लखनऊ: उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में आज लोकनायक जयप्रकाश नारायण की जयंती को लेकर सियासी घमासान मचा हुआ है। समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव आज जयप्रकाश नारायण इंटरनेशनल सेंटर जाकर उन्हें श्रद्धांजलि देने वाले थे, लेकिन इसके पहले ही उनके आवास पर बैरिकेडिंग कर दी गई। इसके बाद इस मामले पर अब सियासत तेज हो गई है और अखिलेश यादव को कांग्रेस का भी समर्थन मिल गया है।
अखिलेश के समर्थन में कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने कहा कि "किसी भी जगह जहां लोकतंत्र है, वहां कोई श्रद्धांजलि भी नहीं देने जा सकता। यह कैसी बात है, आप बता दीजिए कि उसे जगह क्या करना है और क्या नहीं करना है। ताकि वहां जो निर्माण कार्य चल रहे हैं, उसे नुकसान ना हो। लेकिन आप किसी को जाने से रोक देंगे, उनके घर के बाहर घेराबंदी करके पुलिस लगा देंगे, यह कहां का लोकतंत्र है।"
इधर, यूपी सरकार के मंत्री लखनऊ विकास प्राधिकरण के निर्देश का हवाला दे रहे है। उत्तर प्रदेश सरकार के मंत्री जयवीर सिंह ने कहा कि पिछले साल भी अखिलेश यादव और समाजवादी पार्टी के कार्यकर्ता जबरन JPNIC की दीवार को फांदकर भीतर चले गए थे और उसे क्षतिग्रस्त कर दिया था। बंद पड़ी इमारत में माल्यार्पण की अनुमति नहीं दी जा सकती। लखनऊ विकास प्राधिकरण ने अखिलेश यादव को इस बात से पहले ही अवगत करवा दिया था कि वहां माल्यार्पण की अनुमति देना संभव नहीं है और यदि अखिलेश यादव भ्रष्टाचार की बात कर रहे हैं तो JPNIC का निर्माण कार्य उन्हीं के कार्यकाल में शुरू हुआ था। साल 2017 के बाद वहां कोई काम नहीं हुआ है और भ्रष्टाचार का यदि कोई आरोप है, तो अखिलेश यादव के कार्यकाल के हो सकते हैं। श्रद्धांजलि कहीं से भी दी जा सकती है और उनके बारे में सम्मान और आस्था का भाव कहीं से भी प्रकट किया जा सकता है। समाजवादी पार्टी की जो फितरत रही है, यह सब उसी का हिस्सा हो सकता है।"
सपा, कांग्रेस और सरकार के बीच छिड़ा सियासी विवाद कब समाप्त होता है, यह देखने लायक होगा। लेकिन फिलहाल अखिलेश यादव JPNIC पहुंचकर लोकनायक जयप्रकाश नारायण की प्रतिमा पर माल्यार्पण करने के लिए अड़े हुए हैं। उनके साथ सपा के कार्यकर्ता भी वहां जाने के लिए तैयार हैं, लेकिन पूरे क्षेत्र में पुलिस ने बैरिकेडिंग कर रखी है और सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए हुए हैं।