Why Kimi K3 is a Threat to OpenAI: जनवरी 2025 में जब में चीन हांग्ज़ौ डीपसीक आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस बेसिक टेक्नोलॉजी रिसर्च कंपनी लिमिटेड अपनी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) चैटबॉट डीपसीक (DeepSeek) लॉन्च किया, तब इसे चैटजीपीटी, गूगल जेमिनी और ग्रोक एआई जैसे अमेरिकी कंपनियां ने इसे सिर्फ एक तुक्का माना था और दावा किया था कि चीनी कंपनियां चाह कर भी उनकी बराबरी नहीं कर सकती है।
ओपनएआई के सीईओ सैम ऑल्टमैन ने तो यहां तक कह दिया था कि चीन की तकनीक उनकी तकनीक से कम से कम 10 साल पीछे हैं। लेकिन अब चीन की एक और कंपनी मूनशॉट एआई ने हाल ही में अपना नया एआई चैटबॉट किमी के3 (Kimi K3) लॉन्च किया है। जिसने न सिर्फ ओपनएआई बल्कि अमेरिका की बाकी एआई कंपनियों की नींद उड़ा दी है। ऐसे में सवाल उठता है कि किमी के3 में ऐसा क्या है जिसने ओपनएआई को परेशान कर दिया है? अमेरिकी कंपनी ने क्यों किमी के3 पर चोरी का इल्जाम लगाया है? और किमी के3 को अमेरिकी कंपनियों के लिए खतरा क्यों माना जा रहा है?
मूनशॉट एआई का कहना है कि किमी के3 सिर्फ चैटबॉट नहीं है। यह कोडिंग, वित्तीय सलाह, रिसर्च और वीडियो एडिटिंग जैसे कई काम कर सकता है। लॉन्च के बाद इसकी मांग इतनी बढ़ गई कि कंपनी को नए यूजर रजिस्ट्रेशन कुछ समय के लिए रोकने पड़े। इससे साफ है कि बाजार में इस मॉडल को लेकर काफी उत्सुकता है।
हालांकि किमी के3 की लोकप्रियता बढ़ने के साथ विवाद भी शुरू हो गया। अमेरिकी AI कंपनी एंथ्रोपिक AI ने आरोप लगाया कि मूनशॉट एआई ने उसके क्लाउड मॉडल की क्षमताओं का गलत तरीके से इस्तेमाल किया है। बता दें कि अमेरिकी कंपनियों द्वारा चीनी कंपनियों पर चोरी के यह आरोप नए नहीं है। इससे पहले चैटजीपीटी भी डीपसीक पर अपनी तकनीक की नकल करने का आरोप लगा चुकी है। चीन ने इन आरोपों को राजनीतिक बताया है।
मूनशॉट एआई की स्थापना 2023 में यांग जिलिन ने की थी। उन्होंने चीन के सिंघुआ यूनिवर्सिटी से पढ़ाई की और बाद में अमेरिका के कार्नेगी मेलन यूनिवर्सिटी से पीएचडी की। कुछ समय अमेरिकी टेक कंपनियों में काम करने के बाद वह चीन लौटे और अपनी AI कंपनी शुरू की। आज Moonshot AI चीन की सबसे चर्चित AI कंपनियों में शामिल है।
कंपनी का दावा है कि Kimi K3 दुनिया का सबसे बड़ा ‘ओपन-वेट’ आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस मॉडल है। इसमें 2.8 ट्रिलियन पैरामीटर हैं। पैरामीटर वो सेटिंग्स होते हैं जो तय करती हैं कि AI किसी सवाल का जवाब कैसे देगा। ज्यादा पैरामीटर होने का मतलब यह नहीं कि मॉडल हमेशा बेहतर होगा, लेकिन इससे उसकी क्षमता बढ़ सकती है।
