भाजपा विधायक छोटेलाल वर्मा  (सोर्स- सोशल मीडिया
आगरा

फतेहाबाद की सियासत का एक अध्याय खत्म, जानें चार बार विधायक रहे छोटेलाल वर्मा का पूरा राजनीतिक सफर

BJP MLA Dies: फतेहाबाद से भाजपा विधायक छोटेलाल वर्मा का कल रात निधन हो गया। दो दिन से बुखार के बाद तबीयत बिगड़ी और नोएडा के यथार्थ अस्पताल में उपचार के दौरान उनकी मौत हुई। वह चार बार विधायक रहे।

प्रदीप कुमार रावत, स्निग्धा श्रीवास्तव

BJP MLA Chhotelal Verma Dies: फतेहाबाद विधानसभा क्षेत्र से भाजपा विधायक छोटेलाल वर्मा का गुरुवार शाम निधन हो गया। पिछले दो दिनों से बुखार से पीड़ित विधायक की तबीयत अचानक बिगड़ने के बाद उन्हें आगरा के राजपुर चुंगी स्थित निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया था। उपचार के बावजूद हालत में सुधार नहीं हुआ। गुरुवार शाम परिजन उन्हें बेहतर उपचार के लिए दिल्ली ले जा रहे थे, लेकिन रास्ते में तबीयत ज्यादा बिगड़ने पर नोएडा के यथार्थ अस्पताल में भर्ती कराया गया। यहां उपचार के दौरान उन्होंने अंतिम सांस ली।

विधायक के निधन की जानकारी सामने आते ही फतेहाबाद विधानसभा क्षेत्र से लेकर आगरा के राजनीतिक गलियारों तक शोक की लहर दौड़ गई। भाजपा कार्यकर्ताओं, समर्थकों और उनके परिचितों में शोक का माहौल है।

छोटेलाल वर्मा का राजनीतिक सफर करीब तीन दशक लंबा रहा। वह फतेहाबाद की राजनीति में ऐसे नेताओं में रहे, जिन्होंने अलग-अलग राजनीतिक परिस्थितियों में अलग-अलग दलों के साथ अपना सियासी सफर तय किया और कई बार विधानसभा पहुंचे।

1993 में भाजपा से शुरू हुआ सियासी सफर

छोटेलाल वर्मा ने वर्ष 1993 में पहली बार भाजपा के टिकट पर फतेहाबाद विधानसभा सीट से चुनाव जीतकर उत्तर प्रदेश विधानसभा में प्रवेश किया। इसके बाद वर्ष 2002 में उन्होंने भाजपा के टिकट पर दूसरी बार जीत दर्ज की। विधानसभा के आधिकारिक रिकॉर्ड में भी उनके 1993 और 2002 के कार्यकाल दर्ज हैं।

इसके बाद उनकी राजनीति ने करवट ली। वर्ष 2012 में उन्होंने बहुजन समाज पार्टी के टिकट पर फतेहाबाद से चुनाव लड़ा और जीत दर्ज कर तीसरी बार विधायक बने। इस दौर में उनकी राजनीतिक निष्ठा और बदलते दलों को लेकर भी चर्चा होती रही। 2012 के बाद उनकी सपा से नजदीकी की खबरें भी सामने आईं, हालांकि राजनीतिक परिस्थितियों के बीच उन्होंने औपचारिक रूप से सपा की सदस्यता नहीं ली थी।

भाजपा में वापसी और 2022 में चौथी जीत

इसके बाद छोटेलाल वर्मा ने फिर भाजपा का रुख किया। वर्ष 2022 के विधानसभा चुनाव में उन्होंने भाजपा प्रत्याशी के रूप में फतेहाबाद सीट से जीत हासिल की। यह उनकी विधानसभा में चौथी जीत थी। उपलब्ध चुनावी परिणामों के मुताबिक उन्होंने सपा प्रत्याशी रूपाली दीक्षित को पराजित किया था।

छोटेलाल वर्मा का राजनीतिक सफर.. विधानसभा रिकॉर्ड और चुनावी विवरण के अनुसार 1993, 2002, 2012 और 2022—चार बार वह फतेहाबाद से विधायक निर्वाचित हुए।

राजनीतिक सफर के साथ विवाद भी जुड़े

लंबे राजनीतिक जीवन के दौरान छोटेलाल वर्मा का नाम कई बार विवादों में भी आया। इनमें सबसे चर्चित मामला सितंबर 2022 का पारिवारिक और आपराधिक मुकदमा था।

आगरा पुलिस ने एक महिला की शिकायत के आधार पर छोटेलाल वर्मा और उनके बेटे लक्ष्मीकांत वर्मा के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया था। महिला ने लक्ष्मीकांत वर्मा पर दुष्कर्म, मारपीट, धमकी, जबरन गर्भपात और दूसरी शादी से जुड़े गंभीर आरोप लगाए थे। रिपोर्टों के अनुसार मुकदमे में आईपीसी की धारा 376, 313, 323, 504, 506, 494 और 328 लगाई गई थीं।

