GrapheneOS (Source. Social Media) 
टेक्नॉलजी

फोन का डेटा बचाना पड़ा भारी, एयरपोर्ट पर GrapheneOS यूजर गिरफ्तार, क्या अब प्राइवेसी भी बन गई है जुर्म?

GrapheneOS: अमेरिका के अटलांटा एयरपोर्ट से सामने आया एक मामला दुनियाभर में डिजिटल प्राइवेसी को लेकर नई बहस छेड़ रहा है। जिसमें सवाल यह है कि कोई व्यक्ति अपने स्मार्टफोन के डेटा को सुरक्षित रख सकते है।

सिमरन सिंह

Atlanta Airport Case: अमेरिका के अटलांटा एयरपोर्ट से सामने आया एक मामला दुनियाभर में डिजिटल प्राइवेसी को लेकर नई बहस छेड़ रहा है। जिसमें सवाल यह है कि अगर कोई व्यक्ति अपने स्मार्टफोन के डेटा को सुरक्षित रखने के लिए ऐसा फीचर इस्तेमाल करता है जिससे पूरा डेटा डिलीट हो जाए तो क्या उसे अपराध माना जा सकता है? इसी सवाल के केंद्र में है GrapheneOS नाम का प्राइवेसी-फोकस्ड एंड्रॉयड ऑपरेटिंग सिस्टम जिसे लेकर अब कानून और डिजिटल अधिकार आमने-सामने दिखाई दे रहे हैं।

अटलांटा एयरपोर्ट पर आखिर क्या हुआ?

रिपोर्ट में ससामने आई जानकारी के अनुसार अमेरिकी नागरिक सैम्युअल्स ट्यूनिक डोमिनिकन रिपब्लिक से लौटने के बाद अटलांटा के हार्ट्सफील्ड-जैकसन एयरपोर्ट पर बॉर्डर सिक्योरिटी अधिकारियों की जांच के दायरे में आया था। अधिकारियों ने उससे फोन अनलॉक करने के लिए कहा। जैसे ही उसने पासवर्ड दर्ज किया फोन की स्क्रीन कुछ बार ब्लिंक हुई, डिवाइस रीस्टार्ट हो गया और उसमें मौजूद पूरा डेटा हमेशा के लिए डिलीट हो गया। वहीं अमेरिकी न्याय विभाग (DOJ) का आरोप है कि उसने जानबूझकर सबूत मिटाने के उद्देश्य से डेटा डिलीट किया जिसे संघीय अपराध माना जा रहा है।

क्या है GrapheneOS और क्यों है चर्चा में?

GrapheneOS के बारे में बताए तो यह गूगल पिक्सल स्मार्टफोन्स के लिए बनाया गया एक कस्टम एंड्रॉयड ऑपरेटिंग सिस्टम है जिसे खास तौर पर मजबूत प्राइवेसी और सिक्योरिटी के लिए जाना जाता है। इसमें मौजूद Duress Passcode फीचर ऐसी स्थिति के लिए डिजाइन किया गया है जब यूजर दबाव या खतरे में हो। अगर सामान्य पासवर्ड की जगह यह विशेष पासकोड डाला जाए तो फोन अपने पूरे डेटा को स्थायी रूप से डिलीट कर देता है। वहीं अब यह फीचर इस पूरे विवाद की सबसे बड़ी वजह बन गया है।

यूरोप में भी बढ़ा संदेह, कंपनी ने दी सफाई

देखा जा रहा है कि यह विवाद सिर्फ अमेरिका तक सीमित नहीं है। इसकी चर्चा स्पेन के कैटेलोनिया क्षेत्र में भी हो रही है, जहां पुलिस GrapheneOS इस्तेमाल करने वालों पर विशेष नजर रख रही है। इसमें कुछ जांच एजेंसियों का मानना है कि इस तरह के प्राइवेसी टूल का इस्तेमाल आपराधिक नेटवर्क भी कर सकते हैं।

हालांकि GrapheneOS की टीम ने इस पर स्पष्ट रुख अपनाते हुए कहा, "हम पूरी तरह लीगल हैं"। कंपनी का कहना है कि उनका ऑपरेटिंग सिस्टम 100% कानूनी है और इसका उद्देश्य यूजर्स को डेटा चोरी, हैकिंग और गैर-कानूनी निगरानी से बचाना है न कि अपराधियों की मदद करना।

डिजिटल प्राइवेसी बनाम कानून की नई बहस

साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों का इसको लेकर कहना है कि किसी व्यक्ति को केवल इसलिए संदिग्ध मान लेना कि वह मजबूत प्राइवेसी टूल इस्तेमाल करता है डिजिटल अधिकारों के लिए चिंताजनक संकेत है। उनका कहना है कि यदि प्राइवेसी को अपराध से जोड़कर देखा जाने लगा तो भविष्य में आम यूजर्स भी अपने डेटा की सुरक्षा को लेकर असहज महसूस करेंगे। वहीं अटलांटा का यह मामला अब सिर्फ एक गिरफ्तारी तक सीमित नहीं रहा बल्कि इसने पूरी दुनिया में यह सवाल खड़ा कर दिया है कि डिजिटल युग में अपनी निजी जानकारी की रक्षा करना मौलिक अधिकार है या फिर जांच एजेंसियों की नजर में शक की वजह।

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