Ajay Rai Gyanesh Kumar Resignation: उत्तर प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय शनिवार को आगरा पहुंचे तो उनका निशाना सीधे भाजपा और चुनाव आयोग पर रहा। उन्होंने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग करते हुए उनके नेतृत्व में अब तक कराए गए चुनावों को लेकर भी सवाल खड़े किए। अजय राय ने कहा कि जिन चुनावों को लेकर कांग्रेस लगातार सवाल उठाती रही है, उनकी निष्पक्षता की समीक्षा होनी चाहिए।
अजय राय ने आरोप लगाया कि चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली को लेकर विपक्ष की ओर से लगातार गंभीर सवाल उठाए जा रहे हैं। उन्होंने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग करते हुए कहा कि उनके नेतृत्व में हुए अब तक के सभी चुनावों की समीक्षा और जांच होनी चाहिए। साथ ही उन्होंने चुनाव आयुक्त के परिवार से जुड़े लोगों की पोस्टिंग को लेकर भी सवाल उठाए।
अजय राय का यह बयान ऐसे समय आया है जब कांग्रेस ने देशभर में मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ प्रदर्शन का अभियान चलाया है। 25 सितंबर को उत्तर प्रदेश में भी कांग्रेस नेताओं और कार्यकर्ताओं ने मुख्य निर्वाचन अधिकारी कार्यालय की ओर मार्च किया था, जिसके दौरान अजय राय समेत कई नेताओं को पुलिस ने हिरासत में लिया था।
आगामी उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव को लेकर गठबंधन और चुनावी रणनीति के सवाल पर अजय राय ने कहा कि कांग्रेस अपने दमखम पर चुनाव लड़ती है। उन्होंने साफ किया कि आगे की रणनीति को लेकर फैसला पार्टी का केंद्रीय नेतृत्व करेगा।
इस बयान को आगामी विधानसभा चुनाव की तैयारियों के बीच कांग्रेस की चुनावी रणनीति से जोड़कर देखा जा रहा है। हालांकि पार्टी की सीटों और गठबंधन को लेकर अंतिम फैसला केंद्रीय नेतृत्व द्वारा किए जाने की बात अजय राय ने कही।
आगरा पहुंचे कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष ने अयोध्या राम मंदिर चढ़ावा मामले को लेकर भी भाजपा पर कटाक्ष किया। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि “दूध की रखवाली बिल्ली को दे दी गई।”
कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा कि अयोध्या में राम मंदिर को मिले दान और चढ़ावे से जुड़े कथित चोरी के मामले की जांच SIT कर रही है। सुप्रीम कोर्ट में पेश जांच की जानकारी के मुताबिक मंदिर परिसर की CCTV फुटेज में चोरी की 105 कथित घटनाओं का उल्लेख सामने आया था। वहीं दाखिल चार्जशीट में आठ आरोपियों के नाम होने की जानकारी सामने आई है।
आगरा में अजय राय के बयान से साफ है कि कांग्रेस आगामी चुनावी माहौल में चुनाव आयोग की निष्पक्षता, मतदाता सूची और अयोध्या से जुड़े मुद्दों को राजनीतिक बहस के केंद्र में रखने की कोशिश कर रही है। दूसरी ओर, चुनाव आयोग और जांच एजेंसियों से जुड़े मामलों में अंतिम निष्कर्ष संबंधित जांच और कानूनी प्रक्रिया के आधार पर ही तय होंगे।