हालांकि इस मामले में दुष्कर्म का आरोप विधायक पर नहीं, उनके बेटे पर था। तत्कालीन पुलिस अधिकारी के अनुसार विधायक के खिलाफ महिला को कथित तौर पर परेशान करने से संबंधित आरोपों पर कार्रवाई हुई थी, जबकि दुष्कर्म का आरोप उनके बेटे पर था।

विधायक छोटेलाल वर्मा ने इस पूरे प्रकरण से खुद को अलग बताया था। वहीं उनके बेटे ने भी महिला द्वारा लगाए गए आरोपों को खारिज किया था और इसे पारिवारिक विवाद तथा संपत्ति से जुड़ा मामला बताया था।

बिजली विभाग के दफ्तर में धरने से भी चर्चा में आए

छोटेलाल वर्मा का अंदाज कई बार बेहद मुखर भी नजर आया। मार्च 2025 में संविदा कर्मचारियों को हटाए जाने के विरोध में वह बिजली विभाग के कार्यालय में जमीन पर बैठ गए थे। इस दौरान उन्होंने अधिकारियों पर सवाल उठाए और भ्रष्टाचार की शिकायत मुख्यमंत्री से करने की बात कही थी। घटना का वीडियो भी सामने आया था।

उनका यह कदम क्षेत्र में चर्चा का विषय बना था और विधायक तथा अधिकारियों के बीच सार्वजनिक रूप से तीखी स्थिति देखने को मिली थी।

निधन से कुछ समय पहले भी कार्यक्रम में दिखी नाराजगी

वर्ष 2026 में रविदास जयंती के एक कार्यक्रम के दौरान मंच से बोलने का मौका नहीं मिलने पर उनकी नाराजगी भी सार्वजनिक रूप से सामने आई थी। रिपोर्ट के अनुसार उन्होंने मंच से अपनी नाराजगी जाहिर करते हुए आयोजकों से सवाल किया था कि जब बोलने नहीं देना था तो बुलाया क्यों गया।

यह घटनाक्रम बताता है कि अपने राजनीतिक जीवन के अंतिम दौर तक छोटेलाल वर्मा क्षेत्रीय राजनीति में सक्रिय और मुखर बने रहे।

विधानसभा की समितियों में भी निभाई जिम्मेदारी

छोटेलाल वर्मा केवल चुनावी राजनीति तक सीमित नहीं रहे। विधानसभा रिकॉर्ड के अनुसार वह अलग-अलग समितियों में भी सदस्य रहे। वर्ष 1994-95 में वह प्राक्कलन समिति से जुड़े रहे। वर्ष 2002-03 में याचिका समिति और वर्ष 2012-13 में सार्वजनिक उपक्रम एवं निगम संबंधी संयुक्त समिति के सदस्य रहे।

छोटे लाला वर्मा का जन्म 7 जुलाई 1953 को आगरा के नगला देवहंस में हुआ। उनका स्थायी राजनीतिक आधार फतेहाबाद क्षेत्र रहा और लंबे समय तक उन्होंने इसी विधानसभा की राजनीति में सक्रिय भूमिका निभाई।

फतेहाबाद की राजनीति में छोड़ी अलग पहचान

छोटेलाल वर्मा की राजनीतिक यात्रा सीधी रेखा में नहीं रही। भाजपा से शुरुआत, बसपा के टिकट पर विधानसभा पहुंचना और फिर भाजपा में वापसी - उनके राजनीतिक सफर में कई मोड़ आए। अलग-अलग चुनावी परिस्थितियों में दल बदलने को लेकर उनकी राजनीति की चर्चा होती रही, लेकिन इसके बावजूद वह फतेहाबाद में अपनी राजनीतिक जमीन बनाए रखने में सफल रहे और चार बार विधानसभा पहुंचे।

अब उनके निधन के साथ फतेहाबाद की राजनीति का एक पुराना और चर्चित चेहरा हमेशा के लिए विदा हो गया। राजनीतिक उतार-चढ़ाव, चुनावी जीत, पार्टी परिवर्तन, विवाद और क्षेत्रीय सक्रियता- छोटेलाल वर्मा का करीब तीन दशक लंबा राजनीतिक सफर इन सभी पहलुओं से होकर गुजरा। छोटेलाल वर्मा किस उम्र में भी राजनीति में बेहद सक्रिय थे। उनके विरोधी भी उनके कायल हुआ करते थे। कई बार ऐसा भी सामने आया कि वह भाजपा के वरिष्ठ नेताओं के बीच ऐसा कुछ कह देते थे बगैर किसी लागलपेट के। एक बार वह मुखर हो जाए तो मंच से अच्छे अच्छो के पसीने छुड़ा दिया करते थे...

उनके निधन की खबर के बाद फतेहाबाद और आगरा में समर्थकों के बीच शोक की लहर है। अंतिम संस्कार और श्रद्धांजलि कार्यक्रम को लेकर परिवार की ओर से जानकारी का इंतजार किया जा रहा है।

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