अक्सर लोग ओपन-वेट और ओपन-सोर्स को एक जैसा मान लेते हैं, लेकिन दोनों अलग हैं। ओपन-वेट मॉडल में डेवलपर मॉडल के पैरामीटर्स डाउनलोड करके उन्हें अपने हिसाब से इस्तेमाल कर सकते हैं। वहीं ओपन-सोर्स में मॉडल का कोड और ट्रेनिंग प्रक्रिया भी सार्वजनिक होते हैं। इसलिए ओपन-सोर्स ज्यादा खुला मॉडल माना जाता है। विशेषज्ञों का कहना है कि चीन की AI कंपनियां ओपन-वेट मॉडल को एक रणनीति के रूप में इस्तेमाल कर रही हैं। इससे ज्यादा डेवलपर उनके मॉडल अपनाते हैं और तेजी से एक बड़ा इकोसिस्टम तैयार होता है। अमेरिकी कंपनियों के पास पहले से मजबूत क्लाउड नेटवर्क है, जबकि चीनी कंपनियां इस तरीके से अपनी पहुंच बढ़ाना चाहती हैं।
अमेरिका ने चीन को उन्नत AI चिप्स की सप्लाई पर कई प्रतिबंध लगाए हैं। एनवीडिया (Nvidia) जैसी कंपनियों के हाई-एंड चिप्स चीन तक नहीं पहुंच पाते। ऐसे में चीनी कंपनियां कम लागत वाले ओपन-वेट मॉडल विकसित कर रही हैं ताकि कम संसाधनों में भी बेहतर AI बनाया जा सके। विशेषज्ञों के मुताबिक चीन चाहता है कि AI का इस्तेमाल केवल बड़ी कंपनियों तक सीमित न रहे। सरकार चाहती है कि AI छोटे कारोबार, स्थानीय प्रशासन और क्लाउड सेवाओं तक तेजी से पहुंचे। ओपन-वेट मॉडल इस लक्ष्य को पूरा करने में मदद कर सकते हैं। चीन इसे अंतरराष्ट्रीय तकनीकी सहयोग के रूप में भी पेश कर रहा है।
दिलचस्प बात यह है कि अमेरिका में भी अब ओपन एआई मॉडल पर चर्चा तेज हो गई है। माइक्रोसॉफ्ट के सीईओ सत्य नडेला, एनवीडिया के जेनसन हुआंग समेत कई बड़े उद्योगपति ओपन मॉडल का समर्थन कर चुके हैं। उनका मानना है कि इससे नवाचार बढ़ेगा और AI तकनीक अधिक लोगों तक पहुंचेगी। हर कोई ओपन मॉडल के पक्ष में नहीं है। एंथ्रोपिक AI के सीईओ डारियो अमोदेई का कहना है कि पूरी तरह खुले AI मॉडल सुरक्षा के लिए खतरा बन सकते हैं। उनका तर्क है कि ऐसे मॉडल का गलत इस्तेमाल साइबर हमलों या जैविक हथियारों जैसी गतिविधियों में किया जा सकता है। इसी वजह से उन्होंने ओपन मॉडल के समर्थन वाले पत्र पर हस्ताक्षर नहीं किए।
एंथ्रोपिक ने मूनशॉट एआई और डीपसीक पर ‘डिस्टिलेशन’ का आरोप लगाया है। इसमें नया AI मॉडल किसी बड़े मॉडल से बातचीत करके उसकी शैली और जवाब सीखने की कोशिश करता है। विशेषज्ञों का कहना है कि यह तकनीक पूरी तरह गैरकानूनी नहीं है, लेकिन बड़े पैमाने पर इसका इस्तेमाल बौद्धिक संपदा और सुरक्षा से जुड़े सवाल खड़े करता है।
रिपोर्टों के मुताबिक अमेरिकी प्रशासन जांच कर रहा है कि क्या मूनशॉट एआई ने अपने मॉडल को ट्रेन करने के लिए प्रतिबंधित चिप्स का इस्तेमाल किया। कुछ रिपोर्टों में यह भी कहा गया है कि अमेरिका भविष्य में चीनी ओपन-वेट AI मॉडल पर और सख्त कदम उठा सकता है। हालांकि अभी इस पर अंतिम फैसला नहीं हुआ है।
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विशेषज्ञों का मानना है कि चीन ने AI क्षेत्र में तेजी से प्रगति की है, लेकिन वह अभी भी अमेरिका से पीछे है। कंप्यूटिंग क्षमता, पूंजी, वैश्विक वितरण और उन्नत चिप्स के मामले में अमेरिकी कंपनियों के पास बढ़त बनी हुई है। फिर भी Kimi K3 जैसे मॉडल यह दिखाते हैं कि कम लागत वाले AI भी वैश्विक प्रतिस्पर्धा को बदल सकते हैं।