लखनऊ: उत्तर प्रदेश में चल रही केशव प्रसाद मौर्या बनाम अखिलेश यादव की द्विपक्षीय जंग अब त्रिकोणीय सीरीज में बदलती जा रही है। जी हां केशव-अखिलेश की लड़ाई में कांग्रेस की भी एंट्री हो चुकी है। रविवार को कांग्रेस ने भी डिप्टी सीएम पर हमला बोला है। जिसके बाद यह माना जा रहा है कि अब यह जुबानी जंग और दिलचस्प होने वाली है।
उत्तर प्रदेश की सियासत में केशव प्रसाद बनाम अखिलेश यादव की जंग मशहूर हो चुकी है। इस जंग के मैदान के रूप में सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' को चुना गया है। गाहे बगाहे एक आध जुबानी मैच भी हो जाता है। रविवार को उत्तर प्रदेश के सपा मुखिया और कन्नौज सांसद अखिलेश यादव ने एक बार फिर से हमला बोला।
अखिलेश यादव ने एक्स पोस्ट के जरिए केशव प्रसाद मौर्य को निशाना बनाते हुए लिखा कि कोई ‘उप’ डबल हार के ‘उपहार’ के बाद भी डबल इंजन का प्रशंसा-प्रमाणपत्र बाँट रहे हैं। अगर माननीय सही काम कर रहे होते तो दो ‘उप मुख्यमंत्री’ की क्या ज़रूरत पड़ती। इसका मतलब या तो वो सही काम नहीं कर रहे हैं या फिर बाकी दो बेकाम हैं, नाकाम हैं, और उनका काम दरबारी चारण की तरह करना बस स्तुतिगान है। अगर उप सच में उपयोगी होते हैं, तो दिल्ली के मंडल में भी होने चाहिए थे, परंतु हैं नहीं! इसका जवाब देंगे ‘उप’ या रहेंगे ‘चुप’?
अखिलेश यादव के इस हमले पर केशव प्रसाद मौर्य की प्रतिक्रिया आना तय माना जा रहा है। लेकिन उनकी प्रतिक्रिया आने से पहले कांग्रेस ने भी केशव प्रसाद मौर्य को अपना निशाना बना लिया है। कांग्रेस प्रवक्ता अंशू अवस्थी ने कहा कि डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य ने पिछड़ों के अधिकारों और हितों से समझौता करते हुए सरेंडर कर दिया है।
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अंशू ने आगे कहा कि इससे पहले भी कई बार उन्हें अपमानित किया गया। न जाने क्या क्या कह गया और स्टूल पर बिठाया गया। लेकिन हर बार वह पिछड़ों के अधिकारों को सरकार और सीएम योगी आदित्यनाथ के सामने सरेंडर करते रहे। कांग्रेस प्रवक्ता ने इसे पिछड़ों के अपमान से भी जोड़ा।ॉ
हालांकि बाद केशव प्रसाद मौर्य ने भी इस पर पलटवार किया है। कांग्रेस को कभी जड़ से उखाड़ने का दम भरने वाले लालू और मुलायम परिवार आज दोनों खुद ही कांग्रेस के बैसाखी बन चुके हैं। पिछड़ा वर्ग की राजनीति का दम भरने वाले यह दोनों परिवार उस कथित गांधी परिवार के पिछलग्गू बने हुए हैं जिसने दशकों तक पिछड़ों का खून चूसा है।