Highlights:
रामपुर जौहर यूनिवर्सिटी की जमीन और इमारतें अस्थायी रूप से अटैच
₹1,170 करोड़ बताई गए बाजार मूल्य
किसानों की जमीन और सरकारी धन के इस्तेमाल के आरोप
ED जांच में निर्माण लागत और घोषित खर्च में मिला अंतर
Azam Khan Jauhar University: रामपुर में आजम खान के मोहम्मद अली जौहर यूनिवर्सिटी को लेकर प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने बड़ी कार्रवाई की है। ईडी के लखनऊ जोनल कार्यालय ने मनी लॉन्ड्रिंग मामले में जौहर यूनिवर्सिटी की जमीन और इमारतों को अस्थायी रूप से अटैच कर लिया है। बता दें कि टैच की गई संपत्तियों का मूल्य 426.46 करोड़ रुपये बताया गया और इनका मौजूदा बाजार मूल्य करीब 1170 करोड़ रुपये आंका गया है। ईडी की यह कार्रवाई धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA) 2002 के तहत की गई है।
28 अक्टूबर 2026 को ईडी द्वारा जारी प्रेस रिलीज के मुताबिक, यह मामला मौलाना मोहम्मद अली जौहर ट्रस्ट और सपा नेता मोहम्मद आजम खान और अन्य लोगों के खिलाफ चल रही जांच से जुड़ा है। यूनिवर्सिटी का संचालन जौहर ट्रस्ट करता है, जबकि इसकी स्थापना आजम खान ने की थी।
बता दें कि ईडी की यह जांच रामपुर के थाना अजीमनगर में दर्ज 26 FIR के आधार पर जांच शुरू की गई थी। आरोप लगाया गया था कि यूनिवर्सिटी के निर्माण के लिए किसानों की कृषि भूमि जबरन कब्जे में ली गई। जिला प्रशासन की जांच रिपोर्ट में गांव सिंहनखेड़ा में करीब 34 एकड़ क्षेत्रफल वाली 45 प्लॉट की जमीन पर अवैध कब्जे की बात सामने आई थी।
ईडी ने बताया कि संबंधित जमीन की लीज रद्द होने के बावजूद उस पर कब्जा बनाए रखा है।शत्रु संपत्ति के कस्टोडियन ने जिला प्रशासन के माध्यम से जमीन का कब्जा वापस ले लिया है।
जानकारी के मुताबिक ईडी की जांच में पता चला कि सरकारी निर्माण कार्यों के लिए निर्धारित धनराशि का उपयोग यूनिवर्सिटी के निजी परिसर में किया गया। आरोप यह भी है कि सरकारी ठेके हासिल करने वाले ठेकेदारों ने ठेकों से प्राप्त धनराशि का एक हिस्सा दान के रूप में ट्रस्ट को वापस दिया।
ईडी ने यह जानकारी उत्तर प्रदेश पुलिस को दी। इसके बाद 13 अक्टूबर को थाना अजीमनगर में एफआईआर संख्या 0224/2026 दर्ज की गई। जिसके मुताबिक आजम खान और जौहर ट्रस्ट से जुड़े अन्य लोगों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता व भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की विभिन्न धाराओं में मामला दर्ज किया गया था।
ईडी द्वारा जारी प्रेस रिलीज में यह जानकारी दी गई कि विधायक और विधान परिषद सदस्य की स्थानीय क्षेत्र विकास निधि से करीब 6.60 करोड़ रुपये के कार्य यूनिवर्सिटी के निजी परिसर में कराए गए। इसके अलावा पंडाल, OBC बालक छात्रावास और अस्पताल ब्लॉक के निर्माण के लिए उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा 23.41 करोड़ रुपये की मंजूरी दिए जाने का भी उल्लेख किया गया है।
ईडी के अनुसार 2015 में पंडाल निर्माण के लिए मंजूर 12.16 करोड़ रुपये की राशि के साथ यह शर्तें थीं कि उसका स्वामित्व संस्कृति विभाग के पास रहेगा और राज्य सरकार के लिए उसका निःशुल्क इस्तेमाल करने की सुविधा होगी। लेकिन वर्ष 2016 में आदेश में बदलाव कर पंडाल का स्वामित्व यूनिवर्सिटी को दे दिया गया और सरकारी उपयोग की शर्त हटा दी गया।
ईडी द्वारा दी गई जानकारी के मुताबिक जिला मूल्यांकन अधिकारी की रिपोर्ट में यूनिवर्सिटी परिसर में 59 इमारतों की निर्माण लागत 494.46 करोड़ रुपये आंकी गई और जमीन की कीमत 4.63 करोड़ रुपये, दोनों को मिलाकर परिसर की कुल लागत 499.09 करोड़ रुपये बताई गई। ट्रस्ट ने आयकर रिटर्न में 78.32 करोड़ रुपये का पूंजीगत व्यय दिखाया। लेकिन जांच में 12.29 करोड़ रुपये के दान को गैर-वास्तविक बताए जाने के बाद एजेंसी ने 66.03 करोड़ रुपये को वास्तविक खर्च माना। ईडी के मुताबिक, शेष 426.46 करोड़ रुपये की धनराशि का वैध स्रोत नहीं बताया जा सका। इसी आधार पर संपत्तियों को अटैच करने की कार्रवाई की गई।
ईडी ने बताया कि इस मामले में 19 अगस्त को जौहर यूनिवर्सिटी और उससे जुड़े परिसरों पर तलाशी ली गई थी, उस दौरान इलेक्ट्रॉनिक उपकरण और जांच से संबंधित दस्तावेज भी जब्त किए गए थे। इसके अलावा रामपुर में वर्ष 2016 के दौरान मकानों को गिराए जाने, लोगों के साथ मारपीट और नगर पालिका की सफाई मशीनों को यूनिवर्सिटी परिसर में पहुंचाने के मामलें का भी जिक्र किया गया है। इन मामलों में पुलिस द्वारा एफआईआर दर्ज और आरोपपत्रों को जांच में शामिल किए जाने की बात सामने आई है।
फिलहाल, इस मामलें में ईडी ने स्पष्ट किया है कि आगे की जांच जारी है। एजेंसी की ओर से लगाए गए आरोपों पर अंतिम निर्णय न्यायिक प्रक्रिया के तहत ही होगा।