अखिलेश यादव, पूजा पाल (फोटो-सोशल मीडिया) 
उत्तर प्रदेश

पूजा पाल पर एक्शन का 2027 से कनेक्शन, सपा को सेफ जोन में ले जा रहे अखिलेश

Pooja PaL News: अखिलेश यादव जिस पीडीए के फॉर्मूले से 2027 में सत्ता हथियाने का सपना संजोए हैं, उसी पीडीए से संबंध रखने वाली विधायक पूजा पाल पर एक्श से सियासत गर्म हो गई है। जानें इसके पीछे का गणित

Saurabh Pal

UP News: उत्तर प्रदेश की सियासत में पूजा पाल का सपा से निष्कासन से चर्चा का विषय बन गया है, लेकिन इस एक्शन के कई मायने निकाले जा रहे हैं। राजनीतिक जानकारों के अनुसार का अखिलेश यादव ने सीधा संदेश दिया है कि 2027 के चुनाव में वे किसी प्रकार जोखिम नहीं उठाना चाहते हैं। उत्तर प्रदेश में पिछले 10 सालों से सत्ता के लिए सपा संघर्ष कर रही है। अगर अबकी बार सरकार नहीं बनी तो संघर्ष बहुत लंबा हो जाएगा। जो पार्टी के लिए बिल्कुल ठीक नहीं है।

जानकार बताते हैं कि सपा विधायक पूजा पाल ने राज्यसभा चुनाव के दौरान क्रॉस वोटिंग करके पार्टी के अनुशासन को तोड़ा था, लेकिन सपा मुखिया ने उसे नजरअंदाज कर उनको पार्टी में बरकरार रखा था। इसके बाद सत्र के दौरान पूजा पाल ने योगी सरकार के कसीदे पढ़कर दूसरी बड़ी गलती की, जिसे सपा प्रमुख ने बर्दाश्त नहीं किया और उन्हें पार्टी से निकाल दिया। हालांकि बताया जा रहा है कि पूजा पाल को अखिलेश ने राज्यसभा क्रॉस वोटिंग के बाद से ही निष्कासित सूची में डाल रखा था। बस उनको मौके का इंतजार था।

सभी को पता है राजू पाल की हत्या की कहानी

विधानसभा सत्र में विजन डॉक्यूमेंट पर चर्चा के दौरान पूजा ने कहा कि सभी को पता है उनके पति राजू पाल की हत्या कैसे और किसने की थी। ऐसे कठिन समय में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने उनकी बात सुनी और न्याय दिलाया। मुख्यमंत्री ने प्रयागराज में मुझ जैसी कई महिलाओं को न्याय दिलाया और अपराधियों को दंड दिया। आज पूरा प्रदेश मुख्यमंत्री की ओर विश्वास से देखता है। मेरे पति के हत्यारे अतीक अहमद को मुख्यमंत्री ने अपने वादे के अनुसार मिट्टी में मिलाने का काम किया।

पूजा पाल को पहली बार कर दिया था माफ दूसरी बार कर दिया साफ

इस बयान के बाद ही सपा ने उन्हें पार्टी से निकाल दिया। वरिष्ठ राजनीतिक विश्लेषक राजीव श्रीवास्तव कहते हैं कि पूजा पाल ने जिस प्रकार से सदन में भाजपा सरकार की तारीफ की है, वह लक्ष्मण रेखा पार करने जैसा था। ऐसे में सपा के पास कोई और विकल्प नहीं था। अब तक सपा ने जितने भी एक्शन किए हैं, चाहे विधायक राकेश प्रताप हों, मनोज पाण्डेय हों, या अभय सिंह हों, यह सभी अपर कास्ट के थे। पूजा पाल ने भी क्रॉस वोट किया, लेकिन उनके खिलाफ एक्शन नहीं हुआ। शायद पीडीए से थीं, यही कारण होगा।

'PDA दे सकता है भाजपा को पटखनी'

राजीव श्रीवास्तव आगे कहते हैं कि अब विधानसभा चुनाव आ रहा है, इसलिए अखिलेश अब कोई रिस्क नहीं लेना चाहते हैं। वो पार्टी में समर्पित लोग ही चाहते हैं जिन पर कोई संदेह न हो। अब देखना है कि अभी क्रॉस वोटिंग वाले जो बचे, उन पर क्या एक्शन होगा। क्योंकि अभी बुंदेलखंड के बागी विधायक विनोद चतुर्वेदी बचे हैं जिन पर कोई एक्शन नहीं हुआ है। हालांकि वह भी अभी शांत हैं। सपा 2027 की तैयारी में है। वो चाहती है कि पार्टी में अवसरवादियों की जगह वहीं लोग रहें जो पूर्णतया सपा के प्रति समर्पित हों। उन्होंने कहा कि अखिलेश को लगता है कि वह पीडीए के फॉर्मूले से भाजपा को पटखनी दे सकते हैं। लिहाजा वह हर कदम ठोक बजाकर उठा रहे हैं।

'बिजमा यादव को नहीं मिला योगी सरकार में न्याय'

सपा के प्रदेश प्रवक्ता अशोक यादव का कहना है कि पूजा पाल बार-बार कहती हैं कि मुझे न्याय मुख्यमंत्री ने दिया है। जबकि हमारी विधायक बिजमा यादव अभी भी न्याय के लिए भटक रही है। पूजा पाल को मिला न्याय नैसर्गिक नहीं है। योगी सरकार का हर कदम पीडीए के खिलाफ है। यह पार्टी विरोधी गतिविधियों में शामिल रही। लगातार उसे आगे बढ़ाती रही है। ऐसे में उन पर उठाया गया कदम बिल्कुल ठीक है।

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