

Agra Municipal Corporation: मेट्रो सिटी आगरा... स्मार्ट सिटी आगरा... और ताज नगरी आगरा। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ लगातार आगरा को विकास की नई सौगात दे रहे हैं। बड़ी-बड़ी परियोजनाएं जमीन पर उतर रही हैं और आगरा को आधुनिक शहर बनाने के दावे भी किए जा रहे हैं। लेकिन शहर की सड़कें इन दावों की एक अलग ही तस्वीर दिखा रही हैं।
आगरा की लाइफलाइन कहे जाने वाले एमजी रोड से लेकर कमला नगर और दयालबाग जैसे पॉश इलाकों तक सड़कें सवाल खड़े कर रही हैं। खास बात यह है कि इन इलाकों में बड़ी संख्या में कारोबारी, अधिकारी और राजनीतिक हस्तियां रहती हैं। भाजपा के कई बड़े नेताओं का भी इन क्षेत्रों से जुड़ाव है। इसके बावजूद यहां की सड़कें बदहाल हैं।
ताजा मामला मोती कटरा के खिड़की काले खां क्षेत्र का है, जहां करीब एक सप्ताह पहले अचानक सड़क धंस गई। सड़क इतनी गहराई तक धंसी कि मौके पर करीब 15 फीट गहरा गड्ढा बन गया। हालात ऐसे हैं कि सड़क का एक हिस्सा पूरी तरह बंद हो गया है।
यह रास्ता कोई सुनसान सड़क नहीं है। यहां से दिन-रात लोगों की आवाजाही होती है। स्थानीय लोगों के मुताबिक इसी मार्ग से एम्बुलेंस, महिलाएं और स्कूली बच्चे भी गुजरते हैं। ऐसे में 15 फीट गहरी धंसी सड़क किसी बड़े हादसे को न्योता दे रही है।
स्थानीय लोगों का आरोप है कि सड़क धंसने के बाद जिम्मेदारी को लेकर नगर निगम और जल संस्थान एक-दूसरे पर ठीकरा फोड़ रहे हैं, लेकिन कई दिन गुजरने के बावजूद समस्या का स्थायी समाधान नहीं हुआ है।
लोगों का यह भी दावा है कि आसपास के कुछ मकानों पर भी सड़क धंसने का असर दिखाई दे रहा है। अगर सड़क का दायरा और बढ़ा या कोई राहगीर गड्ढे में गिरा तो इसकी जिम्मेदारी आखिर किसकी होगी?
सबसे बड़ा सवाल यह भी है कि जब प्रदेश सरकार आगरा के विकास को लेकर लगातार गंभीर नजर आ रही है, तो शहर की जमीन पर बुनियादी सुविधाओं की यह हालत क्यों है?
गौर करने वाली बात है कि इसी सड़क का निरीक्षण कैबिनेट मंत्री योगेंद्र उपाध्याय भी कर चुके हैं और अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए गए थे। बावजूद इसके स्थानीय लोगों को अब भी राहत का इंतजार है।
सवाल सिर्फ एक सड़क का नहीं है। सवाल उस व्यवस्था का है जहां सड़क धंसने के बाद विभाग एक-दूसरे पर जिम्मेदारी डालते नजर आते हैं।