Agra Religious Conversion Network: ताजनगरी में कथित धर्मांतरण के नेटवर्क को लेकर पुलिस की जांच एक बार फिर गहराती दिखाई दे रही है। सैंया क्षेत्र में एक सभा के जरिए लोगों को जोड़ने और बीमारी व परेशानियां दूर करने के नाम पर प्रभावित करने के आरोपों की जांच कर रही आगरा पुलिस को पूछताछ में नेटवर्क के दूसरे राज्यों तक संपर्क होने के संकेत मिले हैं। पुलिस के मुताबिक, यह गिरोह कथित तौर पर गरीब और परेशान लोगों को निशाना बनाकर उनकी बीमारी ठीक करने, आर्थिक मदद और अन्य प्रलोभन देने के बाद धार्मिक रूप से प्रभावित करने की कोशिश करता था।
डीसीपी वेस्ट आदित्य कुमार के अनुसार पुलिस जांच अब केवल एक सभा तक सीमित नहीं है। पुलिस चंगाई सभा तक पहुंच चुकी है और पूछताछ के आधार पर नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की भूमिका खंगाली जा रही है। ताजा मामले में पुलिस ने चार लोगों को गिरफ्तार किया है। इनमें राजस्थान और आगरा से जुड़े लोग शामिल बताए गए हैं। सैंया के जोधापुरा गांव में हुई कार्रवाई में जयपुर निवासी विनीत वेदी, धौलपुर निवासी बंटू तथा आगरा निवासी मुखराज और प्रताप को पकड़े जाने की जानकारी सामने आई है।
पुलिस के मुताबिक, कार्रवाई उस समय हुई जब जन्मदिन मनाने के बहाने लोगों को एक स्थान पर एकत्र किया गया था। पुलिस को वहां राजस्थान के दो और आगरा के दो लोगों के अलावा महिलाओं का एक समूह भी मिला। पूछताछ में पुलिस को इस समूह के जरिए लोगों को जोड़ने और सभाएं आयोजित करने से संबंधित जानकारी मिली।
पुलिस का कहना है कि कथित नेटवर्क पहले किसी क्षेत्र में कुछ लोगों से संपर्क करता था। करीब 30 से 40 लोगों को जोड़ने के बाद आगे लोगों को जोड़ने और सभा आयोजित करने का प्रयास किया जाता था। बीमारी, पारिवारिक परेशानी और आर्थिक संकट जैसी समस्याओं को दूर करने का भरोसा दिए जाने की बात भी जांच में सामने आई है।
पुलिस अब कथित नेटवर्क के संपर्कों को आगरा से बाहर तक खंगाल रही है। जांच में राजस्थान, मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, पंजाब और बिहार से जुड़े लोगों के संपर्क सामने आने की बात कही जा रही है। पुलिस इन संपर्कों की वास्तविक भूमिका और नेटवर्क में उनकी जिम्मेदारी की जांच कर रही है।
पूछताछ में कथित तौर पर ईस्ट और वेस्ट ग्रुप का भी जिक्र सामने आया है। पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि इन समूहों में कौन-कौन लोग शामिल थे और अलग-अलग क्षेत्रों में लोगों को जोड़ने का काम किस स्तर पर किया जाता था।
जांच में पुलिस को कथित तौर पर ऐसे दस्तावेज भी मिले हैं, जिनमें सभाओं और उनसे जुड़े लोगों की संख्या का रिकॉर्ड दर्ज होने की बात कही जा रही है। पुलिस इस पहलू की भी जांच कर रही है कि चंगाई सभाओं की संख्या के आधार पर नेटवर्क से जुड़े लोगों को भुगतान किया जाता था या नहीं। दस्तावेज में 67,250 रुपये की एक प्रविष्टि मिलने का भी दावा किया जा रहा है।
इसके अलावा ऑनलाइन माध्यम से प्रशिक्षण दिए जाने की बात भी जांच के दायरे में है। पुलिस Zoom, Signal और IMO जैसे प्लेटफॉर्म के इस्तेमाल की जानकारी खंगाल रही है। ताजा मामले में सिग्नल ऐप के एक समूह में 200 से अधिक लोगों के जुड़े होने की जानकारी सामने आई है, जिनमें करीब 50 लोग आगरा के विभिन्न इलाकों से बताए गए हैं।
आगरा पुलिस अब गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ के आधार पर यह पता लगाने में जुटी है कि कथित नेटवर्क का संचालन कौन कर रहा था, इसकी फंडिंग कहां से होती थी, लोगों को प्रशिक्षण कौन देता था और अलग-अलग राज्यों में संपर्क कौन संभालता था।
पुलिस के मुताबिक, सैंया क्षेत्र में इस नेटवर्क की सक्रियता अपेक्षाकृत हाल की है, लेकिन पूछताछ में लंबे समय से लोगों को जोड़ने की गतिविधियों के संकेत मिले हैं। मुख्य आरोपी बताए जा रहे जयपुर निवासी विनीत वेदी के पुराने आपराधिक रिकॉर्ड की भी पुलिस जांच कर रही है।
आगरा पुलिस आयुक्त दीपक कुमार के नेतृत्व में पहले भी बड़े कथित धर्मांतरण मामले की जांच और कार्रवाई हो चुकी है। वर्ष 2025 में सामने आए उस मामले में कई गिरफ्तारियां हुई थीं और जांच में अन्य राज्यों तथा विदेशी फंडिंग से जुड़े आरोपों की भी पड़ताल की गई थी।
फिलहाल नए मामले में पुलिस की नजर फंडिंग, प्रशिक्षण, डिजिटल संपर्क और दूसरे राज्यों में सक्रिय नेटवर्क पर है। चार आरोपियों से पूछताछ के बाद पुलिस को और लोगों की भूमिका सामने आने की उम्मीद है। हालांकि, कथित नेटवर्क के आकार और उसके दूसरे राज्यों में फैलाव को लेकर अंतिम तस्वीर जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होगी।