Agra Taj Mahal Tourist Scam: ताजमहल की सुरक्षा और पर्यटकों की सुविधा के लिए व्यवस्थाओं में लगातार सुधार के दावे किए जा रहे हैं, वहीं स्मारक के बाहर विदेशी मेहमानों को कथित तौर पर गुमराह करने का मामला सामने आने से एक बार फिर पर्यटन व्यवस्था सवालों के घेरे में है। खास बात यह है कि आगरा पुलिस कमिश्नरेट की ओर से गठित पर्यटन पुलिस पहले से ही ताजमहल और अन्य पर्यटन स्थलों के आसपास सक्रिय कथित लपकों के खिलाफ अभियान चला रही है। इसके बावजूद विदेशी पर्यटकों के साथ कथित ठगी का मामला सामने आना अभियान की कार्रवाई और कार्यशैली पर सवाल खड़े कर रहा है।
मामला सोशल मीडिया पर वायरल हुए एक वीडियो के बाद सामने आया। ताजमहल देखने आगरा पहुंचे विदेशी कपल ने स्मारक की खूबसूरती की तारीफ की, लेकिन ताजमहल के बाहर अपने अनुभव को लेकर नाराजगी जताई। वीडियो में पर्यटकों की ओर से कथित स्कैम का जिक्र भी किया गया।
पर्यटन पुलिस के मुताबिक जांच में मोहम्मद शादाब और दिनेश नाम के दो लोगों की भूमिका सामने आई। आरोप है कि पश्चिमी गेट के पास दोनों ने विदेशी पर्यटकों को सामान्य कतार से अलग रास्ते से जल्द ताजमहल में प्रवेश दिलाने की बात कही और इसके बदले अतिरिक्त रकम मांगी। खुद को सरकारी व्यवस्था से जुड़ा बताकर पर्यटकों को गुमराह करने का भी आरोप है।
वायरल वीडियो का संज्ञान लेने के बाद पर्यटन पुलिस ने जांच की और मोहम्मद शादाब को गिरफ्तार कर लिया। दूसरे आरोपी दिनेश की भी तलाश की जा रही है। पुलिस के मुताबिक दोनों के खिलाफ वैधानिक कार्रवाई के साथ पर्यटन विभाग को रिपोर्ट भेजी जा रही है, ताकि संबंधित गाइड लाइसेंस निरस्त कराने की कार्रवाई की जा सके।
आगरा पुलिस कमिश्नरेट ने पर्यटकों की परेशानियों को दूर करने, उन्हें सुरक्षित और सुविधाजनक पर्यटन अनुभव उपलब्ध कराने तथा ताजमहल और अन्य पुरातत्व स्मारकों में सक्रिय कथित लपकों पर अंकुश लगाने के लिए पर्यटन पुलिस का गठन किया था। इसके बाद समय-समय पर लपकों के खिलाफ अभियान भी चलाए जाते रहे हैं।
इसके बावजूद ताजमहल के बाहर विदेशी मेहमानों को कथित तौर पर लाइन से अलग प्रवेश का लालच देकर पैसे मांगने का मामला सामने आना कई सवाल खड़े करता है। सवाल यह भी है कि अभियान के बावजूद ऐसे लोग ताजमहल के आसपास बेखौफ होकर सक्रिय कैसे हैं? क्या कार्रवाई का असर सिर्फ अभियान और गिरफ्तारी तक सीमित है या इन गतिविधियों पर स्थायी अंकुश लगाने के लिए निगरानी तंत्र को और मजबूत करने की जरूरत है?
विदेशी पर्यटकों के साथ कथित छलावे का यह मामला सामने आने के बाद सबसे बड़ा सवाल यही है कि कार्रवाई के बावजूद ताजमहल के आसपास ऐसी गतिविधियां आखिर कैसे चल रही हैं। यदि कोई व्यक्ति खुद को सरकारी व्यवस्था से जुड़ा बताकर पर्यटकों को प्रभावित करता है तो इसकी पहचान और निगरानी की जिम्मेदारी तय व्यवस्था के तहत होनी चाहिए।
हालांकि किसी अधिकारी, कर्मचारी या अन्य व्यक्ति की मिलीभगत के संबंध में फिलहाल कोई पुष्ट तथ्य सामने नहीं आया है, लेकिन यह जरूर जांच का विषय है कि अभियान के बावजूद कथित लपकों को ताजमहल क्षेत्र में पर्यटकों तक पहुंच बनाने का मौका कैसे मिल रहा है।
ताजमहल देखने आने वाला विदेशी पर्यटक सिर्फ स्मारक की खूबसूरती लेकर नहीं लौटता, बल्कि आगरा की व्यवस्था और यहां मिले व्यवहार की पूरी तस्वीर भी अपने साथ लेकर जाता है। ऐसे में पर्यटकों से जुड़े कथित ठगी और गुमराह करने के मामले सीधे आगरा की पर्यटन छवि से जुड़ जाते हैं। इससे जहाँ आगरा के पर्यटन उद्योग का ग्राफ गिरता है बल्कि भारत की साख पर भी बट्ठा लगता है। देश की छवि धूमिल होती है।
फिलहाल एक आरोपी पुलिस की गिरफ्त में है और दूसरे की तलाश जारी है। पर्यटन विभाग को गाइड लाइसेंस निरस्त कराने के लिए रिपोर्ट भेजी जा रही है। अब असली चुनौती यह है कि कार्रवाई को केवल एक मामले तक सीमित रखने के बजाय ताजमहल क्षेत्र में सक्रिय कथित लपकों पर प्रभावी और लगातार निगरानी कैसे सुनिश्चित की जाए।