Highlights:
सपा प्रत्याशी आकाश अग्रवाल की जीत ने खड़े किए सियासी सवाल
भाजपा के मजबूत राजनीतिक गढ़ में शिक्षक सीट गंवाना बना चर्चा का विषय
स्नातक सीट पर कमल ने बचाई प्रतिष्ठा
नवभारत से विशेष बातचीत में आकाश अग्रवाल बोले-मतगणना में धांधली की कोशिश
Agra Teachers MLC Election Results 2026: आगरा को भारतीय जनता पार्टी का मजबूत राजनीतिक किला माना जाता है। लोकसभा की दोनों सीटों पर भाजपा के सांसद, जिले की सभी नौ विधानसभा सीटों पर भाजपा के विधायक, महापौर और जिला पंचायत अध्यक्ष भी भाजपा से हैं। राज्यसभा में भी आगरा से जुड़े भाजपा नेताओं की मौजूदगी पार्टी की राजनीतिक ताकत को दर्शाती है। ऐसे में विधान परिषद की शिक्षक सीट पर समाजवादी पार्टी के प्रत्याशी डॉ.आकाश अग्रवाल की जीत ने स्थानीय राजनीति में नई चर्चा छेड़ दी है। भाजपा के लिए प्रतिष्ठा का सवाल बने इस चुनाव में शिक्षक सीट सपा के खाते में गई, जबकि स्नातक सीट पर भाजपा ने जीत दर्ज की।
आगरा में भाजपा की मजबूत राजनीतिक मौजूदगी के बीच एमएलसी चुनाव को 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले सेमीफाइनल बताने वाले नेताओं के दावों पर भी अब चर्चा हो रही है। चुनाव के दौरान भाजपा नेताओं ने जीत का भरोसा जताया था। लेकिन शिक्षक सीट पर डॉ. आकाश अग्रवाल ने भाजपा प्रत्याशी हरिकिशोर तिवारी को 4,263 मतों से हराकर बाजी पलट दी। दूसरी ओर, स्नातक सीट पर भाजपा के डॉ. मानवेंद्र प्रताप सिंह ‘गुरु जी’ ने सपा प्रत्याशी शशांक यादव को 8,856 मतों से पराजित किया। इस तरह दोनों प्रमुख दलों को एक-एक सीट मिली।
आगरा में भाजपा की राजनीतिक स्थिति को देखें तो पार्टी के पास सांसद प्रो. एसपी सिंह बघेल और फतेहपुर सीकरी के सांसद राजकुमार चाहर हैं। विधानसभा की सभी नौ सीटों पर भाजपा के विधायक हैं। महापौर और जिला पंचायत अध्यक्ष भी भाजपा से हैं। राज्यसभा में नवीन जैन और रामप्रताप सिंह चौहान का नाम भी पार्टी के प्रतिनिधित्व के संदर्भ में सामने आता है।
ऐसे राजनीतिक परिदृश्य में शिक्षक एमएलसी सीट का परिणाम भाजपा के लिए चर्चा का विषय बन गया है। हालांकि, शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र के मतदाता सामान्य विधानसभा या लोकसभा चुनाव के मतदाताओं से अलग होते हैं। इसलिए इस परिणाम को पूरे आगरा जिले के जनमत का सीधा संकेत मानने के बजाय शिक्षक मतदाताओं के रुझान के रूप में देखना अधिक उचित होगा।
सपा प्रत्याशी डॉ.आकाश अग्रवाल ने चुनाव से पहले ही भाजपा और प्रशासन पर सरकारी मशीनरी के दुरुपयोग के आरोप लगाए थे। मतदान के दौरान कथित अनियमितताओं की शिकायतों के बाद खेरागढ़, सैंया और फतेहाबाद के तीन बूथों पर पुनर्मतदान कराया गया। इस कार्रवाई के बाद चुनाव की निष्पक्षता को लेकर राजनीतिक बहस और तेज हो गई।
मतगणना के दौरान भी आकाश अग्रवाल ने प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने दावा किया कि काउंटिंग कई बार रोकी गई और उन्हें हराने के लिए गड़बड़ी करने की कोशिश हुई। हालांकि, उनके सभी आरोपों पर भारतीय जनता पार्टी ने भी वार किया और जवाब दिया लेकिन प्रशासनिक चुप्पी बहुत कुछ कहती है।
जीत के बाद ‘नवभारत’ से विशेष बातचीत में डॉ. आकाश अग्रवाल ने कहा कि वह चुनाव के दौरान लगाए गए आरोपों पर आज भी कायम हैं। उन्होंने कहा कि भाजपा और प्रशासन ने धांधली के प्रयास किए और मतदान के दौरान बूथ कैप्चरिंग की शिकायतें सामने आईं। उनके मुताबिक, शिकायतों के बाद तीन बूथों पर पुनर्मतदान होना इस पूरे घटनाक्रम का महत्वपूर्ण पहलू है।
आकाश अग्रवाल ने भाजपा पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि चुनाव के दौरान उनके साथ जो हुआ, वह असहनीय था। उन्होंने आरोप लगाया कि मतगणना के दौरान सरकारी तंत्र का दुरुपयोग करके काउंटिंग रुकवाने की कोशिश हुई। उनके अनुसार, सपा कार्यकर्ताओं और समर्थकों ने मतगणना स्थल पर डटे रहकर इन प्रयासों का विरोध किया।
मतगणना के दौरान मंडी समिति में कई बार तनावपूर्ण स्थिति बनी। काउंटिंग रुकने के विरोध में सपा कार्यकर्ता पहुंचे और पुलिस से उनकी झड़प हुई। पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को मतगणना स्थल से दूर किया। इसी दौरान भाजपा प्रत्याशी हरिकिशोर तिवारी ने अपने साथ मारपीट किए जाने का आरोप लगाया।
दूसरी ओर, डॉ.आकाश अग्रवाल ने भाजपा प्रत्याशी और उनके समर्थकों पर अपने तथा अपने समर्थकों के साथ मारपीट करने का आरोप लगाया। आकाश अग्रवाल का दावा है कि उनके कपड़े तक फाड़ दिए गए। दोनों पक्षों के आरोपों के बीच मतगणना स्थल का माहौल तनावपूर्ण रहा। इन आरोपों पर निष्पक्ष निष्कर्ष संबंधित साक्ष्यों और जांच के आधार पर ही निकाला जा सकता है।
डॉ.आकाश अग्रवाल ने जीत के बाद शिक्षकों के प्रति आभार जताते हुए कहा कि जिन शिक्षकों ने उन्हें जीत की दहलीज तक पहुंचाया, वह हमेशा उनके ऋणी रहेंगे। उन्होंने भरोसा दिलाया कि शिक्षक समुदाय के हितों और उनकी समस्याओं को उठाना उनकी प्राथमिकता रहेगी।
आगरा के राजनीतिक परिदृश्य में यह चुनाव कई सवाल छोड़ गया है। भाजपा की व्यापक राजनीतिक मौजूदगी के बावजूद शिक्षक सीट पर सपा की जीत ने यह दिखाया कि विशिष्ट निर्वाचन क्षेत्रों में मुकाबले के अपने अलग समीकरण होते हैं। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि चुनाव के दौरान लगाए गए आरोपों पर आगे क्या कार्रवाई होती है और दोनों दल इस नतीजे से क्या राजनीतिक सबक लेते हैं।