DSS नरेंद्र सिंह चाहर की पत्नी (सोर्स- फोटो नवभारत)
आगरा

आगरा कैंट मारपीट मामले में RPF के 2 सब इंस्पेक्टर और 2 कांस्टेबल दोषी, 32 बयान और 35 CCTV से खुलासा

Agra Cantt RPF Case: आगरा कैंट पर DSS नरेंद्र सिंह चाहर से मारपीट के मामले में विभागीय जांच में 2 RPF सब इंस्पेक्टर और 2 कांस्टेबल दोषी पाए गए, बयान के आधार पर जांच रिपोर्ट रेलवे मुख्यालय भेजी गई।

प्रदीप कुमार रावत, स्निग्धा श्रीवास्तव

Agra Cantt Railway Station: आगरा कैंट रेलवे स्टेशन पर 12 जुलाई को डिप्टी स्टेशन सुपरिटेंडेंट (डीएसएस) नरेंद्र सिंह चाहर के साथ मारपीट का मामला अब एक और निर्णायक मोड़ पर पहुंच गया है। करीब डेढ़ माह से अधिक समय तक चली विभागीय जांच में रेलवे सुरक्षा बल (आरपीएफ) के दो सब इंस्पेक्टर और दो कांस्टेबल को दोषी पाया गया है।

तीन सदस्यीय जांच समिति ने 32 लोगों के बयान और स्टेशन परिसर में लगे 35 सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगालने के बाद अपनी रिपोर्ट रेलवे मुख्यालय को भेज दी है। जांच रिपोर्ट में आरपीएफ कर्मचारियों के आचरण पर गंभीर टिप्पणी करते हुए कहा गया है कि उन्होंने पद की गरिमा का ध्यान नहीं रखा और अपने अधिकार क्षेत्र से बाहर जाकर डीएसएस के साथ मारपीट की।

लेकिन आगरा कैंट का यह मामला सिर्फ एक रेलवे स्टेशन पर हुई मारपीट तक सीमित नहीं रहा था। घटना की गूंज संसद से लेकर रेलवे बोर्ड तक पहुंची और इस पूरे प्रकरण में आरपीएफ के वरिष्ठ अधिकारी भी कार्रवाई की जद में आए।

संसद में गूंजा आगरा कैंट का मामला

डीएसएस नरेंद्र सिंह चाहर के साथ हुई घटना को समाजवादी पार्टी के राज्यसभा सांसद रामजी लाल सुमन ने संसद में उठाया था। उन्होंने सदन के पटल पर इस मामले को रखते हुए रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव से पूरे घटनाक्रम की जानकारी मांगी थी।

सांसद ने रेलवे की कार्यप्रणाली और डीएसएस के साथ हुए व्यवहार को लेकर गंभीर सवाल उठाए थे। इस घटना को रेलवे कर्मचारियों के साथ होने वाले कथित दुर्व्यवहार और अधिकारों के दुरुपयोग से जोड़कर भी सवाल खड़े किए गए थे। संसद में मामला उठने के बाद आगरा कैंट प्रकरण की गंभीरता और बढ़ गई थी।

वरिष्ठ अधिकारी पर भी पड़ी थी गाज

मामले की तपिश सिर्फ निचले स्तर के कर्मचारियों तक सीमित नहीं रही। इस पूरे प्रकरण में मंडल सुरक्षा आयुक्त (आरपीएफ कमांडेंट) पी राज मोहन का तबादला भी कर दिया गया था। रेलवे बोर्ड स्तर से हुई इस कार्रवाई को आगरा कैंट की घटना के बाद उठाए गए महत्वपूर्ण कदमों में माना गया।

घटना के बाद जिस तरह रेलवे कर्मचारियों में आक्रोश बढ़ा, आरपीएफ के खिलाफ प्रदर्शन हुए और मामला संसद तक पहुंचा, उससे रेलवे प्रशासन पर भी दबाव बढ़ता गया।

प्लेटफॉर्म एक पर बहन ने उठाया था ऐसा कदम कि मची अफरा-तफरी

इस मामले की सबसे भावुक और झकझोर देने वाली तस्वीर उस समय सामने आई थी, जब डीएसएस नरेंद्र सिंह चाहर की बहनें अपने भाई के साथ हुई घटना के विरोध में आगरा कैंट रेलवे स्टेशन के प्लेटफॉर्म नंबर एक पर रेलवे ट्रैक पर लेट गई थीं।

उनके इस कदम से स्टेशन पर अफरा-तफरी का माहौल पैदा हो गया था। परिवार की ओर से दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की जा रही थी। इस घटना ने पूरे प्रकरण को और संवेदनशील बना दिया था और रेलवे प्रशासन के सामने परिवार की नाराजगी भी खुलकर सामने आ गई थी।

