Palm Oil से कैसे बचेगा पानी। Source. Gemini
टेक्नॉलजी

डेटा सेंटर की गर्मी का इलाज बना पाम ऑयल, नई टेक्नोलॉजी बचाएगी रोज 40 लाख लोगों जितना पानी

Data Center Cooling: दुनिया में AI और डेटा सेंटर का विस्तार तेजी से हो रहा है लेकिन इनके बढ़ते इस्तेमाल के साथ पानी और बिजली की खपत भी बड़ी चुनौती बन रही है।

सिमरन सिंह

Palm Oil Cooling Technology: दुनिया में AI और डेटा सेंटर का विस्तार तेजी से हो रहा है लेकिन इनके बढ़ते इस्तेमाल के साथ पानी और बिजली की खपत भी बड़ी चुनौती बन रही है। इसी समस्या से निपटने के लिए मलेशिया ने पाम ऑयल आधारित एक नई कूलिंग टेक्नोलॉजी पेश की है। मलेशियाई पाम ऑयल बोर्ड (MPOB) ने साविट इकोथर्म नाम का कूलिंग लिक्विड विकसित किया है। वहीं स्थानीय पाम ऑयल से तैयार यह तकनीक डेटा सेंटरों में पानी की जरूरत को काफी कम करने के साथ कूलिंग के लिए इस्तेमाल होने वाली बिजली भी बचाने का दावा करती है।

रोज 876 मिलियन लीटर पानी बचाने की क्षमता

रिपोर्ट में बताया गया कि मलेशिया के स्थानीय डेटा सेंटरों में पारंपरिक वॉटर-कूलिंग सिस्टम से रोजाना करीब 876 मिलियन लीटर पानी की खपत होती है। यह मात्रा करीब 40 लाख लोगों के घरेलू दैनिक पानी इस्तेमाल के बराबर बताई गई है। ऐसे में डेटा सेंटरों की संख्या बढ़ने के साथ स्थानीय जल संसाधनों पर दबाव बढ़ने की चिंता भी बढ़ रही है। वहीं साविट इकोथर्म को इसी चुनौती का समाधान माना जा रहा है। इसकी मदद से डेटा सेंटरों में कूलिंग के लिए बड़ी मात्रा में साफ पानी इस्तेमाल करने की जरूरत कम हो सकती है।

आखिर कैसे काम करता है Sawit EcoTherm?

इस तकनीक में सर्वर के गर्म होने वाले हिस्सों को पाम ऑयल आधारित विशेष लिक्विड में रखा जाता है। यह लिक्विड एक क्लोज्ड-लूप सिस्टम में लगातार गर्मी को अवशोषित करता रहता है। वहीं इस प्रक्रिया में पानी की जरूरत नहीं होती। AI सर्वर सामान्य कंप्यूटरों की तुलना में करीब तीन से पांच गुना ज्यादा गर्मी पैदा कर सकते हैं। ऐसे में लिक्विड कूलिंग ज्यादा गर्मी को संभालने में मदद करती है और पारंपरिक कूलिंग फैन की जरूरत भी घट सकती है।

बिजली की खपत भी 50% तक घटने का दावा

MPOB ने जानकारी में बताया है कि इस तकनीक से कूलिंग से जुड़ी बिजली खपत में 30% से 50% तक कमी आ सकती है। बताया गया है कि यह लिक्विड 95% तक रिन्यूएबल पाम मटीरियल से बना है और इसमें जहरीले केमिकल नहीं होते। इसका फायदा सिर्फ पर्यावरण तक सीमित नहीं है। जोहोर और सेलंगोर जैसे इलाकों में डेटा सेंटर तेजी से बढ़ रहे हैं। वॉटर-फ्री कूलिंग अपनाने से घरेलू जल आपूर्ति पर दबाव कम हो सकता है। वहीं स्थानीय पाम ऑयल की मांग बढ़ने से किसानों और ग्रीन-टेक क्षेत्र में रोजगार को भी फायदा मिलने की उम्मीद है।

ऐसे में माना जा रहा है कि अगर यह तकनीक बड़े पैमाने पर सफल होती है तो डेटा सेंटर इंडस्ट्री की बढ़ती पानी और ऊर्जा जरूरतों के बीच यह मलेशिया के लिए एक महत्वपूर्ण ग्रीन-टेक समाधान साबित हो सकती है।

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