रहे थे। सांसद रहते शुरू हुई यह पहल मुख्यमंत्री बनने के बाद भी लगातार जारी रही।
वनटांगिया समाज का इतिहास संघर्षों से भरा रहा है। जंगलों में पौधरोपण और वन संरक्षण के लिए बसाए गए इस समुदाय के लोग आजादी के बाद भी लंबे समय तक बुनियादी सुविधाओं और सरकारी अधिकारों से वंचित रहे। उनके पास न गांवों जैसी सुविधाएं थीं और न ही सरकारी योजनाओं का लाभ पाने के पर्याप्त अवसर।
गोरक्षपीठ और महाराणा प्रताप शिक्षा परिषद के माध्यम से इस समाज तक शिक्षा और सामाजिक सहायता पहुंचाने के प्रयास हुए। जंगल तिनकोनिया नंबर तीन में हिंदू विद्यापीठ की स्थापना से बच्चों के लिए शिक्षा के रास्ते खुले। इसके बाद योगी आदित्यनाथ के मुख्यमंत्री बनने पर वर्ष 2017 में गोरखपुर की पांच वनटांगिया बस्तियों को राजस्व गांव का दर्जा मिला। इससे आवास, बिजली, सड़क, पेयजल और सरकारी योजनाओं का लाभ मिलने का रास्ता साफ हुआ।
दीपावली पर मुख्यमंत्री के जंगल तिनकोनिया पहुंचने का वनटांगिया परिवारों को बेसब्री से इंतजार रहता है। उनके बीच पहुंचकर योगी आदित्यनाथ बच्चों को मिठाइयां और उपहार देते हैं और ग्रामीणों से संवाद करते हैं। उनके लिए यह आयोजन केवल मुख्यमंत्री का आगमन नहीं, बल्कि उस रिश्ते की निरंतरता है, जिसकी शुरुआत करीब डेढ़ दशक पहले हुई थी।
जंगल तिनकोनिया की दीपावली आज सामाजिक बदलाव की प्रतीक बन चुकी है। कभी जंगलों में गुमनाम जिंदगी जीने वाला वनटांगिया समाज आज अपनी पहचान और अधिकारों के साथ विकास की मुख्यधारा से जुड़ रहा है। यहां जलने वाले दीये केवल त्योहार की रोशनी नहीं, बल्कि सम्मान, शिक्षा और बेहतर भविष्य की उम्मीद भी जगाते हैं।