इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि किन्नर समुदाय का बधाई या नेग मांगना गलत है (सोर्स- सोशल मीडिया) 
उत्तर प्रदेश

बधाई मांगने पर होगी जेल...HC ने किन्नरों के नेग को लेकर दिया बड़ा फैसला, बोले- यह अपराध माना जा सकता है

Allahabad HC Rules Against Kinnar Community: इलाहाबाद हाई कोर्ट का बड़ा फैसला किन्नर समुदाय को 'बधाई' या 'नेग' मांगने का कोई कानूनी अधिकार नहीं है। कोर्ट ने कहा कि जबरन वसूली कानूनन अपराध मानी जाएगी।

अक्षय साहू

Allahabad HC Says Kinnar Community Not Entitled Seek Badhai: इलाहाबाद हाई कोर्ट की लखनऊ बेंच ने 28 अप्रैल को एक महत्वपूर्ण फैसला देते हुए कहा कि ‘किन्नर’ समुदाय के लोगों के पास पारंपरिक रूप से दी जाने वाली ‘बधाई’ या ‘नेग’ (शुभ अवसरों पर मांगी जाने वाली नकद भेंट) मांगने का कोई कानूनी अधिकार नहीं है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि ऐसी मांग करना कानून के दायरे में अपराध भी माना जा सकता है।

यह फैसला जस्टिस आलोक माथुर और जस्टिस अमिताभ कुमार राय की खंडपीठ ने गोंडा जिले की ट्रांसजेंडर रेखा देवी की याचिका को खारिज करते हुए दिया। याचिका में रेखा देवी ने मांग की थी कि उन्हें ‘नेग’ वसूली के लिए एक विशेष क्षेत्र निर्धारित किया जाए।

याचिका में क्या कहा गया था?

रेखा देवी ने जरवल कस्बे में काटी का पुल से लेकर घाघरा घाट और कर्नलगंज में सरयू पुल तक के इलाके को अपने लिए आरक्षित क्षेत्र घोषित करने की मांग की थी। उनका कहना था कि वह लंबे समय से इन क्षेत्रों में बधाई या नेग प्राप्त करती रही हैं। उनके वकील ने अदालत में दलील दी कि इस समुदाय के अन्य सदस्यों के आने पर अक्सर विवाद और झगड़े की स्थिति पैदा हो जाती है। उन्होंने यह भी तर्क दिया कि यह परंपरा वर्षों पुरानी है और इसे एक प्रकार के पारंपरिक अधिकार के रूप में देखा जाना चाहिए।

किसी भी प्रकार की शुल्क वसूली अपराध

हालांकि इलाहाबाद हाई कोर्ट की बेंच ने इन दलीलों को स्वीकार नहीं किया। कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि किसी भी प्रकार का शुल्क, लेवी या वसूली केवल कानून के प्रावधानों के तहत ही वैध हो सकती है। ‘बधाई’ या ‘जजमानी’ के नाम पर धन वसूलने की कोई कानूनी मान्यता नहीं है।

बेंच ने स्पष्ट किया कि किसी भी नागरिक से जबरन या किसी भी प्रकार से धन वसूली की अनुमति नहीं दी जा सकती। कोर्ट ने कहा कि किसी व्यक्ति को केवल वही भुगतान करने के लिए बाध्य किया जा सकता है, जिसे कानून द्वारा मान्यता प्राप्त हो। अदालत ने यह भी उल्लेख किया कि ट्रांसजेंडर व्यक्ति (अधिकारों का संरक्षण) अधिनियम, 2019 में ऐसे किसी विशेष अधिकार का प्रावधान नहीं है, जो इस तरह की वसूली को कानूनी समर्थन दे।

नेग मांगना माना जा सकता है अपराध

लखनऊ बेंच ने कहा कि यदि इस तरह की याचिकाओं को स्वीकार किया जाए तो यह अवैध वसूली को वैधता देने जैसा होगा, जिससे कानून-व्यवस्था पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है। साथ ही, अदालत ने संकेत दिया कि इस प्रकार की गतिविधियां भारतीय न्याय संहिता के तहत दंडनीय भी हो सकती हैं।

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