योगी आदित्यनाथ, अखिलेश यादव (फोटो- सोशल मीडिया) 
उत्तर प्रदेश

योगी आदित्यनाथ ने महाकुंभ के लिए मोड़ दी गंगा की धारा, भड़के अखिलेश यादव ने कहा- ये अपराध है

उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में महाकुंभ मेले के आयोजन का प्रचीन इतिहास है। एक बार फिर 13 जनवरी से महाकुंभ की शुरूआत होने जा रही है, लेकिन इस बार संगम का नजारा कुछ बदला-बदला सा है।

Saurabh Pal

प्रयागराजः उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में महाकुंभ मेले के आयोजन का प्रचीन इतिहास है। एक बार फिर 13 जनवरी से महाकुंभ की शुरूआत होने जा रही है, लेकिन इस बार संगम का नजारा कुछ बदला-बदला सा है। इसके साथ संगम का क्षेत्रफल भी बढ़ गया है। दुनिया के सबसे बड़े धार्मिक आयोजन के व्यवस्थाओं की मॉनिटरिंग स्वयं मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ कर रहे हैं। महाकुंभ 2025 को सीएम योगी ऐतिहासिक बनाने के संकल्प के साथ व्यवस्थाओं में लगे हुए हैं।

प्रयागराज में गंगा नदी की औसत चौड़ाई 1.5 किलोमीटर है।  आप अगर कभी संगम आए होंगे, तो देखा होगा कि गंगा तीन धाराओं से होकर संगम तक पहुंचती है। गंगा के बीच में ही टापू बन जाते हैं। अब तक इसका कोई इस्तेमाल नहीं हो पाता था। इस बार कई डेल्टा गायब कर दिए गए हैं। IIT गुहावटी की मदद से सिंचाई विभाग ने एक प्लान बनाया, जिसके तहत गंगा की धारा मोड़ दी गई। समुद्र में चलने वाली ड्रेजर मशीन की मदद से यह संभव हो पाया है।

गंगा की धारा बदली तो भड़क गए अखिलेश

वहीं अब गंगा नदी की धारा बदलने को लेकर पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव उत्तर प्रदेश सरकार पर हमलावर हो गए। उन्होंने सोशल मीडिया एक्स पर लिखा कि "इतिहास गवाह रहा है कि नदियाँ अपने मार्ग को स्वयं बनाकर चलती हैं। ये प्राकृतिक बहाव नदियों की निरंतरता के लिए, अपने आप बनाया हुआ रास्ता होता है। इस भौगोलिक सत्य को स्वीकार करते हुए, नदियों के बहाव से छेड़छाड़ करना पर्यावरणीय अपराध है।"

"प्रयागराज महाकुंभ में गंगा जी में ड्रेजर मशीन लगाने का मक़सद केवल अपने लोगों को ठेका देना और उनके ज़रिए भ्रष्टाचार से पैसा कमाना है। नदियाँ किस जगह आकर मिलेंगी, ये प्रकृति पर छोड़ देना चाहिए, उसके लिए मनमानी करना और ज़बरदस्ती करके बहाव को बदलना अनुचित भी है और अवांछनीय भी। ऐसा करने से गंगा जी के जल-जीव-जंतु की जैविकी और प्राकृतिक पारिस्थितिक संतुलन पर बुरा असर होगा।"

गंगा में खुदाई करती हुई मशीनें

तीन धाराओं को कर दिया एक

दैनिक भाष्कर की रिपोर्ट के मुताबिक गंगा की तीन धराएं पहले संगम में मिलती थी, लेकिन तीनों धराओं को अब एक कर दिया गया है। इससे मेला क्षेत्र भी करीब 87 बीघा बढ़ गया है। इसे मेले में यूज किया जाएगा और संगम क्षेत्र की यह सबसे प्राइम लोकेशन है। गंगा की धारा को एक करने के लिए बड़ी संख्या जेसीबी और कई ड्रेजर मशीनों को लगाया। ड्रेजर मशीनें एक घंटे में करीब 600 लीटर डीजल खाती है।

ड्रेजर मशीन के चालक ने दैनिक भाष्कर से बातचीत करते हुए बताया कि इन मशीनों का समुद्र में उपयोग किया जाता है। कई बार बड़े-बड़े समुद्री जहाज कम पानी की वजह से मिट्टी में जम जाते हैं। तब पानी फंसे जहाजों को निकाले के लिए वहां मिट्टी हटाने का काम ड्रेजर मशीन करती है।

बिना नाम लिए योगी आदित्यनाथ पर हमला

ऐसा माना जाता है कि प्रयागराज में तीन नदियों का संगम है, इसीलिए इसे त्रिवेणी भी कहा जाता है। संगम स्थल पर गंगा और यमुना की धराएं तो मिलती हुई दिखती है, लेकिन तीसरी नदी सरस्वती नहीं दिखती हैं। इस स्थान का बहुत ही धार्मिक महत्व है। इसका पुराणों में भी जिक्र है। ऐसे में गंगा की प्राकृतिक धारा को मोड़ने के लिए योगी आदित्यनाथ का नाम लिए बिना अखिलेश यादव ने उनपर निशाना साधा है।

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