डीएसएस की पत्नी हरेंद्री चाहर ने भी आरोपित आरपीएफ कर्मचारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की थी। उन्होंने यहां तक कहा था कि यदि दोषियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई नहीं हुई तो वह आत्मघाती कदम उठा सकती हैं। परिवार की ओर से सामने आए इन बयानों और घटनाक्रम ने मामले की गंभीरता को और बढ़ा दिया था।

महिला यात्री को ट्रेन में चढ़ाने को लेकर हुआ था विवाद

पूरा मामला 12 जुलाई की घटना से जुड़ा है। एक महिला यात्री को ट्रेन में चढ़ाने के लिए डिप्टी स्टेशंस स्टूडेंट में लोको पायलट को वॉकी टॉकी के माध्यम से ट्रेन रुकवाने को लेकर डीएसएस नरेंद्र सिंह चाहर और आरपीएफ टीम के बीच विवाद हुआ था। कहासुनी बढ़ी और मामला कथित मारपीट तक पहुंच गया।

आरोप यह भी था कि प्लेटफॉर्म नंबर एक पर डीएसएस के साथ मारपीट करने के बाद उन्हें जमीन पर घसीटते हुए आरपीएफ थाने तक ले जाया गया। घटना का वीडियो सामने आने के बाद यह मामला तेजी से वायरल हुआ और रेलवे कर्मचारियों में जबरदस्त आक्रोश फैल गया।

आगरा से निकली चिंगारी 30 शहरों तक पहुंची

आगरा कैंट की घटना के विरोध में रेलवे कर्मचारियों का गुस्सा सड़कों पर उतर आया। आगरा, मथुरा, झांसी समेत करीब 30 शहरों में रेलकर्मियों ने प्रदर्शन किए। आगरा में बड़ी संख्या में रेलवे कर्मचारी विरोध में शामिल हुए और आरपीएफ कर्मियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की मांग की थी।

मामले की गंभीरता को देखते हुए RPF के ASI मेघराज मीणा और बाल किशन तथा कांस्टेबल जितेंद्र और बदन सिंह के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया। चारों को निलंबित करने के साथ उनका घटना के 24 घंटे के दौरान ही स्थानांतरण भी किया गया था।

32 लोगों के बयान, 35 कैमरों की फुटेज बनी जांच का आधार

मामले की निष्पक्ष जांच के लिए वरिष्ठ मंडल परिचालन प्रबंधक कुलदीप मीना की निगरानी में तीन सदस्यीय जांच समिति गठित की गई। समिति ने घटना से जुड़े 32 अधिकारियों और कर्मचारियों के बयान दर्ज किए। घटना से संबंधित महिला यात्री का बयान भी लिया गया। इसके अलावा स्टेशन परिसर में लगे 35 सीसीटीवी कैमरों की फुटेज को खंगाला गया। वीडियो फुटेज और गवाहों के बयानों के आधार पर घटनाक्रम की कड़ियों को जोड़ने के बाद समिति ने अपनी रिपोर्ट तैयार की है।

जांच में चारों दोषी, अब मुख्यालय तय करेगा सजा

जांच समिति ने आरपीएफ के सब इंस्पेक्टर मेघराज मीणा और बाल किशन तथा कांस्टेबल जितेंद्र और बदन सिंह को दोषी माना गया है। रिपोर्ट में स्पष्ट टिप्पणी की गई है कि आरपीएफ कर्मचारियों ने अपने पद की गरिमा के अनुरूप व्यवहार नहीं किया और अपने अधिकार क्षेत्र से बाहर जाकर डीएसएस के साथ मारपीट की।

चारों को दोषी पाए जाने के बाद उनके खिलाफ विभागीय कार्रवाई की संस्तुति की गई है। जांच रिपोर्ट अब रेलवे मुख्यालय पहुंच चुकी है। ऐसे में अगली कार्रवाई का फैसला मुख्यालय स्तर से होना है।

अब सवाल कार्रवाई की कठोरता पर

आगरा कैंट का यह प्रकरण अब सिर्फ चार कर्मचारियों के दोषी पाए जाने तक सीमित नहीं है। इस घटना ने रेलवे में विभागीय अधिकार क्षेत्र, कर्मचारियों की सुरक्षा और वरिष्ठता के सम्मान से लेकर आरपीएफ की कार्यप्रणाली तक कई सवाल खड़े किए थे।

एक ओर जहां मामला संसद में उठाया गया, वहीं दूसरी ओर आरपीएफ के वरिष्ठ मंडल सुरक्षा आयुक्त के तबादले से लेकर चार कर्मचारियों के निलंबन और अब विभागीय जांच में दोषी पाए जाने तक कार्रवाई की कड़ी आगे बड़ी है।

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