क्या Likes और Followers तय कर रहे आपकी खुशी? नई स्टडी में Gen Z की Mental Health को लेकर चौंकाने वाले खुलासे

Gen Z Mental Health: सोशल मीडिया सिर्फ मनोरंजन या फोटो-वीडियो शेयर करने का माध्यम नहीं रह गया है। यह खासकर Gen Z के लिए यह उनकी पहचान, आत्मविश्वास और खुशी से भी जुड़ता जा रहा है।
new study reveals shocking findings regarding Gen Z mental health.
Gen Z Digital Detox (Source. Gemini)
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Gen Z Digital Detox: आज के समय में सोशल मीडिया सिर्फ मनोरंजन या फोटो-वीडियो शेयर करने का माध्यम नहीं रह गया है। यह खासकर Gen Z के लिए यह उनकी पहचान, आत्मविश्वास और खुशी से भी जुड़ता जा रहा है। ऐसे में सवाल सामने यह भी आता है कि क्या सोशल मीडिया पर मिलने वाले लाइक्स, कमेंट्स और फॉलोअर्स अब मानसिक स्वास्थ्य को भी प्रभावित कर रहे हैं? बता दें कि इसको लेकर हाल ही में आई एक स्टडी में ऐसे कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं जो सोशल मीडिया के बढ़ते प्रभाव की ओर इशारा करते हैं।

141 छात्राओं पर हुई रिसर्च सामने आए हैरान करने वाले आंकड़े

जानकारी के लिए बता दें कि यह अध्ययन राजस्थान के कोटा स्थित गवर्नमेंट आर्ट्स गर्ल्स कॉलेज के समाजशास्त्र विभाग की प्रोफेसर डॉ. ज्योति सिडाना के नेतृत्व में किया गया था। जिसमें 25 दिनों तक चली इस रिसर्च में विभिन्न कॉलेजों की 141 छात्राओं को शामिल किया गया। वहीं अध्ययन का उद्देश्य यह समझना था कि सोशल मीडिया युवाओं की भावनाओं, रिश्तों और मानसिक स्वास्थ्य को किस तरह प्रभावित कर रहा है।

रिसर्च में सामने आया कि 82.9% छात्राओं ने माना कि उनकी पोस्ट पर मिलने वाले लाइक्स, कमेंट्स और व्यूज उनके मूड को सीधे प्रभावित करते हैं। वहीं 9.8% ने कहा कि इसका कुछ हद तक असर पड़ता है जबकि सिर्फ 7.3% छात्राओं ने बताया कि सोशल मीडिया के रिस्पॉन्स से उनके मूड पर कोई फर्क नहीं पड़ता।

हजारों फॉलोअर्स, फिर भी महसूस होता है अकेलापन

इस स्टडी का सबसे चौंकाने वाला नतीजा यह रहा कि 61% छात्राओं ने कहा कि सोशल मीडिया पर बड़ी संख्या में फॉलोअर्स होने के बावजूद वे वास्तविक जीवन में खुद को अकेला महसूस करती हैं। उनका मानना है कि ऑनलाइन रिश्ते, आमने-सामने मिलने वाले रिश्तों की जगह नहीं ले सकते। वह मुश्किल समय में परिवार और करीबी दोस्तों का साथ ही सबसे ज्यादा मायने रखता है।

फोन से दूरी बनाना बन रहा है मुश्किल

अध्ययन में यह भी साफ तौर पर सामने आया कि 48.2% छात्राएं नोटिफिकेशन आते ही तुरंत फोन चेक करती हैं जबकि 43.9% ने स्वीकार किया कि उनके फोन इस्तेमाल करने का कोई तय समय नहीं है। इतना ही नहीं करीब 70% छात्राओं ने कहा कि वे सोशल मीडिया से कुछ समय के लिए दूरी बनाना चाहती हैं लेकिन ऐसा करना उनके लिए आसान नहीं है।

इसके अलावा 61% छात्राओं ने माना कि ट्रोलिंग और नेगेटिव कमेंट्स उन्हें तनाव और दुख का एहसास कराते हैं। वहीं 43.9% का मानना है कि सोशल मीडिया पर दिखावा बढ़ता जा रहा है जबकि 41.5% ने कहा कि इसका असर उनकी असली पहचान पर पड़ता है।

स्टडी की सलाह: Digital Detox है जरूरी

रिसर्च में सुझाव दिया गया है कि समय-समय पर Digital Detox करना चाहिए और परिवार व दोस्तों के साथ ज्यादा समय बिताना चाहिए। साथ ही अपनी खुशी और आत्मविश्वास को लाइक्स, कमेंट्स या फॉलोअर्स से जोड़ने के बजाय वास्तविक रिश्तों और आमने-सामने की बातचीत को प्राथमिकता देनी चाहिए। वहीं विशेषज्ञों का मानना है कि सोशल मीडिया का संतुलित उपयोग ही बेहतर मानसिक स्वास्थ्य की कुंजी है।

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