Agra Railway Overbridge: भारतीय रेल देश की लाइफलाइन ही नहीं, बल्कि करोड़ों यात्रियों के भरोसे का प्रतीक भी है। पिछले एक दशक में रेलवे के इंफ्रास्ट्रक्चर के विस्तार, नई रेल लाइनों और आधुनिक सुविधाओं पर तेजी से काम हुआ है। लेकिन इसी विकास के बीच आगरा में रेलवे की व्यवस्थाओं से जुड़ी कुछ तस्वीरें चिंता बढ़ाने वाली हैं।
आगरा में रेलवे से जुड़े कई मामले हाल के दिनों में चर्चा में रहे हैं। इसी बीच नवभारत की टीम ने खेरिया मोड़ और ईदगाह बस अड्डे के बीच बने रेलवे ओवरब्रिज की जमीनी हकीकत सामने लाने का प्रयास किया है। रेलवे और लोक निर्माण विभाग से जुड़े इस ओवरब्रिज का रेलवे वाला हिस्सा रेलवे के अधीन है, जबकि सड़क से संबंधित हिस्सा लोक निर्माण विभाग से जुड़ा है।
स्थानीय जानकारी के मुताबिक, ईदगाह-खेरिया मोड़ के बीच बना यह रेलवे ओवरब्रिज करीब 1963-64 के दौरान तैयार किया गया था। यानी इसके निर्माण को छह दशक से भी अधिक समय बीत चुका है। इतने लंबे समय के बाद भी पुल के पुराने हिस्सों के व्यापक कायाकल्प और संरचनात्मक मजबूती को लेकर सवाल उठ रहे हैं।
मौके की तस्वीरों में रेलवे वाले हिस्से में कई जगह सरिया बाहर निकली हुई दिखाई दे रही हैं और पुल के कुछ हिस्से जर्जर नजर आ रहे हैं। हालांकि पुल की वास्तविक संरचनात्मक स्थिति का आकलन तकनीकी विशेषज्ञों की जांच के बाद ही किया जा सकता है, लेकिन मौजूदा तस्वीरें तत्काल निरीक्षण और आवश्यक मरम्मत की जरूरत जरूर दिखाती हैं।
इस समय रुई की मंडी, बाराखंभा और नगला छउआ क्षेत्र में ROB निर्माण कार्य चल रहा है। इन निर्माण कार्यों के कारण कई मार्गों पर यातायात डायवर्ट किया गया है। इसका सीधा असर ईदगाह-खेरिया मोड़ ROB पर भी दिखाई दे रहा है।
ट्रैफिक डायवर्जन के चलते इस पुल पर वाहनों का दबाव बढ़ गया है। रोजाना बड़ी संख्या में वाहन यहां से गुजर रहे हैं और लोगों को जाम की समस्या से जूझना पड़ रहा है। ऐसे में पुराने पुल पर बढ़ता यातायात दबाव उसकी सुरक्षा को लेकर चिंता और बढ़ा देता है।
सबसे अहम सवाल यह है कि इस पुल पर भारी वाहनों का प्रवेश प्रतिबंधित बताया जाता है, इसके बावजूद बड़ी संख्या में भारी वाहन यहां से गुजरते दिखाई देते हैं।
भारी वाहनों की लगातार आवाजाही और बढ़ते ट्रैफिक के बीच पुल के जर्जर हिस्से चिंता बढ़ा रहे हैं। यदि पुल की भार क्षमता और मौजूदा स्थिति को लेकर समय रहते तकनीकी जांच नहीं कराई गई तो किसी बड़े हादसे की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता।
इस ओवरब्रिज के नीचे से प्रतिदिन बड़ी संख्या में ट्रेनों का आवागमन होता है, जबकि ऊपर से हजारों लोग और वाहन गुजरते हैं। पुल की मौजूदा स्थिति को देखते हुए सवाल उठता है कि रेलवे प्रशासन और संबंधित विभाग इसकी नियमित तकनीकी निगरानी कितनी गंभीरता से कर रहे हैं।
आगरा उत्तर मध्य रेलवे का महत्वपूर्ण केंद्र होने के साथ ही देश-दुनिया के पर्यटकों के लिए प्रमुख पर्यटन नगरी है। ताजमहल समेत शहर के प्रमुख पर्यटन स्थलों की ओर जाने वाले लोगों के लिए भी यह मार्ग महत्वपूर्ण है।
बताया जाता है कि G-20 सम्मेलन के दौरान इस ओवरब्रिज का सौंदर्यीकरण और मरम्मत कार्य कराया गया था। इसके बावजूद वर्तमान में पुल के कुछ हिस्सों की जर्जर स्थिति रखरखाव को लेकर सवाल खड़े करती है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि पुराने पुल की नियमित तकनीकी जांच, भार क्षमता का परीक्षण और समय-समय पर मरम्मत होती रहे तो संभावित खतरे को समय रहते टाला जा सकता है।
रेलवे के विकास और आधुनिक सुविधाओं के बीच छह दशक से अधिक पुराने इस ओवरब्रिज की स्थिति पर गंभीरता से ध्यान देने की जरूरत है। पुल पर बढ़ते ट्रैफिक, भारी वाहनों की आवाजाही और मौजूदा जर्जर हिस्सों को देखते हुए इसकी तकनीकी जांच महत्वपूर्ण हो जाती है।
हालांकि पुल की वास्तविक मजबूती और संरचनात्मक सुरक्षा का आकलन तकनीकी विशेषज्ञ ही कर सकते हैं, लेकिन मौके की तस्वीरें तत्काल निरीक्षण की जरूरत जरूर बता रही हैं। जिससे किसी बड़े हादसे से पहले रेलवे जाग जाए।
अब सवाल यह है कि रेलवे और लोक निर्माण विभाग कब संयुक्त रूप से इस पुल की तकनीकी जांच कराएंगे? कब इसकी भार क्षमता और संरचनात्मक स्थिति का परीक्षण होगा? और कब इसका व्यापक जीर्णोद्धार शुरू होगा?
किसी हादसे के बाद जिम्मेदारी तय करने से बेहतर है कि समय रहते पुल की स्थिति का आकलन कर जरूरी कदम उठाए जाएं। उद्देश्य किसी विभाग को कठघरे में खड़ा करना नहीं, बल्कि हजारों यात्रियों, राहगीरों और वाहन चालकों की सुरक्षा सुनिश्चित करना और संभावित हादसे को पहले ही रोकना है।