Namner Market Janmashtami Festival: द्वापर युग में राक्षसों का नाश करने, सनातन धर्म की रक्षा करने और ऋषि-मुनियों पर हो रहे अत्याचारों का अंत करने के लिए प्रभु श्रीकृष्ण ने तमाम लीलाओं के साथ पृथ्वी पर अवतार लिया था। भगवान श्रीकृष्ण के जन्मोत्सव की परंपरा हजारों वर्षों से हर्षोल्लास और श्रद्धा के साथ मनाई जाती चली आ रही है। आगरा में भी जन्माष्टमी के तमाम आयोजन होते हैं, लेकिन नामनेर बाजार का कृष्ण जन्मोत्सव अपनी करीब पांच दशक पुरानी परंपरा और भव्यता के लिए अलग पहचान रखता है।
नामनेर चौराहे पर इस बार भी जन्माष्टमी महोत्सव का भव्य आयोजन होने जा रहा है। करीब 50 वर्ष पहले राधा-कृष्ण मंदिर में महज एक-दो झांकियों से शुरू हुई यह परंपरा आज विशाल उत्सव का रूप ले चुकी है। समय के साथ आयोजन इतना बड़ा हुआ कि नामनेर का जन्माष्टमी महोत्सव ब्रज क्षेत्र के प्रमुख आयोजनों में शुमार हो गया।
महोत्सव को लेकर नामनेर बाजार में तैयारियां जोर-शोर से चल रही हैं। स्वागत द्वार बनाए जा रहे हैं, झांकियों के लिए मंच तैयार किए जा रहे हैं और बाजार को आकर्षक ढंग से सजाया जा रहा है। बच्चों के मनोरंजन के लिए विभिन्न प्रकार के झूले भी लगाए जा रहे हैं।
रघु पंडित ने बताया कि करीब पांच दशक पहले उनके दादाजी ने राधा-कृष्ण मंदिर में एक झांकी के साथ जन्माष्टमी महोत्सव की शुरुआत की थी। उस समय छोटे स्तर पर शुरू हुआ आयोजन आज वृहद रूप ले चुका है। अब नामनेर बाजार कमेटी के अंतर्गत सभी व्यापारी और क्षेत्रवासी मिलकर इस महोत्सव का आयोजन करते हैं और इसमें अपना सहयोग देते हैं।
नामनेर बाजार कमेटी के अध्यक्ष बंटी बघेल ने बताया कि नामनेर बाजार का कृष्ण जन्मोत्सव ऐतिहासिक रहा है। एक समय ऐसा था जब इस महोत्सव को देखने के लिए धौलपुर, भरतपुर, इटावा, मैनपुरी, फिरोजाबाद और हाथरस तक से लोग पहुंचते थे। आसपास के जिलों के लोगों के लिए भी नामनेर का जन्माष्टमी महोत्सव खास आकर्षण का केंद्र हुआ करता था।
उन्होंने कहा कि समय बदलने के साथ उत्सव की रौनक में कुछ कमी जरूर आई है। आज हम 21वीं सदी में हैं और आधुनिक तकनीक ने लोगों के मनोरंजन का तरीका बदल दिया है। बंटी बघेल इसके लिए कहीं न कहीं टीवी और मोबाइल की बढ़ती भूमिका को भी जिम्मेदार मानते हैं। पहले लोग परिवार के साथ धार्मिक आयोजनों में पहुंचते थे, जबकि अब मनोरंजन के साधन घर-घर उपलब्ध हैं।
बंटी बघेल ने कहा कि इस बार कमेटी का प्रयास है कि बच्चों और युवा पीढ़ी को सनातनी संस्कृति से जोड़ा जाए। उन्हें यह बताया जाए कि प्रभु श्रीकृष्ण का जीवन केवल धार्मिक आस्था तक सीमित नहीं था, बल्कि उन्होंने अपनी लीलाओं और कर्मों के माध्यम से विश्व कल्याण का संदेश दिया। नई पीढ़ी अपनी संस्कृति, परंपराओं और संस्कारों को जाने और उन्हें आगे बढ़ाए, यही इस आयोजन का उद्देश्य है।
उन्होंने बताया कि महोत्सव के पहले दिन भगवान श्रीकृष्ण का डोला निकाला जाएगा। इसके बाद शाम को जन्माष्टमी मेले का उद्घाटन होगा। दूसरे दिन मेले का समापन किया जाएगा, जबकि तीसरे दिन भगवान श्रीकृष्ण की छठी पूजा का आयोजन होगा।
नामनेर का यह आयोजन अब सिर्फ एक धार्मिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि करीब पांच दशक की उस परंपरा का प्रतीक है, जिसने कई पीढ़ियों को एक साथ जोड़ा है। व्यापारियों, क्षेत्रवासियों और आयोजकों का प्रयास है कि आधुनिकता के दौर में भी जन्माष्टमी का यह उत्सव नई पीढ़ी को अपनी जड़ों और सनातन संस्कृति से जोड़े रखे।