नई दिल्ली के जंतर-मंतर से UGC रोलबैक की मांग को लेकर उठी चिंगारी अब आगरा में आंदोलन का बड़ा रूप लेती दिखाई दे रही है। रविवार को पुलिस-प्रशासन की तमाम तैयारियों और अवरोधों के बावजूद हजारों की संख्या में प्रदर्शनकारी मुड़ी चौराहे पर पहुंच गए। आंदोलनकारियों के पहुंचने के साथ ही इलाके में तनाव और पुलिस की सक्रियता दोनों बढ़ गईं।
आंदोलन को रोकने के लिए पुलिस ने पहले से ही व्यापक तैयारियां की थीं। UGC रोलबैक आंदोलन का नेतृत्व कर रहे दर्जनों लोगों को नजरबंद कर दिया गया था। देहात क्षेत्र से आने वाले कई रास्तों को ब्लॉक किया गया और अलग-अलग स्थानों पर पुलिस बल, बैरिकेडिंग तथा भारी वाहनों के जरिए रास्ते रोकने की व्यवस्था की गई थी। प्रशासन की कोशिश थी कि प्रदर्शनकारी एक जगह एकत्र होकर जिला मुख्यालय की तरफ कूच न कर सकें।
लेकिन पुलिस की तमाम तैयारियों के बावजूद रविवार सुबह मुड़ी चौराहे पर प्रदर्शनकारियों का कारवां बढ़ता चला गया। हजारों की संख्या में युवा और ग्रामीण ट्रैक्टर-ट्रॉलियों के साथ यहां पहुंच गए। आंदोलनकारियों का कहना था कि उन्हें रोकने के लिए जितनी भी नाकेबंदी की गई, उसे पार करके वे अपनी आवाज सरकार तक पहुंचाएंगे।
करीब 11 बजे प्रदर्शनकारियों ने पैदल और ट्रैक्टर-ट्रॉलियों के साथ आगे बढ़ना शुरू किया। पुलिस ने उन्हें रोकने का प्रयास किया तो दोनों पक्षों के बीच टकराव की स्थिति पैदा हो गई। कई स्थानों पर जब मुख्य रास्तों पर पुलिस ने अवरोध खड़े कर दिए तो प्रदर्शनकारियों ने ट्रैक्टरों को खेतों की ओर मोड़ दिया और खेतों के रास्ते आगे बढ़ने लगे।
आंदोलनकारियों को रोकने के लिए पुलिस ने सड़कों पर जेसीबी और पुलिस वाहनों को खड़ा किया था। इसके बावजूद प्रदर्शनकारी आगे बढ़ने की कोशिश करते रहे। इस दौरान पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच कई बार धक्का-मुक्की और झड़प की स्थिति बनी।
मौके के सामने आए वीडियो को लेकर यह दावा किया जा रहा है कि कुछ प्रदर्शनकारियों ने पुलिसकर्मियों की ओर ट्रैक्टर बढ़ाने की कोशिश की। वायरल और उपलब्ध विजुअल्स में कुछ ट्रैक्टर पुलिस बल की दिशा में बढ़ते दिखाई दे रहे हैं। हालांकि इस घटनाक्रम की पूरी परिस्थितियों और यह स्पष्ट करने के लिए कि ट्रैक्टर जानबूझकर पुलिसकर्मियों को निशाना बनाकर चढ़ाने का प्रयास कर रहे थे या रास्ता बनाने की कोशिश में आगे बढ़े, आधिकारिक जांच और पूरे वीडियो फुटेज का परीक्षण महत्वपूर्ण होगा।
पुलिस की घेराबंदी के बावजूद प्रदर्शनकारियों का एक हिस्सा आगे बढ़ते हुए आगरा-नोएडा एक्सप्रेसवे तक पहुंच गया। यहां युवाओं ने सड़क पर बैठकर नारेबाजी की और करीब आधे घंटे तक हंगामा हुआ। इस दौरान यातायात प्रभावित हुआ और जाम की स्थिति बन गई।
हालांकि कुछ प्रदर्शनकारियों ने ही युवाओं को समझाया कि एक्सप्रेसवे पर जाम लगाने से आम लोगों को परेशानी होगी। इसके बाद यातायात खोल दिया गया। लेकिन आंदोलनकारियों ने सरकार को चेतावनी दी कि अगर उनकी मांग पर जल्द सुनवाई नहीं हुई तो आंदोलन को दिल्ली तक ले जाया जाएगा।
प्रदर्शनकारियों की ओर से यह भी चेतावनी दी गई कि जरूरत पड़ी तो दिल्ली पहुंचकर ट्रेनों को रोकने जैसे कदम उठाए जा सकते हैं।
इसके बाद कुछ प्रदर्शनकारी टेढ़ी बगिया और नाई की सराय की ओर बढ़े। यहां पुलिस ने उन्हें रोकने की कोशिश की। कई युवा ट्रैक्टरों पर सवार थे तो बड़ी संख्या में प्रदर्शनकारी सड़क पर नारेबाजी कर रहे थे।
इसी दौरान स्थिति तनावपूर्ण हो गई। मौके के कुछ वीडियो में पुलिसकर्मियों द्वारा लाठियां चलाते हुए दृश्य सामने आए हैं। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि पुलिस ने बल प्रयोग किया। वीडियो में भगदड़ और युवाओं के इधर-उधर भागने के दृश्य भी दिखाई दे रहे हैं।
वहीं पुलिस कमिश्नरेट की ओर से जारी प्रेस नोट में लाठीचार्ज और जाम लगाए जाने के आरोपों का खंडन किया गया है। ऐसे में पुलिस के दावे और मौके के वीडियो के बीच का अंतर भी चर्चा का विषय बना हुआ है।
मुड़ी चौराहे पर जुटे प्रदर्शनकारियों ने साफ शब्दों में कहा कि उन्हें रोकने के लिए पुलिस ने नेताओं को नजरबंद किया, रास्ते बंद किए और जगह-जगह अवरोध खड़े किए, लेकिन इसके बावजूद हजारों लोग यहां पहुंच गए।
आंदोलनकारियों ने भाजपा सरकार को चेतावनी देते हुए कहा कि यदि UGC रोलबैक की उनकी मांग पर अब भी ध्यान नहीं दिया गया तो आंदोलन को आगरा से दिल्ली तक ले जाया जाएगा।
18 सितंबर को भी बड़े आंदोलन का ऐलान किया गया था। उस समय पुलिस ने कई नेताओं को नजरबंद कर दिया था, जिसके चलते आंदोलन का असर सीमित रहा। लेकिन 20 सितंबर को हालात अलग दिखाई दिए। नेतृत्व पर अंकुश और रास्तों पर नाकेबंदी के बावजूद बड़ी संख्या में प्रदर्शनकारी मुड़ी चौराहे तक पहुंचने में सफल रहे।
अब इस पूरे घटनाक्रम पर आगरा पुलिस कमिश्नरेट के अगले कदम पर नजर है। खासतौर पर पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच हुए टकराव, ट्रैक्टरों के पुलिस की ओर बढ़ने और एक्सप्रेसवे पर यातायात प्रभावित होने के घटनाक्रम की जांच महत्वपूर्ण होगी।