Central Government Employees : केंद्रीय कर्मचारियों के लिए 8वें वेतन आयोग को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। सरकार अलग-अलग कर्मचारी संगठनों और संबंधित पक्षों से बातचीत कर रही है ताकि नए वेतन ढांचे को लेकर सुझाव लिए जा सकें।
इसी बीच केंद्रीय कर्मचारियों के संगठनों ने सरकार के सामने कुछ अहम मांगें रखी हैं, जिन पर अगर सहमति बनती है तो लाखों कर्मचारियों की सैलरी और भत्तों पर बड़ा असर पड़ सकता है।
कर्मचारी संगठनों ने राष्ट्रीय संयुक्त परामर्श तंत्र (National Council of Joint Consultative Machinery) के माध्यम से एक मांग पत्र सौंपा है। इस मांग पत्र में कहा गया है कि कर्मचारियों की सैलरी की समीक्षा के लिए 10 साल का अंतराल अब काफी लंबा हो गया है।
उनका तर्क है कि तेजी से बढ़ती महंगाई और बदलती आर्थिक परिस्थितियों को देखते हुए वेतन संशोधन हर 5 साल में होना चाहिए। इसके साथ ही कर्मचारियों ने सालाना वेतन वृद्धि की मौजूदा 3 प्रतिशत दर को बढ़ाकर 6 प्रतिशत करने की मांग भी की है। संगठनों का मानना है कि वर्तमान आर्थिक स्थिति में कर्मचारियों के जीवन स्तर को बनाए रखने के लिए यह जरूरी कदम हो सकता है।
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मांग पत्र में न्यूनतम वेतन को लेकर भी सुझाव दिए गए हैं। कर्मचारी संगठनों ने कहा है कि सबसे निचले स्तर यानी लेवल-1 के कर्मचारियों की शुरुआती न्यूनतम सैलरी लगभग 69,000 रुपये प्रति माह की जानी चाहिए। इसके अलावा अलग-अलग पे स्केल को सरल बनाने और कुछ श्रेणियों को आपस में मिलाने की भी सिफारिश की गई है।
हालांकि वेतन आयोग लागू होने पर भारत सरकार के खर्च में बढ़ोतरी होना तय माना जाता है, लेकिन कर्मचारी संगठनों का नजरिया इससे अलग है। उनका कहना है कि कर्मचारियों की सैलरी पर होने वाले खर्च को केवल आर्थिक बोझ नहीं माना जाना चाहिए।
उनका तर्क है कि बेहतर वेतन मिलने पर लोगों की खरीदारी क्षमता बढ़ेगी, जिससे बाजार में मांग बढ़ेगी और सरकार को टैक्स के रूप में अधिक राजस्व मिल सकता है। फिलहाल 8वें वेतन आयोग को लेकर अंतिम फैसला आना बाकी है और इसकी सिफारिशों को तैयार करने में अभी समय लग सकता है।