ग्रामीणों ने खुद संभाली गांव के विकास की कमान (सोर्स- नवभारत लाइव)
आगरा

आगरा में शिकायतें करते-करते थके ग्रामीण, अब हाथों में फावड़ा लेकर उतरे मैदान में, सिस्टम पर उठे सवाल

Agra Budhana Village: आगरा के गांव बुढ़ाना में सड़क, नाली और साफ-सफाई की समस्याओं से परेशान ग्रामीणों ने अब खुद ही गांव के विकास की जिम्मेदारी उठा ली है। एकजुट होकर समस्याओं को दूर करने में जुटे हैं।

प्रदीप कुमार रावत, रवनेश विश्‍वकर्मा

Highlights:

  • बुढ़ाना गांव में सड़क, नाली और साफ-सफाई की समस्या

  • सरकारी दफ्तरों के चक्कर लगाने और शिकायतों के बावजूद समाधान नहीं हुआ

  • श्रमदान कर सड़क और नालियों की सफाई व मरम्मत कर रहे ग्रामीण

Agra Rural Development: केंद्र हो या राज्य सरकार, आम नागरिकों को सड़क, पानी, बिजली, स्वास्थ्य और शिक्षा जैसी बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराना सरकार की जिम्मेदारी है। लेकिन जब इन सुविधाओं के लिए लोगों को सरकारी दफ्तरों के चक्कर लगाने पड़ें और उनकी समस्याओं का समाधान न हो, तो व्यवस्था पर सवाल उठना स्वाभाविक है।

आगरा के बरौली अहीर ब्लॉक के गांव बुढ़ाना में भी कुछ ऐसा ही देखने को मिल रहा है। यहां सड़क, नाली और साफ-सफाई की समस्याओं से परेशान ग्रामीणों ने अब खुद ही गांव के विकास की जिम्मेदारी उठा ली है। रविवार से ग्रामीण एकजुट होकर श्रमदान कर रहे हैं और गांव की समस्याओं को दूर करने में जुटे हैं।

बुनियादी सुविधाओं के लिए दफ्तरों के लगाते रहे चक्कर

गांव बुढ़ाना के ग्रामीण लंबे समय से सड़क, नाली और साफ-सफाई की समस्याओं से परेशान हैं। उनका कहना है कि इन समस्याओं के समाधान के लिए उन्होंने संबंधित अधिकारियों और सरकारी विभागों के कई चक्कर लगाए, लेकिन कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।

गांव की खराब सड़कें, नालियों की अव्यवस्था और जलभराव की समस्या से लोगों को काफी परेशानी हो रही है। बार-बार शिकायत करने के बाद भी जब समस्याओं का समाधान नहीं हुआ, तो ग्रामीणों ने खुद ही गांव की स्थिति सुधारने का फैसला किया।

सरकारी व्यवस्था से निराश लोगों ने शुरू किया श्रमदान

ग्राम विकास समिति बुढ़ाना के सदस्यों और ग्रामीणों ने मिलकर गांव की व्यवस्था सुधारने का बीड़ा उठाया है। पिछले कई रविवार से ग्रामीण एकजुट होकर श्रमदान कर रहे हैं। इस दौरान सड़क और नालियों की सफाई के साथ क्षतिग्रस्त हिस्सों की मरम्मत भी की जा रही है।

इस अभियान में ग्रामीण तन, मन और धन से सहयोग कर रहे हैं। उनका प्रयास है कि गांव में जलभराव की समस्या दूर हो, सड़कों के किनारे हो रहे अतिक्रमण को हटाने में सहयोग मिले और लोगों का आवागमन आसान हो सके।

ग्रामीणों की यह पहल दिखाती है कि जब सरकारी व्यवस्था से उम्मीद टूटने लगती है, तो लोग अपनी समस्याओं के समाधान के लिए खुद आगे आने को मजबूर हो जाते हैं।

ग्रामीणों की एकजुटता बनी मिसाल, अधिकारियों पर सवाल

बुढ़ाना के ग्रामीणों के इस प्रयास की आसपास के क्षेत्रों में भी सराहना हो रही है। ग्राम विकास समिति और ग्रामीणों ने मिलकर यह दिखाया है कि सामूहिक प्रयास और जनभागीदारी से गांव की कई समस्याओं को दूर करने की दिशा में काम किया जा सकता है।

हालांकि, ग्रामीणों का यह प्रयास केवल सराहना तक सीमित नहीं होना चाहिए। यह संबंधित अधिकारियों और सरकारी विभागों के लिए भी सोचने का विषय है कि आखिर सड़क, नाली और साफ-सफाई जैसी बुनियादी सुविधाओं के लिए ग्रामीणों को खुद श्रमदान करने की जरूरत क्यों पड़ रही है?

बुढ़ाना के ग्रामीणों ने अपनी एकजुटता और मेहनत से गांव की तस्वीर बदलने की पहल जरूर की है, लेकिन सड़क, नाली और स्वच्छता जैसी मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराना सरकार और संबंधित विभागों की जिम्मेदारी है। अब देखना होगा कि ग्रामीणों की इस पहल के बाद जिम्मेदार अधिकारी गांव की समस्याओं पर ध्यान देते हैं या फिर ग्रामीणों को अपने संसाधनों के दम पर ही विकास की लड़ाई जारी रखनी पड़ेगी।

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