UGC Rollback Movement Agra: जंतर-मंतर नई दिल्ली से शुरू हुआ सामान्य वर्ग का UGC रोलबैक आंदोलन अब धीरे-धीरे देशभर में पैर पसारता नजर आ रहा है। उत्तर प्रदेश में भी आंदोलन की गूंज सुनाई देने लगी है। ताजनगरी आगरा में आंदोलनकारी अलग-अलग कस्बों और तहसीलों में सरकार के खिलाफ आवाज बुलंद कर रहे हैं। एत्मादपुर क्षेत्र की रामी गाड़ी में 6 सितंबर से शुरू हुआ अनिश्चितकालीन धरना प्रदर्शन तीसरे दिन भी जारी रहा। धरने में आगरा के अलावा बाहरी जनपदों से भी लोग समर्थन देने पहुंच रहे हैं।
धरना स्थल पर प्रदर्शनकारियों ने हाथों में शक्तियां लेकर UGC के खिलाफ विरोध जताया और सरकार से कथित विवादित प्रावधानों को वापस लेने की मांग की।
नवभारत से विशेष बातचीत में कार्यक्रम संयोजक आयुष्मान भारद्वाज ने UGC को ‘काला कानून’ बताते हुए कहा कि इससे सामान्य वर्ग के छात्रों के भविष्य पर प्रतिकूल असर पड़ेगा। उन्होंने कहा कि आंदोलन का उद्देश्य छात्रों के बीच समानता और देश में सामाजिक समरसता स्थापित करना है। किसी भी छात्र या नागरिक के साथ जाति के आधार पर भेदभाव नहीं होना चाहिए।
आयुष्मान भारद्वाज ने भाजपा सरकार पर समाज को बांटने की राजनीति करने का आरोप लगाते हुए कहा कि भाजपा हिंदुत्व की बात करती है, लेकिन अब हिंदुओं को ही बांटने का काम किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि ऐसी दोहरी राजनीति अब स्वीकार नहीं की जाएगी।
उन्होंने कहा कि जब कोई नौजवान पहली बार विश्वविद्यालय या कॉलेज में प्रवेश लेने जाए और उसे लगे कि उसकी पहचान अथवा जाति के आधार पर उसके साथ व्यवहार किया जा रहा है तो उसके मानसिक दबाव का अंदाजा लगाया जा सकता है। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि शिक्षण संस्थान युवाओं को आगे बढ़ाने और रोजगार के अवसर देने के बजाय जातिगत आधार पर विभाजन का माध्यम बनाए जा रहे हैं।
धरने में शामिल छात्रों और वक्ताओं ने भी भाजपा पर युवाओं को जाति और धर्म के नाम पर बांटने का आरोप लगाया। प्रदर्शनकारियों ने कहा कि 1990 के दशक से 2014 तक सामान्य वर्ग के बड़े हिस्से ने भाजपा को इस उम्मीद के साथ समर्थन दिया कि देश में समानता और विकास को बढ़ावा मिलेगा, लेकिन अब उन्हें अपने साथ राजनीतिक उपेक्षा महसूस हो रही है।
आंदोलनकारियों ने 18 सितंबर को आगरा जिला मुख्यालय की ओर बड़े कूच का ऐलान किया है। उनका दावा है कि इसके लिए गांव-गांव जनसंपर्क अभियान चलाया जा रहा है और बड़ी संख्या में लोगों को जुटाने की तैयारी है। प्रदर्शनकारियों ने 5,000 ट्रैक्टरों के साथ करीब 50,000 लोगों के जिला मुख्यालय पहुंचने का दावा किया है।
आंदोलनकारियों का कहना है कि यह सिर्फ किसी एक वर्ग का आंदोलन नहीं, बल्कि शिक्षा व्यवस्था में समानता, निष्पक्षता और सामाजिक समरसता की मांग को लेकर संघर्ष है। अब देखना होगा कि आगरा से उठी यह आवाज आने वाले दिनों में कितना बड़ा आंदोलन खड़ा करती है और सरकार इस पर क्या रुख अपनाती है।